द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट है कि प्रतिबंधों के बावजूद, ईरान रोज़ाना 24 से 28 लाख बैरल तेल का निर्यात कर रहा है और युद्ध के बाद तो इससे दोगुना कमा रहा है। चीन गुप्त सैन्य बेड़े के जरिए ईरान की मदद कर रहा है।
ईरान-अमेरिका और इसराइल के बीच चल रहे युद्ध के बावजूद ईरान अपने तेल निर्यात को बनाए रखते हुए भारी मुनाफा कमा रहा है। द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान रोजाना 24 लाख से 28 लाख बैरल तेल निर्यात कर रहा है, जो युद्ध और प्रतिबंधों के बावजूद जारी है। इससे ईरान को युद्ध से पहले के मुकाबले दोगुना राजस्व मिल रहा है, जबकि खाड़ी के अन्य प्रतिद्वंद्वी देश अपने उत्पादन में कटौती कर रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आधी सदी से मिडिल ईस्ट देश खुद को सस्ते पेट्रोलियम के विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश करते रहे हैं, लेकिन ट्रंप के युद्ध ने स्थिति को बदल दिया है। ईरान की तेल निर्यात मशीनरी हमलों और प्रतिबंधों के प्रति अधिक लचीली हो गई है। चीन इस प्रक्रिया में ईरान की सबसे बड़ी मददगार है, जो ईरानी क्रूड खरीदकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को मुनाफा पहुंचा रहा है।
ईरान के तेल निर्यात की मात्रा युद्ध शुरू होने से पहले मई 2025 में 28 लाख बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गई थी, लेकिन ट्रंप प्रशासन के कदमों से यह कुछ कम हुई। फिर भी, वर्तमान में यह 24-28 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर पर बनी हुई है। उच्च तेल कीमतों (ब्रेंट क्रूड $100 से ऊपर और कभी-कभी $112 तक) के कारण ईरान को पहले से दोगुना राजस्व प्राप्त हो रहा है।
चीन की भूमिका महत्वपूर्ण
चीन ईरानी तेल का मुख्य खरीदार है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को ईरानी क्रूड बेचने में मदद कर रहा है, जिससे गार्ड्स को सीधा फायदा हो रहा है। ईरान ने तेल बिक्री के तरीकों को इस तरह तैयार किया है कि वे हमलों और प्रतिबंधों से बच सकें। इसमें शैडो फ्लीट टैंकरों का इस्तेमाल, दस्तावेजों में हेराफेरी और वैकल्पिक व्यापार मार्ग शामिल हैं।
युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज प्रभावी रूप से बंद होने जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खाड़ी के अन्य देशों (सऊदी अरब, यूएई आदि) के उत्पादन में कमी आई है, जबकि ईरान अपनी निर्यात क्षमता बनाए रखने में सफल रहा है। इससे ईरान को बाजार में फायदा मिल रहा है।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का नियंत्रण
ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स युद्ध और राज्य दोनों पर पूरा नियंत्रण रख रहे हैं। युद्ध ने रिजीम को मजबूत किया है, हालांकि ऑपरेशनल नुकसान हुए हैं। ईरान की तेल मशीनरी अब हमलों के प्रति अधिक लचीली हो गई है यानी वो हमले झेल सकती है।
तेल निर्यात जारी रहना ईरान की रणनीतिक सफलता
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की सैन्य कार्रवाई के बावजूद ईरान का तेल निर्यात जारी रहना उसकी रणनीतिक सफलता है। ईरान ने युद्ध में जीवित रहना ही अपनी जीत माना है। कुछ रिपोर्टों में उल्लेख है कि ट्रंप प्रशासन ने कुछ समय के लिए ईरानी तेल पर प्रतिबंध हटाने की अनुमति भी दी थी, लेकिन ईरान ने होर्मुज से तेल गुजरने पर शर्तें लगाईं।तेल और युद्ध का वैश्विक प्रभाव
इस युद्ध से वैश्विक तेल कीमतें बढ़ी हैं, जिससे अमेरिका, यूरोप और एशिया में महंगाई का दबाव बढ़ा है। अमेरिका खुद दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक होने के कारण उच्च कीमतों से कुछ फायदा उठा रहा है, लेकिन ईरान को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ हो रहा है। चीन जैसे देश ईरानी तेल खरीदकर अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं और साथ ही पेट्रोयुआन (युआन में तेल व्यापार) को बढ़ावा दे रहे हैं।
ईरान की अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर पड़ा है, लेकिन तेल राजस्व ने कुछ राहत दी है। रिवोल्यूशनरी गार्ड्स इस राजस्व से अपनी ताकत बढ़ा रहे हैं।
द इकोनॉमिस्ट की रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले युद्ध से ईरान अनपेक्षित रूप से लाभान्वित हो रहा है। चीन की मदद और सही तेल निर्यात व्यवस्था के कारण ईरान दोगुना राजस्व कमा रहा है, जबकि उसके प्रतिद्वंद्वी पीछे छूट गए हैं। हालांकि युद्ध जारी है और आगे की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन फिलहाल ईरान की तेल मशीनरी मजबूत साबित हो रही है।