इसराइली विदेश मंत्री ने दावा किया कि अली लारिजानी मारे गए, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इसकी पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया में कुछ रिपोर्टें कह रही हैं कि लारिजानी ज़िंदा हैं और जल्द ही उनका कोई संदेश जारी होगा। इस ख़बर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। तो सवाल है कि आख़िर अली लारिजानी कौन हैं और ईरान के लिए कितने अहम हैं।
लारिजानी ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति में बेहद अहम शख्स हैं। लारिजानी ईरान के एक बेहद प्रभावशाली और अनुभवी नेता हैं। वे फ़िलहाल ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल यानी एसएनएससी के सेक्रेटरी हैं। यह ईरान का सबसे ताक़तवर सुरक्षा संगठन है जो रक्षा, न्यूक्लियर नीति और रणनीतिक फ़ैसलों को संभालता है। नये सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति में लारिजानी को नंबर दो माना जा रहा है। उन्हें अगस्त 2025 में राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने इस पद पर नियुक्त किया था। पहले वे पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई के प्रतिनिधि और सलाहकार भी रह चुके हैं।
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लारिजानी का जन्म 1957 में इराक के नजफ में हुआ था। उनके परिवार का ईरान की राजनीति में लंबा इतिहास है। उनके पिता एक प्रमुख शिया धर्मगुरु थे जो ईरान के संस्थापक आयतुल्लाह रुहोल्लाह खुमैनी के करीबी थे। लारिजानी ने तेहरान यूनिवर्सिटी से वेस्टर्न फिलॉसफी में पीएचडी की है।

कई बड़े पदों पर रहे

उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी आईआरजीसी में सेवा की। बाद में 1994 से 10 साल तक ईरान के स्टेट ब्रॉडकास्टिंग आईआरआईबी के प्रमुख रहे। 2008 से 2020 तक 12 साल ईरान की संसद मजलिस के स्पीकर रहे। 2005-2007 में वे एसएनएससी के सेक्रेटरी और न्यूक्लियर नेगोशिएटर भी थे। उन्होंने 2005 में राष्ट्रपति चुनाव लड़ा लेकिन महमूद अहमदीनेजाद से हार गए। 2021 और 2024 में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित कर दिए गए थे।

अमेरिका ने लारिजानी को जनवरी में प्रतिबंधित किया था क्योंकि वे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने में शामिल थे। अधिकार समूहों के अनुसार, उन विरोधों में हजारों लोग मारे गए थे।

इस युद्ध में उनकी भूमिका

ताज़ा मध्य पूर्व युद्ध शुरू होने के बाद लारिजानी बहुत सक्रिय हो गए। नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई को सार्वजनिक रूप से कम देखा गया है, लेकिन लारिजानी रैलियों में दिखे, भीड़ के साथ चले और इसराइल-अमेरिका के ख़िलाफ़ सख्त बयान दिए। वे विचारधारा और व्यावहारिक कूटनीति के बीच संतुलन बनाने में माहिर माने जाते हैं। वे 2015 के न्यूक्लियर डील के समर्थक थे लेकिन अमेरिका के बाहर निकलने के बाद भी बातचीत की वकालत करते रहे। हाल ही में उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर दबाव बढ़ा तो ईरान को न्यूक्लियर हथियारों की तरफ़ जाना पड़ सकता है, हालाँकि वे कहते हैं कि ईरान हथियार नहीं बनाना चाहता।
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इस बीच हमले के दावे

इसराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने मंगलवार को दावा किया कि इसराइली सेना ने रात में ईरान पर हमला किया जिसमें अली लारिजानी को निशाना बनाया गया और उन्हें मार दिया गया। इसराइली मीडिया और बीबीसी, रॉयटर्स, अल जजीरा और न्यूयॉर्क टाइम्स जैसी कुछ अंतरराष्ट्रीय न्यूज़ एजेंसियों ने भी इस दावे को रिपोर्ट किया है। इसराइल ने यह भी कहा कि इसी हमले में ईरान की बसिज मिलिशिया के प्रमुख गोलमरेजा सुलेमानी को भी मारा गया। लेकिन ईरान की सरकार या सरकारी मीडिया ने अभी तक लारिजानी की मौत की पुष्टि नहीं की है। ईरानी मीडिया आउटलेट्स जैसे तस्नीम और मेहर ने कहा है कि लारिजानी ज़िंदा हैं और उनका एक संदेश कुछ मिनटों में जारी किया जाएगा। स्थिति अभी साफ़ नहीं है। उनकी मौत हुई या सिर्फ घायल हुए, या यह दावा ही ग़लत है।

अगर मौत की पुष्टि हुई तो क्या असर?

अगर लारिजानी की मौत साबित हो जाती है तो यह ईरान के लिए बड़ा झटका होगा। वे ऐसे नेता हैं जो विचारधारा के साथ कूटनीति चलाते हैं और सिस्टम को अच्छे से समझते हैं। उनकी मौत से ईरान की सुरक्षा और विदेश नीति पर असर पड़ सकता है, खासकर तब जब इसराइल और अमेरिका से युद्ध चल रहा है। लेकिन उनके ज़िंदा रहने से इसराइल और अमेरिका के लिए मुसीबतें कम नहीं होंगी।
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फिलहाल स्थिति साफ़ नहीं है। दुनिया की नज़र ईरान की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी है। अगर वे ज़िंदा हैं तो यह इसराइल के दावे को झुठला सकता है। यह युद्ध में नई मोड़ ला सकता है।