डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर धमकी दी कि EU ट्रेड डील पर उनकी बात नहीं मान रहा है। इसलिए वह यूरोप से आयातित कार और ट्रकों पर टैरिफ़ 15% से बढ़ा कर 25% कर देंगे।
डोनाल्ड ट्रंप ने फिर से टैरिफ़ का राग छेड़ दिया है। उन्होंने यूरोपीय संघ यानी ईयू से आने वाली कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का बड़ा ऐलान किया है। यह नया टैरिफ अगले हफ्ते से लागू हो जाएगा। पहले यूरोप से आने वाली कारों पर 15% टैरिफ लग रहा था। ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि अगले हफ्ते से यूरोपीय संघ की कारों और ट्रकों पर टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।'
ट्रंप का आरोप है कि यूरोपीय संघ अमेरिका के साथ हुए पूरे समझौते का पालन नहीं कर रहा है। हालाँकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यूरोप ने समझौते का कौन सा हिस्सा तोड़ा है।
ट्रंप की यूरोपीय कंपनियों को सलाह
ट्रंप ने साफ़ कहा कि अगर यूरोपीय कार कंपनियां अमेरिका में अपना कारखाना लगाएंगी और कारें बनाएंगी, तो उन पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका में अभी बहुत सारे नए कार और ट्रक प्लांट बन रहे हैं। इनमें 100 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश हो रहा है, जो कार और ट्रक बनाने के इतिहास में रिकॉर्ड है। ये प्लांट जल्दी खुलेंगे और अमेरिकी मजदूरों को नौकरियां मिलेंगी।'
क्यों बढ़ा तनाव?
पिछले साल जुलाई में ट्रंप और यूरोपीय संघ के बीच स्कॉटलैंड के टर्नबेरी गोल्फ कोर्स पर एक व्यापार समझौता हुआ था। उसमें तय हुआ था कि यूरोप के ज्यादातर सामान पर अमेरिका में 15% टैरिफ लगेगा। हालाँकि, इस साल यूनाइटेड स्टेट्स के सुप्रीम कोर्ट के एक फ़ैसले के बाद इस समझौते की स्थिति पर सवाल उठने लगे। कोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा कि राष्ट्रपति के पास ईयू से होने वाले आयात पर टैरिफ़ लगाने के लिए आर्थिक आपातकाल लागू करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
इसका नतीजा यह हुआ कि शुरू में तय की गई 15 प्रतिशत की टैरिफ़ सीमा को घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया, जबकि प्रशासन ने अलग-अलग कानूनी प्रावधानों के तहत आयात पर वैकल्पिक शुल्क लागू कर दिए।
इसी बीच, ट्रंप प्रशासन एक संशोधित टैरिफ़ व्यवस्था लागू करने की कोशिश में है। और अब ट्रंप कह रहे हैं कि यूरोप इस समझौते का पालन नहीं कर रहा है। दोनों तरफ़ से बातचीत अटक गई है, खासकर स्टील और एल्युमिनियम पर विवाद की वजह से।
कार उद्योग यूरोप की बेहद अहम इंडस्ट्री है। जर्मनी और फ्रांस जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए कारों का निर्यात बेहद ज़रूरी है। इसलिए ट्रंप का यह फ़ैसला यूरोप के लिए काफी संवेदनशील है।
यूरोप का रुख
यूरोपीय संघ चाहता है कि अमेरिका पहले वाले समझौते का सम्मान करे। यूरोप का अनुमान है कि उस पहले वाली डील से उनकी कार कंपनियों को हर महीने 50-60 करोड़ यूरो की बचत हो रही थी। एपी की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका और यूरोप के बीच कुल व्यापार साल 2024 में 1.7 ट्रिलियन यूरो का था, यानी रोजाना औसतन 4.6 अरब यूरो का व्यापार होता है।यूएस-यूरोप में तनाव बढ़ेगा?
ट्रंप का यह ताज़ा क़दम अमेरिका और यूरोप के बीच व्यापार संबंधों में तनाव को और बढ़ा सकता है। अगर दोनों तरफ़ से एक-दूसरे पर ज़्यादा टैरिफ़ लगाए गए तो इससे दोनों की अर्थव्यवस्थाओं को नुक़सान पहुँच सकता है। ट्रंप ने साफ़ संकेत दिया है कि वे चाहते हैं कि यूरोपीय कंपनियां अमेरिका में फैक्ट्री लगाएं, ताकि अमेरिका में नौकरियां बढ़ें।
अभी यह साफ़ नहीं है कि यूरोपीय संघ इस नई धमकी पर क्या जवाब देता है। दोनों तरफ़ से बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन अगले हफ्ते से 25% टैरिफ लगने की तैयारी भी शुरू हो गई है।