अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर वित्तीय और राजनीतिक विवादों के केंद्र में हैं। ब्लूमबर्ग की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप या उनके निवेश सलाहकारों ने वर्ष 2026 की पहली तिमाही (जनवरी–मार्च) के दौरान 3,700 से अधिक स्टॉक ट्रेड्स किए। इसका मतलब है कि औसतन हर कारोबारी दिन 40 से ज्यादा सौदे हुए। इस असाधारण ट्रेडिंग गतिविधि ने वॉल स्ट्रीट, वॉशिंगटन और ट्रेड विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, इन ट्रेड्स का कुल मूल्य करोड़ों डॉलर में है और इनमें टेक्नोलॉजी, फाइनेंस, एयरोस्पेस, मीडिया और एआई सेक्टर की कई दिग्गज कंपनियों के शेयर शामिल थे। ट्रेडिंग में Nvidia, Microsoft, Amazon, Boeing, Meta, Oracle, Costco, Uber और eBay जैसी कंपनियां प्रमुख रूप से शामिल रहीं।

किन शेयरों में सबसे ज्यादा गतिविधि?

फाइलिंग्स के अनुसार, ट्रंप से जुड़े निवेश खातों में कई बड़े सौदे दर्ज किए गए।
  • Nvidia, Oracle, Microsoft, Boeing और Costco में कम से कम 10-10 लाख डॉलर के शेयर खरीदे गए।
  • 10 फरवरी को Microsoft, Meta और Amazon में 50 लाख डॉलर से लेकर 2.5 करोड़ डॉलर तक की हिस्सेदारी बेची गई।
  • इसके अलावा Netflix, Warner Bros. Discovery और Paramount Global जैसी मीडिया एवं मनोरंजन कंपनियों में भी निवेश सामने आया।
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  • फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार ईरान पर हमले (28 फरवरी 2026) से ठीक पहले, अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मॉर्गन स्टेनली में अपने ब्रोकर के जरिए रक्षा शेयरों में "कई मिलियन डॉलर का निवेश" करने का प्रयास किया। 
  • दुनिया के सबसे बड़े एसेट मैनेजमेंट देखने वाली कंपनियों में से एक, ब्लैक रॉक ने कथित तौर पर आंतरिक रूप से इस मामले की जानकारी दी, जबकि कई अज्ञात सूत्रों ने फाइनेंशियल टाइम्स को सूचना प्रदान की। इसलिए, ब्रोकर कोई निवेश नहीं कर पाया, क्योंकि वह फंड मॉर्गन स्टेनली के पास उपलब्ध नहीं था। पेंटागन ने इसका खंडन किया लेकिन सत्य अब सामने आ रहा है।

युद्ध के बाद मार्च का पहला हफ्ता

ईरान युद्ध पर शुरुआती दांव: ईरान पर अमेरिकी हमले की भविष्यवाणी करने वाले पॉली मार्केट कॉन्ट्रैक्ट्स पर व्यापारियों ने हमला होने से कुछ घंटे पहले ही भारी मुनाफा कमाया। गुमनाम खातों से 12 लाख डॉलर तक की रकम निकाली गई, जिससे अंदरूनी जानकारी होने का संदेह पैदा हुआ।

22-23 मार्च को क्या खेल हुआ था

23 मार्च को अमेरिकी समय के मुताबिक सुबह लगभग 6:49-6:50 बजे, व्हाइट हाउस की घोषणा से पहले तेल वायदा बाजार के बड़े-बड़े सौदे किए गए। राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरान पर हमलों को स्थगित करने की घोषणा से ठीक पहले, ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई कच्चे तेल के वायदा सौदों में लगभग 500-830 मिलियन डॉलर का लेन-देन हुआ। घोषणा के बाद तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिसका मतलब है कि घोषणा से पहले किए गए ये सौदे बेहद लाभदायक साबित हुए। कुछ सांसदों ने इसे इतिहास में संभावित रूप से सबसे बड़े इनसाइडर ट्रेडिंग मामलों में से एक बताया।

मार्च के अंत में क्या हुआ था 

वैश्विक बाज़ार में हलचल और संशय मचा रहा। सौदे हो रहे थे। स्टॉक में तेजी आती थी, फिर एकदम से गिरावट आती थी। इसका अंदाजा सिर्फ चंद लोगों को था। ये सभी ट्रंप के खास लोग हैं। पॉलीमार्केट जैसे पूर्वानुमान बाज़ारों में भी इसी तरह के रुझान देखे गए। कुछ नए बनाए गए एकाउंट्स ने युद्ध से जुड़ी घटनाओं पर समय रहते दांव लगाए। रिपोर्टों से पता चला कि जियो-पोलिटिकल और पॉलिसी आधारित दोनों तरह के व्यापारिक संकेतों से लाभ हुआ।

अप्रैल 2026 की शुरुआत में सीज़फायर की घोषणा से कमाई चरम पर

युद्धविराम को लेकर दांव लगने लगे। अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा से कुछ ही घंटे पहले, निवेशकों ने बाजार में हलचल की उम्मीद में तेल वायदा पर लगभग 950 मिलियन डॉलर का दांव लगाया। युद्धविराम की घोषणा के बाद तेल की कीमतों में 15 प्रतिशत की भारी गिरावट आई, जिससे शुरुआती दांव लगाने वालों को फिर से फायदा हुआ। कहा जा रहा है कि ये निवेशक ट्रंप के कारोबार से जुड़ी कंपनियां और उनके सलाहकारों की कंपनियां थीं।

मार्च में, व्हाइट हाउस ने सरकारी अधिकारियों द्वारा अंदरूनी जानकारी के इस्तेमाल के दावों को खारिज कर दिया था। लेकिन अप्रैल तक, कर्मचारियों को संवेदनशील नीतिगत जानकारी से जुड़े वायदा बाजार में कारोबार न करने की आंतरिक चेतावनी भेजी गई। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि चुने हुए दांव लगाने ने संदेह पैदा किया।

  • अमेरिकी शेयर मार्केट की भविष्यवाणी करने वाले पॉलीमार्केट प्लेटफॉर्म पर, अमेरिकी पहले हमले से ठीक एक दिन पहले 150 से अधिक गुमनाम खाते बनाए गए थे। इन सभी खातों ने अगले दिन ईरान पर अमेरिकी हमले की संभावना पर दांव लगाया था। 
  • 7 अप्रैल, 2026 को ट्रंप द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम की घोषणा करने से कुछ घंटे और मिनट पहले, कई नए खाते बनाए गए और युद्धविराम की संभावना पर बड़ी रकम के दांव लगाए गए। विशेष रूप से, एक खाते से 200 हजार अमेरिकी डॉलर निकाले गए।

पॉलीमार्केट के निवेशकों में डोनाल्ड ट्रम्प जूनियर के स्वामित्व वाली एक वेंचर कैपिटल फर्म भी इस गोरखधंधे में शामिल है। जो इस प्लेटफॉर्म के सलाहकार के रूप में काम करती है। राष्ट्रपति ट्रम्प की पारिवारिक कंपनी, ट्रम्प ऑर्गनाइजेशन, कथित तौर पर अपना खुद का भविष्यवाणी बाजार- ट्रुथ प्रेडिक्ट - शुरू करने जा रही है।

इतिहास में दर्ज हो गई हैं ये दो तारीखें और ट्रंप का झूठ

  • 24 फरवरी, 2026 को व्हाइट हाउस की ब्रीफिंग में, जो मीडिया में प्रकाशित है, ट्रंप प्रशासन ने तर्क दिया कि ट्रंप ने युद्धों को समाप्त किया है और तमाम देशों में गठबंधनों को मजबूत किया है, साथ ही गैस की कीमतों में सुधार करके उन्हें कई वर्षों के निचले स्तर पर पहुँचाया है। 
  • 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर अपना पहला हमला किया। चार दिनों में ही ट्रंप प्रशासन ने खुद अपनी ही प्रेस ब्रीफिंग का खंडन कर दिया।

नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन, जिन्होंने बाजार में होने वाले लेन-देन के बारे में चिंता जताई थी, ने यह असहज सवाल उठाया, "क्या युद्ध और शांति के बारे में निर्णय राष्ट्रीय हित के बजाय बाजार में हेरफेर के उद्देश्य की पूर्ति कर रहे हैं?"

  • सबसे बड़ा सवाल यह है कि पिछले क्वार्टर (अक्टूबर–दिसंबर 2025) में जहां केवल 380 ट्रेड्स हुए थे, वहीं इस बार यह संख्या अचानक 3,700 के पार पहुंच गई। यानी सिर्फ तीन महीनों में लगभग दस गुना उछाल।

हितों का टकराव और इनसाइडर ट्रेडिंग के आरोपों में कितना दम

आलोचकों का कहना है कि जिन कंपनियों में ट्रेडिंग हुई, वे सीधे अमेरिकी सरकारी नीतियों और रेगुलेटरी फैसलों से प्रभावित होती हैं।
  • Nvidia को चीन को एडवांस्ड एआई चिप्स निर्यात करने के लिए अमेरिकी मंजूरी की आवश्यकता होती है। ट्रंप ने इसके शेयर खरीदे-बेचे।
  • Boeing का बड़ा कारोबार रक्षा और सरकारी अनुबंधों पर निर्भर है। ट्रंप और उनके सलाहकारों ने शेयर खरीदे-बेचे।
  • Microsoft, Amazon और Meta जैसी कंपनियां एंटीट्रस्ट जांच, एआई रेगुलेशन और फेडरल नीतियों के दायरे में रहती हैं। इनके भी शेयर ट्रंप और उनके सलाहकारों ने खरीदे-बेचे।
विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही सीधे तौर पर कोई कानून न टूटा हो, लेकिन राष्ट्रपति पद पर रहते हुए इतनी आक्रामक ट्रेडिंग नैतिक सवाल जरूर खड़े करती है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन पर Conflict of Interest के आरोप तेज हो गए हैं। ट्रंप ने अपने कारोबारी हितों को पूरी तरह “ब्लाइंड ट्रस्ट” में नहीं डाला है। हालांकि The Trump Organization का संचालन उनके बेटे संभाल रहे हैं, लेकिन आलोचकों का तर्क है कि राजनीतिक फैसलों और निवेश गतिविधियों के बीच स्पष्ट दूरी दिखाई नहीं देती।
ट्रंप के दामाद और मध्य-पूर्व मामलों से जुड़े पूर्व सलाहकार जेरेड कुशनर भी चर्चा में हैं। उनकी निवेश फर्म Affinity Partners गल्फ देशों के सॉवरेन वेल्थ फंड्स से अरबों डॉलर का निवेश मैनेज करती है। इस वजह से उनके विदेशी कारोबारी संबंध भी जांच और आलोचना के दायरे में आ गए हैं। कुशनर को ही पाकिस्तान उस दल में भेजा गया था, जिसने ईरान से बातचीत की थी।
बहरहाल, व्हाइट हाउस ने सभी आरोपों को खारिज किया है। प्रशासन की ओर से कहा गया कि राष्ट्रपति ट्रंप “सिर्फ अमेरिकी जनता के हित में काम कर रहे हैं” और किसी तरह का हितों का टकराव नहीं है। वहीं The Trump Organization का कहना है कि निवेश गतिविधियां स्वतंत्र वित्तीय संस्थानों द्वारा संचालित की जाती हैं और ट्रंप परिवार सीधे ट्रेडिंग फैसले नहीं लेता। हालांकि कुछ वित्तीय फाइलिंग्स तय समयसीमा के भीतर जमा नहीं की गईं, जिसके चलते मामूली आर्थिक दंड भी लगाया गया।
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वॉल स्ट्रीट बहुत हैरान है

अमेरिकी वित्तीय जगत के कई दिग्गज विशेषज्ञों ने इस ट्रेडिंग पैटर्न को “बेहद असामान्य” बताया है।
Matthew Tuttle ने कहा, “यह संख्या सामान्य निवेश गतिविधि से कहीं आगे है। ऐसा लगता है जैसे कोई विशाल हेज फंड एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग कर रहा हो।” Eric Diton ने कहा, “मैं 40 वर्षों से वॉल स्ट्रीट में हूं, लेकिन किसी सिटिंग राष्ट्रपति से जुड़ी इतनी बड़ी ट्रेडिंग गतिविधि पहले कभी नहीं देखी।” वहीं Adam Sarhan ने सवाल उठाया कि इतनी तेज खरीद-बिक्री के बावजूद क्या पोर्टफोलियो वास्तव में लाभ में भी रहा या नहीं।

पुराने राष्ट्रपतियों से तुलना

विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्ल्यू बुश और बिल क्लिंटन ने अपने कार्यकाल के दौरान ब्लाइंड ट्रस्ट का इस्तेमाल किया था, ताकि सरकारी फैसलों और निजी निवेशों के बीच किसी प्रकार का टकराव न दिखे। अब वॉशिंगटन में यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या किसी मौजूदा राष्ट्रपति को उन कंपनियों में सक्रिय ट्रेडिंग करनी चाहिए, जिन पर उनकी सरकार की नीतियों का सीधा असर पड़ता हो। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका में 2026 के राजनीतिक और आर्थिक माहौल को लेकर पहले से ही तीखी बहस जारी है।