ईरान ने अब सरकार के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने वालों को अजीबोगरीब चेतावनी दी है। देश के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मुवाहेदी आजाद ने चेतावनी दी है कि प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले हर व्यक्ति को 'ईश्वर का दुश्मन' माना जाएगा। ईरानी कानून के तहत यह आरोप मौत की सजा के साथ जुड़ा है। सरकारी टीवी पर जारी बयान में कहा गया है कि सिर्फ प्रदर्शनकारी ही नहीं, बल्कि जो लोग 'दंगाइयों की मदद' करेंगे, उन्हें भी यही सजा मिलेगी।

ईरान में पिछले दो हफ्तों से चल रहे बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों के बीच सरकार ने बहुत सख्त रुख अपनाया है। ईरानी कानून के मुताबिक, अगर कोई समूह या संगठन इस्लामिक गणराज्य के खिलाफ हथियार उठाकर विरोध करता है तो उसके सभी सदस्य या समर्थक जो जानबूझकर मदद करते हैं, उन्हें 'मोहारे ब' कहा जा सकता है। 'मोहारे ब' यानी 'ईश्वर का दुश्मन'। क़ानून में इसके लिए सजा के रूप में फांसी, दाहिने हाथ और बाएं पैर का काटना, या आजीवन निर्वासन का प्रावधान है।
अटॉर्नी जनरल ने कहा, 'जो लोग राष्ट्र के साथ धोखा करते हैं, असुरक्षा फैलाते हैं और विदेशी ताकतों का साथ देते हैं, उनके खिलाफ बिना किसी नरमी, दया या ढील के मुकदमा चलाया जाएगा। अभियोजन जल्दी और सख्ती से तैयार किया जाए।'

प्रदर्शन क्यों शुरू हुए?

प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 से शुरू हुए, जब ईरानी मुद्रा रियाल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गई। इससे महँगाई आसमान छूने लगी, खाने-पीने की चीजों की क़ीमतें बहुत बढ़ गईं। शुरू में तेहरान के ग्रैंड बाजार के दुकानदारों ने हड़ताल की, लेकिन जल्दी ही यह पूरे देश में फैल गया। अब यह सरकार के ख़िलाफ़ बड़ा आंदोलन बन चुका है, जिसमें लोग इस्लामिक गणराज्य के ख़िलाफ़ नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शन अब सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। 

ईरान में लोग पुराने शाह के समय का झंडा लहरा रहे हैं। पूर्व शाह के बेटे क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी निर्वासन में रह रहे हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर लोगों से शनिवार और रविवार को सड़कों पर उतरने और शहरों पर कब्जा करने की अपील की।

65 से ज़्यादा मौतें

अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स एजेंसी के अनुसार, प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 65 लोग मारे गए हैं, जिनमें 7 नाबालिग शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर प्रदर्शनकारी हैं, कुछ सुरक्षा बलों के सदस्य भी। 2638 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए गए हैं। कुछ रिपोर्टों में मौतों की संख्या 100 से ज्यादा बताई गई है।

ईरान में इंटरनेट ब्लैकआउट जारी है। तेहरान में इंटरनेट और फोन लाइनें गुरुवार से बंद हैं। यह ब्लैकआउट 60 घंटे से ज्यादा का हो चुका है, जिससे जानकारी बाहर आना मुश्किल हो गया है। लोग स्टारलिंक जैसी सैटेलाइट इंटरनेट का इस्तेमाल करके ख़बरें भेज रहे हैं।

अमेरिका का रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया है और चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने हिंसा की तो अमेरिका कार्रवाई करेगा। ईरान ने कहा है कि अमेरिकी सैनिक और इसराइल निशाना बन सकते हैं।

ईरान में यह प्रदर्शन 2022-23 के 'महसा अमिनी' आंदोलन के बाद सबसे बड़ा है। महसा अमिनी आंदोलन 16 सितंबर 2022 को शुरू हुआ, जब 22 वर्षीय कुर्द ईरानी महिला महसा अमिनी की तेहरान की नैतिकता पुलिस यानी मोरलिटी पुलिस की हिरासत में मौत हो गई। महसा अमिनी को अनिवार्य हिजाब के नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। हिरासत में उन्हें कथित तौर पर पीटा गया, जिससे वे कोमा में चली गईं और उनकी मौत हो गई। यह घटना पूरे ईरान में आग की तरह फैल गई और महिलाओं, युवाओं, छात्रों, पुरुषों ने सड़कों पर उतरकर हिजाब उतार दिए, बाल काटे, और नारे लगाए। यह सिर्फ हिजाब के खिलाफ नहीं था। यह ईरानी इस्लामी गणराज्य के खिलाफ व्यापक विरोध था। यह महिलाओं के अधिकारों व व्यक्तिगत स्वतंत्रता के लिए और आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार, और दमन के खिलाफ था।

बहारहाल, लोग अर्थव्यवस्था की तबाही, महंगाई और सरकार की सख्त नीतियों से तंग हैं। अब देखना है कि यह आंदोलन कितना आगे बढ़ता है, क्योंकि सरकार बहुत सख्त हो गई है और इंटरनेट बंद करके जानकारी रोक रही है।