ईरान के साथ शांति वार्ता के प्रयासों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक पोस्ट कर चौंकाने वाली शर्त रख दी है। वह सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन को 'अब्राहम एकोर्ड' पर हस्ताक्षर करते देखना चाहते हैं जो मध्य पूर्व में शांति और सामान्यीकरण के लिए है।
ईरान के साथ शांति वार्ता के प्रयासों के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को फिर से चौंकाने वाली शर्त रख दी है। ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ कोई भी समझौता होने से पहले छह मुस्लिम बहुल देशों को इसराइल के साथ अब्राहम समझौते में शामिल होना जरूरी है। ट्रंप ने इसे अनिवार्य बताया है। 'अब्राहम एकोर्ड' को पाकिस्तान सहित कई अरब देश स्वीकार करने को तैयार नहीं रहे हैं। ये एकोर्ड्स फिलीस्तीन मुद्दे के स्थायी समाधान के बिना ही इसराइल को मान्यता देने और मध्य पूर्व में शांति व सामान्यीकरण की पहल हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'ईरान के साथ बातचीत अच्छी चल रही है। यह या तो सबके लिए बहुत अच्छा समझौता होगा, वरना कोई समझौता नहीं होगा।' उन्होंने चेतावनी भी दी कि यदि समझौता नहीं हुआ तो फिर 'बड़ी और मजबूत लड़ाई' हो सकती है। ट्रंप ने सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र और जॉर्डन का नाम लेकर कहा कि ये देश अब्राहम समझौते पर हस्ताक्षर करें। उन्होंने यूएई और बहरीन से भी इस बारे में बात की है। ट्रंप का कहना है कि सऊदी अरब और कतर से इस प्रक्रिया की शुरुआत होनी चाहिए, बाकी देश बाद में शामिल हों।
अब्राहम समझौते में शामिल होना अनिवार्य: ट्रंप
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने इस जटिल मुद्दे को सुलझाने के लिए बहुत मेहनत की है, इसलिए इन देशों का अब्राहम समझौते में शामिल होना अनिवार्य है। अगर कोई देश शामिल नहीं होता है तो उसे ईरान वाले समझौते में भी नहीं रखा जाना चाहिए, क्योंकि यह 'बुरे इरादे' को दिखाता है। हालाँकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर एक-दो देशों के पास कोई खास वजह है तो उसे माना जा सकता है, लेकिन ज्यादातर देशों को तैयार रहना चाहिए। ट्रंप ने यहां तक कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ समझौता कर लेता है तो उसे भी अब्राहम समझौते में शामिल करना गौरव की बात होगी।
ट्रंप ने कहा कि उन्होंने शनिवार को कई अरब देशों और मुस्लिम देशों के नेताओं से बात की। इनमें शामिल थे- सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद, कतर के अमीर तमीम बिन हमाद, कतर के प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान, पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसीम मुनीर, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगान, मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय और बहरीन के किंग हमाद बिन ईसा अल खलीफा। अब्राहम अब्राहम एकोर्ड्स को लेकर ट्रंप की पोस्ट
ट्रंप ने इन सभी नेताओं से कहा कि अमेरिका ने ईरान के मामले में बहुत मेहनत की है। इसलिए अब सभी देश अब्राहम एकोर्ड्स में शामिल हों। ट्रंप ने दावा किया कि इसमें शामिल देशों- UAE, बहरीन, मोरक्को, सूडान आदि को बहुत बड़ा फायदा हुआ है। इन देशों की अर्थव्यवस्था, व्यापार और सामाजिक स्थिति मजबूत हुई है। कोई भी देश इस समझौते से बाहर निकलना नहीं चाहता। उन्होंने कहा, 'यह समझौता मध्य पूर्व में 5000 साल में पहली बार सच्ची शक्ति, मजबूती और शांति ला सकता है।'
ईरान और अब्राहम एकोर्ड्स पर ट्रंप क्या बोले?
ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान अमेरिका के साथ अच्छा समझौता करता है तो उसे भी अब्राहम एकोर्ड्स में शामिल करने का सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने कहा, 'यह इन देशों द्वारा अब तक साइन किया गया सबसे महत्वपूर्ण समझौता होगा।'अब्राहम एकोर्ड्स क्या हैं?
अब्राहम एकोर्ड्स 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में शुरू हुए थे। इनके तहत यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इसराइल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे। बाद में कजाकिस्तान भी शामिल हुआ। ट्रंप दावा करते हैं कि इन समझौतों से शामिल देशों को आर्थिक, व्यापारिक और सामाजिक रूप से फायदा हुआ है।
मिस्र के 1979 और जॉर्डन के 1994 से ही इसराइल के साथ संबंध हैं, लेकिन अब्राहम समझौते में शामिल नहीं हैं।
पाकिस्तान, सऊदी अरब के सामने दुविधा
- सऊदी अरब: सबसे संभावित देश माना जा रहा है, लेकिन सऊदी बार-बार कह चुका है कि फिलिस्तीनी राज्य बनाए बिना वह इसराइल को मान्यता नहीं देगा।
- पाकिस्तान: फिलिस्तीन मुद्दा यहां बहुत संवेदनशील है। पाकिस्तान दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है और इसराइल को मान्यता देने से घरेलू स्तर पर बड़े विरोध का खतरा है।
- कतर: अमेरिका का करीबी सहयोगी है, लेकिन इसराइल के साथ औपचारिक संबंध नहीं हैं।
- तुर्की: इसराइल के साथ संबंध पहले अच्छे थे, लेकिन पिछले 10 साल में काफी खराब हो गए हैं।
नेताओं की प्रतिक्रिया
Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप जब इन देशों के नेताओं से अब्राहम एकोर्ड्स पर बात कर रहे थे तो उन्होंने इस प्रस्ताव पर चुप्पी साध ली। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप ने मजाक में पूछा भी कि 'क्या आप लोग अभी भी लाइन पर हैं?' ट्रंप अब भी बहुत उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि अब्राहम समझौते का विस्तार इतना बड़ा होगा कि बीते हुए समय या भविष्य में कुछ भी इससे आगे नहीं होगा। इससे पूरा मध्य पूर्व 'एक, शक्तिशाली और आर्थिक रूप से बहुत मजबूत' बन जाएगा। ट्रंप ने अपने प्रतिनिधियों स्टिव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर को निर्देश दिया है कि वे इन देशों को अब्राहम समझौते में शामिल करने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करें और पूरा करें।
ईरान से समझौते पर इसराइल चिंतित
इसराइल में इस ईरान समझौते को लेकर चिंता है। इसराइली अधिकारी मान रहे हैं कि यह समझौता इसराइल के हित में नहीं है। वे डर रहे हैं कि ईरान को 60 दिन का समय मिलने से वह अपनी अर्थव्यवस्था और सैन्य ताक़त मजबूत कर लेगा। ईरान के परमाणु कार्यक्रम, मिसाइलों और क्षेत्रीय गुटों को समर्थन देने जैसे बड़े मुद्दों पर अभी कोई ठोस बात नहीं हुई है।
बहरहाल, ट्रंप का यह बयान मध्य पूर्व की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है। एक तरफ ईरान के साथ शांति समझौते की कोशिश है तो दूसरी तरफ़ इसराइल के साथ संबंध सामान्य करने का दबाव। अब सबकी नज़र इस पर है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और अन्य देश इस 'अनिवार्य' शर्त पर क्या रुख अपनाते हैं।