अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर दुनिया के तमाम देश खुश हैं। स्वागत कर रहे हैं। दुनिया के तमाम देश इसलिए खुश हैं कि ट्रंप जैसा शख्स कुछ भी कर सकता है। लेकिन ज़रूरत है स्थायी शांति की, जिसकी मांग ईरान लगातार कर रहा है।
पीट हेगसेथ और डोनाल्ड ट्रंप। हेगसेथ ही ट्रंप के सलाहकार बने हुए थे।
अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत शांति समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत शुक्रवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को इस युद्धविराम की घोषणा की। इसके साथ ही ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पाँचवां हिस्सा संभालने वाला एक अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है।
इस घटनाक्रम का दुनिया भर के देशों ने स्वागत किया है और इसे क्षेत्र में तनाव कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
जर्मनी ने कहा- युद्ध स्थायी रूप से खत्म हो
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना की। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में कूटनीतिक बातचीत के जरिए युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने पर ध्यान देना चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया ने स्वागत किया
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और विदेश मंत्री पेनी वोंग ने संयुक्त बयान में कहा कि यह समझौता लंबे समय से जारी ऊर्जा संकट को कम करने में मदद करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यवधान और हमलों के कारण वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।यूक्रेनः यूक्रेन ने भी इस युद्धविराम का स्वागत किया। विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने कहा कि अमेरिका की निर्णायक भूमिका प्रभावी रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इसी तरह का दबाव रूस पर भी डाला जाए ताकि यूक्रेन में जारी युद्ध समाप्त हो सके।
न्यूज़ीलैंडः न्यूज़ीलैंड के विदेश मंत्री विंस्टन पीटर्स ने युद्धविराम का स्वागत किया, लेकिन कहा कि स्थायी समाधान के लिए अभी और काम बाकी है। उन्होंने कहा कि इस युद्ध का असर मध्य पूर्व से बाहर भी व्यापक रूप से पड़ा है।
मलेशियाः मलेशिया ने इसे “महत्वपूर्ण प्रगति” बताते हुए कहा कि यह क्षेत्र में शांति और स्थिरता बहाल करने की दिशा में बड़ा कदम है।मलेशिया ने सभी पक्षों से ईमानदारी से समझौते का पालन करने और किसी भी उकसावे वाली कार्रवाई से बचने की अपील की, ताकि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित न हो।
इंडोनेशियाः इंडोनेशिया ने युद्धविराम का स्वागत करते हुए दोनों देशों से एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की अपील की। साथ ही लेबनान में मारे गए तीन इंडोनेशियाई शांति सैनिकों की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की गई।
जापानः जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरु किहारा ने इसे “सकारात्मक कदम” बताया और कहा कि अंतिम समझौते की दिशा में यह महत्वपूर्ण प्रगति है। उन्होंने मध्य पूर्व में तनाव कम करना जापान की प्राथमिकता बताया।
संयुक्त राष्ट्रः संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से युद्धविराम का पालन करने की अपील की। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सुरक्षा और मानवीय संकट को कम करने के लिए संघर्ष का समाप्त होना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही पाकिस्तान और अन्य देशों की मध्यस्थता की सराहना की।
मिस्रः मिस्र के विदेश मंत्रालय ने कहा कि यह युद्धविराम “एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर” है, जिसका उपयोग वार्ता और कूटनीति को आगे बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने जोर दिया कि सैन्य अभियानों को रोकना और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान करना आवश्यक है। मिस्र ने यह भी कहा कि वह पाकिस्तान और तुर्की के साथ मिलकर क्षेत्रीय स्थिरता के लिए प्रयास जारी रखेगा।
ओमानः ओमान ने इस घोषणा का स्वागत किया और युद्ध समाप्त करने के लिए पाकिस्तान सहित सभी पक्षों के प्रयासों की सराहना की।
ओमान ने कहा कि अब प्रयासों को और तेज करना होगा ताकि संकट का स्थायी समाधान निकाला जा सके।
इसराइलः बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले रोकने के फैसले का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह कदम ईरान से उत्पन्न परमाणु, मिसाइल और आतंकवादी खतरे को खत्म करने के प्रयास का हिस्सा है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता, जहां इसराइली सेना और ईरान समर्थित संगठन हिज़्बुल्लाह के बीच संघर्ष जारी है।
इराक ने कहा- दोनों देश समझौते का पालन करें
इराक के विदेश मंत्रालय ने युद्धविराम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही कहा कि स्थायी समाधान के लिए अमेरिका और ईरान दोनों को इस समझौते का पूरी तरह पालन करना होगा। मंत्रालय ने कहा कि वह क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट कम करने, संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देने के प्रयासों का समर्थन करता है। साथ ही, सभी पक्षों से युद्धविराम का पूर्ण पालन करने और किसी भी तरह की सैन्य वृद्धि से बचने की अपील की गई। गौरतलब है कि ईरान समर्थित समूहों और अमेरिकी बलों के बीच झड़पों के चलते इराक भी इस संघर्ष की चपेट में आ चुका है। यहां बताना ज़रूरी है कि इराक में शिया हुकूमत है और वो ईरान का सबसे नज़दीकी पड़ोसी है। दोनों देशों की सीमाएं मिली हुई हैं।अमेरिका-ईरान युद्धविराम को वैश्विक स्तर पर राहत और उम्मीद के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि अधिकांश देशों ने यह स्पष्ट किया है कि यह केवल पहला कदम है। स्थायी शांति के लिए निरंतर कूटनीतिक प्रयास, आपसी विश्वास और समझौते का सख्ती से पालन जरूरी होगा।