ईरान में एक तरफ बम और मिसाइलें बरस रही थीं तो उसी दौरान मशहद में लाखों रोते हुए लोगों के बीच देर रात ईरान के रहबर आयतुल्लाह सैयद अली खामेनेई को इमाम रज़ा की दरगाह के कैंपस में सुपुर्दे खाक किया गया। हालांकि अमेरिका ने कहा कि उसने गुरुवार को ईरान पर हमले नहीं किए लेकिन दक्षिणी ईरान हमलों से दहलता रहा। लेकिन इन सारी खबरों के बीच ये खबर ईरान में तेज़ी से फैली कि पिता की नमाज़ ए जनाज़ा में मौजूदा सुप्रीम लीडर मुजतब खामेनेई भी शामिल हुए। कुछ लोगों ने वीडियो भी शेयर किए।

वायरल वीडियो ने बढ़ाईं अटकलें

नमाज़ ए जनाज़ा के दौरान सोशल मीडिया पर एक धुंधला वीडियो तेजी से वायरल हुआ। एक शख्स पहली लाइन में बाईं तरफ खड़ा है जिसकी शक्ल मुजतबा खामेनेई से मिल रही थी। इसी वीडियो में धार्मिक पोशाक पहने एक व्यक्ति मस्जिद की बालकनी से समारोह को देखता दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने दावा किया कि वही मुजतबा खामेनेई हैं, जो पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
हालांकि बाद में ईरानी धर्मगुरु रज़ा मुसवी वाएज़ ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट किया कि वीडियो में दिख रहे व्यक्ति वही थे, मुजतबा खामेनेई नहीं। इसके बावजूद इस वीडियो के वायरल होने से यह साफ हो गया कि समर्थकों की नजरें अंतिम संस्कार से अधिक नए सर्वोच्च नेता की मौजूदगी पर टिकी थीं।
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युद्ध के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं आए

रिपोर्टों के अनुसार फरवरी में इसराइल और अमेरिका के संयुक्त हमले में अली खामेनेई, उनकी पत्नी और परिवार के अन्य सदस्यों की मौत हो गई थी। उसी हमले में मुजतबा खामेनेई भी घायल हुए बताए जाते हैं। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि उनकी चोटें गंभीर नहीं थीं और वह पूरी तरह स्वस्थ हैं। 
सरकार का दावा है कि अमेरिका के साथ चल रही बातचीत और कई अहम फैसलों का नेतृत्व भी वही कर रहे हैं। लेकिन युद्ध शुरू होने के बाद से उन्होंने न तो कोई सार्वजनिक भाषण दिया है और न ही किसी कार्यक्रम में दिखाई दिए हैं। अब तक उनके संदेश केवल लिखित बयान के रूप में ही सामने आए हैं।

इसराइल ने मारने की धमकी दी थी

अंतिम संस्कार से पहले इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मुजतबा खामेनेई भी "मौत के निशाने पर" हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की खुफिया एजेंसियों की हालिया विफलताओं को देखते हुए मुजतबा का सार्वजनिक रूप से सामने आना उनके लिए बड़ा सुरक्षा खतरा बन सकता था। यदि उन पर हमला होता तो न केवल सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया प्रभावित होती बल्कि अमेरिका के साथ बातचीत और भविष्य की सुरक्षा रणनीति पर भी गंभीर असर पड़ सकता था।

AI वीडियो और भेष बदलने की अफवाहें

अंतिम संस्कार के दौरान सोशल मीडिया पर कई एआई वीडियो और तस्वीरें भी वायरल हुईं। इनमें दावा किया गया कि मुजतबा खामेनेई भेष बदलकर आम लोगों के बीच मौजूद थे। कुछ तस्वीरों में बिना दाढ़ी वाले व्यक्ति को काली टोपी में दिखाकर उसे नया सर्वोच्च नेता बताया गया। सरकार समर्थक कुछ पत्रकारों ने भी दावा किया कि वह सुरक्षा एजेंसियों के विशेष इंतजाम के तहत भीड़ में मौजूद थे, लेकिन इन दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।

