अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ग्रीनलैंड को लेकर सीधी धमकी दी है। उनका कहना है कि रूस और चीन का आर्कटिक क्षेत्र में खतरा बढ़ रहा है। उनसे मुकाबला करने के लिए ग्रीनलैंड को आसान या कड़े तरीके से यूएस को हासिल करना होगा।
अमेरिका के खिलाफ ग्रीनलैंड में प्रदर्शन
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर आर्कटिक क्षेत्र के विशाल द्वीप ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की अपनी इच्छा दोहराई है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड के साथ "कुछ करना होगा", चाहे वह आसान तरीके से हो या कठिन तरीके से। ट्रंप का कहना है कि अगर अमेरिका ने कार्रवाई नहीं की, तो रूस या चीन इस क्षेत्र पर कब्जा कर लेंगे, जिसे वे अमेरिका के लिए अस्वीकार्य मानते हैं। ट्रंप की धमकी के बाद ग्रीनलैंड के पांच राजनीतिक दलों ने संयुक्त बयान जारी करके कहा है कि उन्हें ग्रीनलैंड में अमेरिका नहीं चाहिए।
ट्रंप ने वाशिंगटन में तेल और गैस क्षेत्र के प्रमुख अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मीडिया से बातचीत में यह बयान दिया। उन्होंने कहा, "हम ग्रीनलैंड पर कुछ करने जा रहे हैं, चाहे उन्हें पसंद हो या नहीं, क्योंकि अगर हम नहीं करेंगे, तो रूस या चीन ग्रीनलैंड पर कब्जा कर लेंगे। हम रूस या चीन को अपना पड़ोसी नहीं होने देंगे। मैं आसान तरीके से डील करना चाहूंगा, लेकिन अगर आसान तरीके से नहीं हुआ, तो हम कठिन तरीके से करेंगे।"
ट्रंप ने डेनमार्क के ऐतिहासिक दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि 500 साल पहले एक नाव के जरिए वहां पहुंचने से मालिकाना हक नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा, "डेनमार्क को वहां अच्छा लगता है, लेकिन नाव से पहुंचना मालिकाना हक नहीं बनाता। हमने भी वहां कई नावें भेजी थीं।" ट्रंप ने ग्रीनलैंड के आसपास रूसी और चीनी विध्वंसक जहाजों तथा पनडुब्बियों की मौजूदगी का हवाला देते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठाया।
यह बयान ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई कर राष्ट्रपति निकोलस मैडुरो को हिरासत में लिया था। ट्रंप ने जोर दिया कि स्वामित्व (ownership) की रक्षा की जाती है, जबकि पट्टे (leases) की नहीं। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड का मालिक बन जाता है, तो उसकी बेहतर रक्षा हो सकेगी। ट्रंप ने नाटो का भी जिक्र किया और दावा किया कि उन्होंने ही नाटो को बचाया है।
ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का सेमी-ऑटोनॉमस क्षेत्र है, दुर्लभ पृथ्वी खनिजों, यूरेनियम और लोहे जैसे प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यह आर्कटिक क्षेत्र में सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रंप ने 2019 में भी ग्रीनलैंड खरीदने का प्रस्ताव रखा था, लेकिन इसे ठुकरा दिया गया था। अब 2026 में यह मुद्दा फिर गरमा गया है।
इस बीच, डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों ने ट्रंप के बयानों का कड़ा विरोध किया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेट्टे फ्रेडरिक्सन सहित कई यूरोपीय नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा है कि ग्रीनलैंड का फैसला केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कोई जबरदस्ती कार्रवाई नाटो के अंत का कारण बन सकती है।
ग्रीनलैंड के निवासी भी अमेरिका में शामिल होने के खिलाफ हैं- एक सर्वेक्षण के अनुसार 85% लोग इसका विरोध करते हैं। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं, लेकिन कूटनीति पहली प्राथमिकता है।
ग्रीनलैंड के 5 राजनीतिक दलों का बयान
ग्रीनलैंड की संसद के सभी राजनीतिक नेताओं ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा धमकी देने पर एक संयुक्त प्रतिक्रिया जारी की। जिसमें उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड का भविष्य केवल वहां की जनता द्वारा ही तय किया जा सकता है। ग्रीनलैंड की संसद, इनात्सिसार्टुत में प्रतिनिधित्व करने वाली सभी पांच पार्टियों के नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित बयान में कहा गया कि ग्रीनलैंड के लोग राजनीतिक दल अमेरिका या डेनमार्क का नियंत्रण नहीं चाहते। बयान में कहा गया, "हम अमेरिकी नहीं बनना चाहते, हम डेनिश नहीं बनना चाहते, हम ग्रीनलैंडवासी बनना चाहते हैं।"
यूरोप की चिंता बढ़ी
ट्रंप के बयानों ने यूरोप में चिंता बढ़ा दी है, खासकर इसलिए क्योंकि उन्होंने आर्थिक या सैन्य दबाव के इस्तेमाल से इनकार नहीं किया है। ग्रीनलैंड, जो काफी हद तक बर्फ से ढका हुआ है, की आबादी लगभग 57,000 है। डेनमार्क ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कोई भी हमला नाटो को कमजोर करेगा और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सुरक्षा व्यवस्था को खतरे में डाल देगा।
यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय संबंधों में तनाव बढ़ा रहा है, खासकर नाटो सहयोगियों के बीच। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह रुख आर्कटिक क्षेत्र में रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने की रणनीति का हिस्सा है। आगे की स्थिति पर सभी की नजर टिकी हुई है।