अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में हुई शांति वार्ता बेनतीजा रहने पर ईरान ने साफ़ कह दिया है कि ईरान कोई जल्दबाजी नहीं कर रहा है और गेंद अब अमेरिका के पाले में है। ईरान की तस्नीम न्यूज एजेंसी ने एक सूत्र के हवाले से बताया है कि ईरान ने वार्ता में कई प्रस्ताव रखे थे। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, 'ईरान ने रियलिस्टिक तरीके से मुद्दों को देखने की जिम्मेदारी अब अमेरिका पर डाल दी है।' रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है कि ईरान ने चेतावनी दी है कि होर्मुज़ स्ट्रेट तब तक नहीं खुलेगा जब तक अमेरिका कोई सही समझौता नहीं करता। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने अमेरिकी उप राष्ट्रपति जेडी वेंस की टिप्पणियों के बाद ईरानी मीडिया से कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच कुछ मुद्दों पर समझ बन गई है, लेकिन 2-3 अहम मुद्दों पर अभी भी राय अलग-अलग है। उन्होंने कहा, 'ये बातचीत 40 दिनों की जबरन थोपी जंग के बाद हुई थी। और ये बातचीत अविश्वास और शक के माहौल में हुई थी। इसलिए शुरुआत से ही यह उम्मीद करना स्वाभाविक नहीं था कि एक ही बैठक में सब कुछ तय हो जाएगा। किसी को भी ऐसी उम्मीद नहीं थी।'

ईरान का आरोप

ईरान का कहना है कि अमेरिका ने युद्ध में जो कुछ हासिल नहीं कर सका, वही बातचीत के ज़रिए हासिल करना चाहता था। ईरान ने इन 'ग़लत' मांगों को ठुकरा दिया। ईरान के घाना स्थित दूतावास ने एक्स पर पोस्ट में लिखा, 'अमेरिका ने युद्ध से जो नहीं पा सका, वही सब बातचीत में मांगा। ईरान ने साफ़ तौर पर नहीं कह दिया और वार्ता खत्म हो गई।' दूतावास ने यह भी कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस खाली हाथ वाशिंगटन लौट रहे हैं, जबकि होर्मुज़ स्ट्रेट अभी भी बंद है।

जेडी वेंस ने क्या कहा है?

वार्ता खत्म होने के बाद जेडी वेंस ने प्रेस को बताया था, 'हम बिना किसी समझौते के लौट रहे हैं।' उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अपनी रेड लाइंस बहुत साफ़ बता दी थीं, लेकिन ईरान उन शर्तों को मानने को तैयार नहीं हुआ। वेंस ने खास तौर पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर जोर दिया। उन्होंने कहा, 'हमें ईरान से पक्का वादा चाहिए कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे– न अभी, न दो साल बाद, बल्कि लंबे समय तक के लिए। अभी तक हमें ऐसा कोई ठोस भरोसा नहीं मिला है।'

होर्मुज़ स्ट्रेट पर विवाद

होर्मुज़ स्ट्रेट दुनिया का बहुत अहम समुद्री रास्ता है, जहाँ से बहुत सारा तेल गुजरता है। युद्ध के दौरान ईरान ने इसे बंद कर दिया था, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें बढ़ गईं। 

अमेरिका होर्मुज़ स्ट्रेट को तुरंत खुलवाना चाहता है, लेकिन ईरान कह रहा है कि बिना उचित समझौते के यह नहीं खुलेगा। ईरान इसे अपनी सबसे मजबूत ताकत मान रहा है और इससे ज्यादा से ज्यादा फायदा उठाना चाहता है।

होर्मुज पर ट्रंप की राय साफ़ नहीं?

इस्लामाबाद की बातचीत में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ी अड़चन बन गया। लेकिन अमेरिका इस मुद्दे पर आखिरकार क्या चाहता है, यह अभी भी बिल्कुल साफ़ नहीं है। और यही अनिश्चितता इन बातचीतों को इतना मुश्किल बना रही है।