अंतिम संस्कार में लगे समर्थन के नारेः मशहद में दफन से पहले अंतिम यात्रा के दौरान हजारों समर्थकों ने "मुजतबा, हम आदेश दीजिए" जैसे नारे लगाए और नए सुप्रीम लीडर के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त की। फिर भी छह दिनों तक चले शोक समारोह में मुजतबा खामेनेई कहीं भी दिखाई नहीं दिए। यहां तक कि वह अपने भाइयों मुस्तफा, मसूद और मैसम के साथ भी पिता के अंतिम संस्कार में सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए।

विपक्ष और समर्थकों दोनों के बीच बढ़े सवाल

मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ने ईरान के विपक्ष को यह कहने का मौका दिया है कि उनकी हालत सरकार जितनी सामान्य बता रही है, वास्तविकता उससे अलग हो सकती है। कुछ आलोचकों का दावा है कि उनकी नियुक्ति केवल एक प्रतीकात्मक व्यवस्था हो सकती है, जबकि वास्तविक फैसले कोई दूसरा समूह ले रहा हो। दूसरी ओर कट्टर समर्थकों के बीच भी सवाल उठ रहे हैं कि यदि नए सुप्रीम लीडर पूरी तरह स्वस्थ हैं तो उन्होंने इतने महत्वपूर्ण अवसर पर सार्वजनिक उपस्थिति क्यों नहीं दर्ज कराई। लेकिन ईरानी और अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि जानबूझकर मौत को गले लगाना अक्लमंदी नहीं है। मुजतबा ने इस कार्यक्रम से दूर रहकर बेहतर फैसला किया। क्योंकि दुश्मन चारों तरफ से उनकी तलाश में है और धमकी भी दे रहा है।

जनता पर मुजतबा की मजबूत पकड़

अमेरिका के साथ बातचीत को लेकर ईरान के सत्ता प्रतिष्ठान में पहले से कई धाराएं मौजूद हैं। कट्टरपंथी गुटों ने कुछ वार्ताकारों पर मुजतबा खामेनेई के निर्देशों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था। अंतिम संस्कार के दौरान विदेश मंत्री अब्बास अरागची और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने पत्थर फेंके। इससे लगता है कि मुजतबा की पकड़ ईरान की जनता में बहुत मज़बूत बन गई है। ईरान की सेना आईआरजीसी भी कई बार उनसे आदेश लेने का जिक्र कर चुकी है।

विशेषज्ञ की राय

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान विशेषज्ञ अली वाएज़ ने सीएनएन और अल जज़ीरा पर कहा है कि मुजतबा खामेनेई की गैरमौजूदगी दो संभावनाओं की ओर इशारा करती है- या तो उनकी सुरक्षा को लेकर असाधारण चिंता है या फिर वह अभी भी अपनी चोटों से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। हालांकि उनका यह भी कहना है कि सार्वजनिक रूप से दिखाई न देने का मतलब यह नहीं है कि वह सत्ता में सक्रिय नहीं हैं। संभव है कि वह पर्दे के पीछे रहकर राजनीतिक और सुरक्षा प्रतिष्ठान के बीच संतुलन बनाने की भूमिका निभा रहे हों।
विश्लेषकों का मानना है कि ईरान फिलहाल अपने सुप्रीम लीडर को सार्वजनिक जोखिम से दूर रखकर शासन की निरंतरता बनाए रखना चाहता है। शिया राजनीतिक व्यवस्था में सुप्रीम लीडर सिर्फ एक राजनीतिक पद नहीं बल्कि धार्मिक वैधता का भी केंद्र होता है। इसलिए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार मुजतबा खामेनेई के सामने सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका के साथ संभावित समझौते, युद्धविराम को बनाए रखने और ईरान के भीतर सत्ता प्रतिष्ठान की एकजुटता कायम रखने की है।
फिलहाल मुजतबा खामेनेई की सार्वजनिक गैरमौजूदगी ने कई सवालों को जन्म दिया है। क्या वह वास्तव में पूरी तरह सेहतमंद हैं? क्या वह पर्दे के पीछे से देश चला रहे हैं? या सुरक्षा कारणों से उन्हें पूरी तरह सार्वजनिक जीवन से दूर रखा गया है? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में ईरान की राजनीति और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं।