टैरिफ़ मामले में फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट पर विदेशी हितों से प्रभावित होने का आरोप लगाया और जजों पर तीखी टिप्पणी की। जानिए उन्होंने क्या क्या कहा।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के टैरिफ़ को अवैध घोषित किए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने नए 10% ग्लोबल टैरिफ की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि ये नये नियम के तहत शुल्क लगाए जाएँगे। इसके साथ ही ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट पर जोरदार हमला बोला है। ट्रंप ने कोर्ट के इस फैसले को बेहद निराशाजनक बताया और कुछ जजों पर विदेशी हितों से प्रभावित होने का आरोप लगाया। कोर्ट के फ़ैसले के बाद ह्वाइट हाउस में प्रेस क्रॉन्फ्रेंस में उन्होंने जजों को 'मूर्ख और लैपडॉग्स' यानी कठपुतली तक कह दिया। उन्होंने आरोप लगा दिया कि वे सिर्फ़ नाम के रिपब्लिकन हैं और रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट्स के लिए काम कर रहे हैं।
ट्रंप ने व्हाइट हाउस में गवर्नर्स के साथ बैठक के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह फैसला हमारे देश के लिए बहुत निराशाजनक है। मैं कोर्ट के कुछ सदस्यों पर शर्मिंदा हूं क्योंकि उनके पास देश के लिए सही काम करने की हिम्मत नहीं है।' उन्होंने कहा कि कोर्ट विदेशी हितों से प्रभावित हो गया है। उन्होंने कहा, 'वे मूर्ख और लैपडॉग्स हैं, RINOs यानी रिब्लिकन इन नेम ओनली और रेडिकल लेफ्ट डेमोक्रेट्स के लिए हैं। वे बहुत अनपैट्रियॉटिक हैं और हमारे संविधान के प्रति वफादार नहीं हैं।'
तीन जजों की तारीफ़
ट्रंप ने उन तीन जजों की तारीफ की जो सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फ़ैसले से असहमति में थे। क्लेरेंस थॉमस, सैमुअल अलिटो और ब्रेट कवनॉ ने सुप्रीम कोर्ट के बहुमत के फ़ैसले से असहमति जताई। ट्रंप ने कहा, 'उनकी ताकत और बुद्धिमत्ता के लिए धन्यवाद।' उन्होंने खासकर कवनॉ को जीनियस बताया। बता दें कि ट्रंप के पहले कार्यकाल में नियुक्त दो जज नीले गोरसच और एमी कोनी बैरेट ने भी बहुमत में ट्रंप के टैरिफ़ के खिलाफ वोट दिया था।
और सख़्त रुख अपनाएँगे: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का यह फ़ैसला अमेरिका के ट्रेडिंग पार्टनर्स को खुश कर देगा। उन्होंने कहा, 'फॉरेन कंट्री बेहद खुश हैं। लेकिन वे ज्यादा देर नाच नहीं पाएंगे।' उन्होंने चेतावनी दी कि अब और मजबूत रास्ते अपनाए जाएंगे। 'मेरे पास और मजबूत तरीके उपलब्ध हैं। हम टैरिफ पर अन्य विकल्प इस्तेमाल करेंगे। शायद इससे और ज्यादा पैसा आए।'
ट्रंप ने दावा किया कि वे किसी देश से पूरा व्यापार बंद कर सकते हैं या एम्बार्गो लगा सकते हैं। उन्होंने कहा,
मैं किसी देश से सभी व्यापार ख़त्म कर सकता हूं, एम्बार्गो लगा सकता हूं। मैं कुछ भी कर सकता हूं। अब हम और मजबूत दिशा में जाएंगे। डोनाल्ड ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति
ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 लगाएँगे राष्ट्रपति
ट्रंप ने घोषणा की कि वे ट्रेड एक्ट ऑफ 1974 के तहत 10% ग्लोबल टैरिफ लगाएंगे, जो पहले से मौजूद टैरिफ के ऊपर होगा। उनका कहना है कि यह कोर्ट के फैसले से अलग कानून के तहत वैध होगा।
ट्रंप का यह हमला उनके दूसरे कार्यकाल की सबसे बड़ी कानूनी हार के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से फैसला दिया है कि 1977 के आईईईपीए कानून के तहत ट्रंप बड़े पैमाने पर जवाबी टैरिफ नहीं लगा सकते, क्योंकि टैरिफ लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है। ट्रंप ने इसे राष्ट्रीय आपातकाल बताकर लगाया था।
ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल में 'रिसिप्रोकल' टैरिफ लगाए। यानी लगभग हर देश से आने वाले सामान पर शुल्क। इसमें ज्यादातर देशों पर 10% बेसलाइन टैरिफ और चीन, कनाडा, मैक्सिको जैसे कुछ देशों पर ज्यादा टैरिफ शामिल थे। ट्रंप ने 2 अप्रैल 2025 को इसे 'लिबरेशन डे' पर घोषित किया था। उन्होंने दावा किया था कि व्यापार घाटा, फेंटेनिल ड्रग्स की तस्करी और अन्य समस्याएं राष्ट्रीय आपातकाल हैं, इसलिए IEEPA के तहत टैरिफ लगाना वैध है।
'टैक्स लगाने का अधिकार राष्ट्रपति नहीं, संसद के पास'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार टैरिफ और टैक्स लगाने का अधिकार कांग्रेस के पास है, राष्ट्रपति के पास नहीं। आईईईपीए क़ानून आपातकाल में इकोनॉमिक पावर देने के लिए है, लेकिन टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता। कोर्ट ने 'मेजर क्वेश्चंस डॉक्ट्रिन' का हवाला दिया, जिसमें कहा गया कि बहुत बड़े आर्थिक असर वाली नीतियाँ कांग्रेस की साफ़ मंजूरी से ही हो सकती हैं। चीफ़ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा, 'राष्ट्रपति को टैरिफ़ लगाने की असाधारण शक्ति के लिए कांग्रेस की स्पष्ट मंजूरी दिखानी होगी, जो यहां नहीं है।'
ट्रंप की इस तीखी प्रतिक्रिया से राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। डेमोक्रेट्स इसे ट्रंप की हार मान रहे हैं, जबकि उनके समर्थक कोर्ट पर सवाल उठा रहे हैं। बाजारों में उतार-चढ़ाव जारी है, क्योंकि अब ट्रंप के नए कदमों पर सबकी नजर है। क्या अब ट्रेड वॉर जारी ही रहेगा या ख़त्म होगा, यह देखना बाकी है।