ईरान अमेरिका को मुँहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दे रहा है और सीधे भिड़ने को तैयार है। इसने सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच स्टारलिंक से दी जा रही सेवाओं को जाम कर दिया है। तो क्या यह सब ईरान के बस की बात है क्योंकि महंगा मिलिट्री-ग्रेड जैमिंग उपकरण के बिना स्टारलिंक को जाम करना संभव नहीं है? क्या इसके पीछे किसी बड़ी ताक़त का हाथ है?

इस सवाल का जवाब ईरान में स्टारलिंक को जाम करने की घटना से भी मिल सकता है। पिछले कुछ दिनों से चल रहे बड़े विरोध-प्रदर्शनों के बीच ईरान की सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट को बंद कर दिया है। इसी को देखते हुए एलन मस्क की स्टारलिंक सैटेलाइट सेवा का इस्तेमाल ईरान में किया जा रहा था। लेकिन ईरान ने सोमवार को स्टारलिंक सेवा को भी जाम कर दिया है। इससे ईरान के 8 करोड़ से ज्यादा लोग दुनिया से कट गए हैं। तो सवाल यह है कि ईरान को इतनी उन्नत जामिंग तकनीक कहां से मिली? क्या रूस या चीन जैसे देश ईरान का साथ दे रहे हैं?

विरोध प्रदर्शन और इंटरनेट ब्लैकआउट

ईरान में विरोध प्रदर्शन पिछले हफ्ते से चल रहे हैं। ये प्रदर्शन आर्थिक समस्याओं, महंगाई और सरकार की नीतियों के खिलाफ शुरू हुए थे। लेकिन जल्द ही ये पूरे देश में फैल गए। प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए और कई जगहों पर हिंसा भी हुई। रिपोर्टों में कहा गया है कि अब तक क़रीब 500 लोग मारे गए हैं। ईरान की सरकार ने इन प्रदर्शनों को दबाने के लिए 8 जनवरी को पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाओं को बंद कर दिया। यह ब्लैकआउट इतना सख्त है कि लोग बाहर की दुनिया से संपर्क नहीं कर पा रहे।

कहा जा रहा है कि यह ईरान का अब तक का सबसे बड़ा इंटरनेट शटडाउन है। पहले 2019 और 2022 में भी ऐसा हुआ था, लेकिन इस बार यह ज्यादा सख्त और लंबा चल सकता है।

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इसराइल की साजिश बताया है। वे कहते हैं कि दुश्मन देश ईरान को अंदर से कमजोर करना चाहते हैं। लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि वे बस बेहतर जीवन और आजादी चाहते हैं।

स्टारलिंक को जाम करने की कोशिश

स्टारलिंक एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा है। यह सैटेलाइट से काम करती है, इसलिए सामान्य इंटरनेट बंद होने पर भी चल सकती है। 2022 के प्रदर्शनों में भी स्टारलिंक ने ईरान के लोगों की मदद की थी। लेकिन इस बार ईरान की सरकार ने स्टारलिंक को भी जाम कर दिया है। डिजिटल राइट्स एक्सपर्ट मान रहे हैं कि ईरान सरकार जीपीएस जामिंग से आगे की तकनीक इस्तेमाल कर रही है, जैसे यूक्रेन में रूस ने किया था। रिपोर्ट है कि ईरान में क़रीब 40000 से 50000 स्टारलिंक डिवाइस हैं, लेकिन अब वे काम नहीं कर रहे। कहा जा रहा है कि यह जामिंग मिलिट्री ग्रेड की है, जो बहुत महंगी और उन्नत है।

स्टारलिंक पर ईरान का बैन

ईरान ने स्टारलिंक को बैन कर दिया है। नया कानून कहता है कि इसका इस्तेमाल करने पर 6 महीने से 2 साल की जेल हो सकती है। अगर जासूसी से जोड़ा गया तो मौत की सजा भी। लेकिन फिर भी लोग इस्तेमाल कर रहे हैं।

कैसे काम करता है यह जैमर?

जानकारों का कहना है कि ईरान ने मिलिट्री-ग्रेड जैमर्स का इस्तेमाल किया है। स्टारलिंक लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स से काम करती है जो पृथ्वी के करीब घूमते हैं। यूजर टर्मिनल्स जीपीएस से सैटेलाइट्स को लोकेट करते हैं। जैमर्स मजबूत रेडियो सिग्नल भेजकर असली सिग्नल्स को दबा देते हैं, जिससे कनेक्शन टूट जाता है।

यह तकनीक बेहद उन्नत और महंगी है। रूस ने यूक्रेन में स्टारलिंक को जैम करने की कोशिश की थी। चीन ने भी ड्रोन स्वार्म से स्टारलिंक जैमिंग के टेस्ट किए हैं।

ईरान के पीछे कौन, रूस या चीन?

सवाल उठ रहा है कि ईरान को स्टारलिंक जाम करने की इतनी उन्नत तकनीक कहां से मिली? विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक ईरान ने खुद नहीं बनाई। संभव है कि रूस या चीन ने मदद की हो। रूस ने यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक को जाम करने की कोशिश की थी, इसलिए उसके पास ऐसी तकनीक है। चीन भी ईरान का करीबी दोस्त है और तकनीकी मदद दे सकता है।

अमेरिका से भिड़ने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इंटरनेट ब्लैकआउट पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वे एलन मस्क से बात करेंगे ताकि ईरान के लोगों को स्टारलिंक की फ्री पहुंच मिल सके। ट्रंप ने कहा, 'हम एलन से बात करेंगे क्योंकि वे इस काम में माहिर हैं।' इससे ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ सकता है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघर घालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो ईरान अमेरिकी सैन्य ठिकानों या इसराइल पर हमला कर सकता है।

ट्रंप पेंटागन से ईरान पर सैन्य कार्रवाई की हामी चाहते हैं। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और खामेनेई सरकार को चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा, 'अगर ईरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को मारता है तो अमेरिका उनकी मदद करेगा। हम तैयार हैं और अगर जरूरत पड़ी तो कार्रवाई करेंगे।' ईरान ने कहा है कि वह अमेरिका से बातचीत को तैयार है, लेकिन जवाबी कार्रवाई को भी तैयार है। एक्टिविस्टों का दावा है कि प्रदर्शनों में 500 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।
ईरान के आईआरजीसी यानी इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने प्रदर्शनों को अमेरिका और इसराइल की साजिश बताया है। वे कहते हैं कि यह जून 2025 के इसराइल-ईरान युद्ध का हिस्सा है। लेकिन प्रदर्शनकारी कहते हैं कि यह उनकी अपनी आवाज़ है।

सरकार के समर्थन में भी प्रदर्शन

ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई की सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन 18वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। ईरान में प्रदर्शन जारी हैं। तेहरान, मशहद और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर हैं। सरकार ने सेना तैनात कर दी है। सरकार विरोधी प्रदर्शन के बीच अब बड़े पैमाने पर सरकार के समर्थन में प्रदर्शन भी हो रहे हैं।