अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि डीजल के महंगा होने, वैश्विक आपूर्ति, कीमतों, अन्य देशों पर प्रभाव और भारत के साथ व्यापार समझौते को देखते हुए रूसी तेल प्रतिबंध में छूट दी गई। भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर के साथ बैठक से एक दिन पहले उनका बयान आया है।
एस जयशंकर और मार्को रुबियो (फाइल फोटो)
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ मंगलवार को मुंबई में होने वाली बैठक से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि रूसी तेल प्रतिबंधों में छूट देते समय भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी ध्यान रखा गया। उनका यह बयान तब आया है जब डीजल की कमी का सामना कर रहे अमेरिका ने अभी कुछ दिन पहले ही रूस से तेल खरीदने का समझौता किया है और इसको लेकर रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट की घोषणा की है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का यह बयान उज्बेकिस्तान में सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया है। उन्होंने साफ़ कहा कि रूसी तेल पर लगाए गए प्रतिबंधों में छूट देते समय कई बातों का ध्यान रखा गया। इनमें 'भारत के साथ लगभग पूरा होने वाला व्यापार समझौता' शामिल है। रुबियो ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में प्रतिबंधों में छूट देनी पड़ी। उन्होंने कहा, 'हमने वैश्विक आपूर्ति, वैश्विक कीमतों और दूसरे देशों पर इसके प्रभाव को देखते हुए प्रतिबंधों में छूट दी है। अमेरिका में डीजल की कीमतें ऊंची हैं, लेकिन दुनिया के कई देशों में ये और भी ज्यादा ऊंची हैं। हमें इन सब बातों का प्रबंधन करना पड़ता है।'
रुबियो ने आगे कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते को अभी अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है और यह लगभग पूरा होने वाला है। इसलिए इस समझौते को भी ध्यान में रखा गया। यह बयान अब अहम इसलिए भी है क्योंकि रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई आने वाले हैं। वहां वे भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे।
'ऊर्जा सुरक्षा ज़रूरी'
रुबियो ने रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिकी विदेश नीति में इस युद्ध को जरूर ध्यान में रखा जाता है, लेकिन सिर्फ यही एक मुद्दा नहीं है। उन्होंने बताया कि दूसरे देशों के साथ द्विपक्षीय रिश्ते और उनकी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की क्षमता भी देखी जाती है। उन्होंने कहा, 'आप किसी एक मुद्दे के कारण दूसरे देशों की अर्थव्यवस्था को बर्बाद नहीं कर सकते। इसलिए इन सब बातों को संतुलित करना पड़ता है।' मार्को रुबियो ने कहा कि कुछ देशों के लिए ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोत जुटाना बहुत मुश्किल होता है। उन्होंने कहा कि यह बहाना नहीं है, लेकिन विदेश नीति बनाते समय इन बातों का संतुलन ज़रूरी है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की स्थिति
अमेरिका ने हाल ही में रूस से डीजल खरीदने का समझौता किया था और रूस तथा ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले लिंडसे ओ. ग्राहम एक्ट को भी रोक दिया था। इन घटनाओं के बाद रुबियो का यह बयान आया है। भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता अब क़रीब पहुँच गया है। 100 प्रतिशत टैरिफ़ की आशंका भी कम हो गई है। दोनों देश दूसरे टैरिफ़ मुद्दों पर लगभग सहमत हो गए हैं। मुख्य मतभेद भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर टैरिफ़ लगाने को लेकर था।
भारत के विदेश मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया था कि देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। यह विविध स्रोतों से तेल खरीदकर और बाजार की स्थिति के अनुसार किया जाएगा। मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिनिधियों से बातचीत में इस प्रस्तावित कानून के भारत-अमेरिका रिश्तों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर का भी जिक्र किया था।
तेल की क़ीमतों का असर
अमेरिका में 12 अक्टूबर तक डीजल की औसत कीमत करीब 6.18 डॉलर प्रति गैलन पहुंच गई थी, जो साल की शुरुआत में 3.48 डॉलर थी। महंगे ईंधन की वजह से उपभोक्ताओं पर बोझ बढ़ा है। सितंबर में महंगाई 0.6 प्रतिशत बढ़ी और सालाना महंगाई दर 3.7 प्रतिशत हो गई।भारत में भी सितंबर में खुदरा महंगाई 5.54 प्रतिशत पहुंच गई, जो अगस्त में 4.83 प्रतिशत थी। खाने-पीने की चीजों की महंगाई 7.74 प्रतिशत हो गई। प्याज, अदरक, लहसुन और नींबू जैसी चीजें महंगी हुईं।
मार्को रुबियो के दौरे पर विवाद क्या?
मार्को रुबियो के मुंबई और जामनगर दौरे को लेकर विवाद है और विपक्षी दलों से इसे मुद्दा बनाया हुआ है। रुबियो 19-22 अक्टूबर तक भारत में होंगे, लेकिन वह नई दिल्ली नहीं जा रहे हैं। इसके बजाय वह मुंबई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। वह गुजरात के जामनगर में रिलायंस इंडस्ट्रीज की दुनिया की सबसे बड़ी सिंगल-साइट रिफाइनरी का दौरा करेंगे और मुकेश अंबानी के साथ बैठक करेंगे। सामान्य तौर पर अमेरिकी विदेश मंत्री जैसे उच्च स्तरीय मेहमान की आधिकारिक बातचीत राजधानी नई दिल्ली में होती है। मुंबई और जामनगर चुनने को कई लोग व्यावसायिक फोकस के रूप में देखते हैं, लेकिन विपक्ष इसे असामान्य मानता है। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सार्वजनिक रूप से कहा कि वे जयशंकर और अन्य अधिकारियों से मुंबई में मिलने की 'उम्मीद' करते हैं। विपक्ष ने इसे 'भारत के विदेश मंत्री को भारतीय धरती पर बुलावा' बताकर हमला बोला। राहुल गांधी ने लिखा, 'रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है।' दौरे और मुलाकात की जानकारी पहले अमेरिकी पक्ष से ज्यादा आई, जबकि भारतीय विदेश मंत्रालय ने बाद में पुष्टि की। विपक्ष ने इसे भी निशाने पर लिया।