अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद सख्त चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा है कि “घड़ी की सुइयां तेजी से भाग रही है” और अगर तेहरान ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो “उसके पास खोने के लिए कुछ भी नहीं बचेगा।” यह बयान ऐसे वक्त आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म कराने की कोशिशें ठप पड़ती दिखाई दे रही हैं और क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ईरान के लिए समय तेजी से निकल रहा है। उन्हें तुरंत आगे बढ़ना होगा, वरना उनके पास कुछ भी नहीं बचेगा। समय सबसे अहम है।”

अमेरिका की पांच शर्तें

फ़ार्स समाचार एजेंसी और अन्य ईरानी मीडिया के अनुसार, वाशिंगटन ने तेहरान के सामने पाँच शर्तें रखी हैं, जिन्हें अमेरिकी प्रशासन दोनों देशों के बीच शांति प्रक्रिया जारी रखने के लिए आवश्यक मानता है। एजेंसी के मुताबिक, अमेरिका ईरानी क्षेत्र पर बमबारी से हुए नुकसान के लिए कोई मुआवज़ा नहीं देगा। ईरान से 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका लाया जाये। ईरान में सिर्फ एक ही परमाणु संयंत्र चालू रहेगा। अमेरिका ईरान की ज़ब्त की गई संपत्तियों के 25% से अधिक को जारी नहीं करेगा। लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने का मुद्दा बातचीत के जरिए हल किया जाना चाहिए।
फरवरी 2026 में शुरू हुए अमेरिका-ईरान संघर्ष को खत्म करने के लिए ट्रंप प्रशासन पिछले कई हफ्तों से समझौते की आड़ में दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ईरान लगातार अमेरिका की उन मांगों को खारिज करता रहा है, जिनका संबंध उसके परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों से है।
तेहरान के सख्त रुख के बाद वॉशिंगटन ने एक बार फिर सैन्य विकल्पों पर विचार तेज कर दिया है। दोनों देशों के बीच 8 अप्रैल को अस्थायी युद्धविराम (ट्रूस) लागू हुआ था, लेकिन उसके बाद भी शांति वार्ताएं कई बार रुक चुकी हैं।
इस संघर्ष का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई दे रहा है। खासतौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के सबसे अहम चोकपॉइंट्स में गिना जाता है।

ट्रंप की हाई-लेवल सुरक्षा बैठकें

ट्रंप ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ शनिवार को ईरान की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की थी। वहीं मंगलवार को व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में शीर्ष सुरक्षा और रक्षा अधिकारियों के साथ एक और अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें संभावित सैन्य विकल्पों और रणनीतिक कदमों पर चर्चा की जाएगी।

पाकिस्तान-ईरान के बीच अहम बातचीत

इसी बीच पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नक़वी ने रविवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से उच्चस्तरीय वार्ता की। करीब 90 मिनट चली इस बैठक में क्षेत्रीय सुरक्षा, सीमा स्थिरता और अमेरिका के साथ ईरान के नाजुक युद्धविराम को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहा।
ईरानी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान, अफगानिस्तान और इराक की सराहना करते हुए कहा कि इन देशों ने अपने क्षेत्रों का इस्तेमाल ईरान विरोधी सशस्त्र गतिविधियों के लिए नहीं होने दिया। उन्होंने युद्धविराम प्रयासों में पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया।
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पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इसराइल का मकसद ईरान के भीतर अस्थिरता पैदा करना और इस्लामिक रिपब्लिक को कमजोर करना था। उन्होंने दावा किया कि ईरान की उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पूर्वी सीमाओं के जरिए आतंकवादी तत्वों की घुसपैठ कराने की कोशिशें की गईं।
ईरानी राष्ट्रपति ने कहा, “दुश्मन ताकतों ने आतंकवादी संगठनों को वित्तीय, खुफिया और सैन्य मदद देकर ईरान में असुरक्षा फैलाने की कोशिश की, लेकिन पड़ोसी देशों ने अपने क्षेत्रों के दुरुपयोग को रोककर अहम सहयोग दिया।”