ट्रंप के दो अलग-अलग बयान

पिछले सिर्फ 10 दिनों में राष्ट्रपति ट्रंप ने दो बिल्कुल अलग-अलग बातें कही हैं। पहले उन्होंने कहा था कि होर्मुज स्ट्रेट से अमेरिका को कोई मतलब नहीं है। वाशिंगटन को वहाँ से गुजरने वाले तेल की जरूरत नहीं है। यह दूसरे देशों का काम है कि वे इसे सुरक्षित रखें और ईरान से झगड़ा सुलझाएँ। लेकिन कुछ दिनों बाद ही उन्होंने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका की माँगों के बीच सबसे अहम है। अगर इसे खुला नहीं रखा गया, तो बातचीत भी नहीं हो सकती।
वाक़ई यह समझ से परे है कि ट्रंप इस मुद्दे पर आखिर कहाँ खड़े हैं, क्योंकि ये दोनों बातें एक-दूसरे से पूरी तरह उल्टी हैं। पेंटागन ने बताया है कि अमेरिकी जहाज होर्मुज से बिना किसी रुकावट के गुजरे और ईरानी रक्षा व्यवस्था ने उन्हें कुछ नहीं किया। ईरान की तरफ से इस पर कुछ विवाद है। जो बात साफ़ दिख रही है, वह यह है कि ईरान होर्मुज को अपना सबसे ताकतवर हथियार मानता है। वह इसे बिना ज्यादा फायदा लिए आसानी से नहीं छोड़ना चाहता।

ट्रंप की राय बार-बार बदल रही है। यह किससे पूछा जा रहा है और कब पूछा जा रहा है, इस पर उनका जवाब निर्भर कर रहा है। ऐसे में अगले दौर की बातचीत में इस बड़े अंतर को पाटना बहुत मुश्किल दिख रहा है।

अमेरिका ने परमाणु हथियार पर पक्का वादा मांगा

वेंस ने यह नहीं बताया कि तेहरान ने क्या-क्या ठुकराया, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका को कोई साफ़ और पक्का भरोसा नहीं मिला कि ईरान निकट भविष्य में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। वेंस ने कहा, 'साफ़ बात यह है कि हमें ईरान से एक साफ़ वादा चाहिए कि वे परमाणु हथियार नहीं बनाएंगे और न ही ऐसे उपकरण बनाएंगे जिनकी मदद से वे जल्दी परमाणु हथियार बना सकें। यही अमेरिकी राष्ट्रपति का मुख्य लक्ष्य है और हम इन्हीं बातों को लेकर बातचीत कर रहे थे।'
उन्होंने आगे कहा, 'ईरान के परमाणु कार्यक्रम के जो हिस्से थे, जैसे कि संवर्धन सुविधाएँ, वे पहले ही नष्ट हो चुकी हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या ईरान परमाणु हथियार न बनाने का ठोस और ईमानदार फैसला लेता है- न सिर्फ अभी, न सिर्फ दो साल बाद, बल्कि लंबे समय तक? अभी तक हमें ऐसा कोई पक्का भरोसा नहीं मिला है। हमें उम्मीद है कि आगे मिलेगा।'

अमेरिका क्या चाहता है?

ईरान की स्थानीय मीडिया फार्स न्यूज़ ने बताया कि बातचीत बेनतीजा रही क्योंकि वाशिंगटन ने ऐसी माँगें रखीं जिन्हें तेहरान कभी स्वीकार नहीं कर सकता था। प्रतिनिधिमंडल के एक सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका बातचीत के ज़रिए वह सब कुछ हासिल करना चाहता था जो उसे युद्ध के दौरान नहीं मिल सका था। रिपोर्ट में आगे कहा गया, 'ईरान ने हार्मुज स्ट्रेट, शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा और कई अन्य मुद्दों पर अमेरिका की महत्वाकांक्षी शर्तों को स्वीकार नहीं किया।'

अभी दो हफ्ते का अस्थायी संघर्ष-विराम चल रहा है। अगली दौर की बातचीत के लिए कोई तारीख या जगह तय नहीं हुई है। अगर स्ट्रेट नहीं खुला तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिसका पूरा विश्व पर असर पड़ेगा। क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने की आशंका है। पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच बातचीत कराने में मदद की, लेकिन फिलहाल कोई नतीजा नहीं निकला। ईरान का रुख साफ है कि वे कह रहे हैं कि अमेरिका को अपनी मांगों पर फिर से गंभीरता से सोचना होगा। अमेरिका की तरफ़ से अभी कोई नई प्रतिक्रिया नहीं आई है। स्थिति तेजी से बदल सकती है। हम आगे की ख़बरों पर नज़र रखे हुए हैं।