अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ 45 दिनों के युद्धविराम समझौते के लिए अंतिम कोशिश कर रहे हैं, जिससे मौजूदा युद्ध का स्थायी अंत हो सकता है। हालांकि समझौते की संभावना कम है। ईरान ने होर्मुज पर झुकने से इंकार कर दिया है।
अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों का एक समूह संभावित 45 दिनों के सीजफायर की शर्तों पर बातचीत कर रहे हैं। इससे युद्ध के स्थायी समाप्ति का रास्ता खुल सकता है। यूएस मीडिया एक्सियोस (Axios) को चार अमेरिकी, इसराइली और क्षेत्रीय सूत्रों ने यह जानकारी दी, जो चर्चाओं से परिचित हैं।
ताज़ा अपडेट 12.34 PM: रॉयटर्स के मुताबिक ईरान और अमेरिका को एक योजना मिली है जो सोमवार से प्रभावी हो सकती है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोला जा सकता है। इन प्रस्तावों से परिचित सूत्र ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी। सूत्र ने आगे बताया कि पाकिस्तान ने शत्रुता समाप्त करने के लिए एक रूपरेखा तैयार की है और इसे रात को ईरान और अमेरिका के साथ साझा किया गया है। इसमें दो-स्तरीय नज़रिए का उल्लेख है, जिसमें तत्काल युद्धविराम और उसके बाद एक व्यापक समझौता शामिल है।
दूसरी तरफ सूत्रों ने यह भी कहा कि अगले 48 घंटों में आंशिक समझौते की संभावना बहुत कम है। हालांकि, यह अंतिम प्रयास संघर्ष में तेजी को रोकने का एकमात्र अवसर माना जा रहा है। ऐसी वृद्धि में ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हमले और खाड़ी देशों में ऊर्जा तथा जल सुविधाओं पर जवाबी हमले शामिल हो सकते हैं।
इससे पहले अमेरिका ने 15-पॉइंट सीजफायर प्लान प्रस्तुत किया था, जिसे ईरान ने "अनुचित" बताकर खारिज कर दिया था। ईरान ने अपना काउंटर-प्रपोजल दिया, जिसमें मुआवजा, हमलों में अपनी अधिकारियों की हत्या रोकना और संप्रभुता की गारंटी जैसी मांगें शामिल थीं। ईरान के इंकार के बाद ट्रंप ने कई बार धमकियां दीं। ट्रंप की मुख्य मांग होर्मुज स्ट्रेट खोलना है। उन्होंने कहा है कि अगर सौदा नहीं हुआ तो ईरान के बुनियादी ढांचे (पावर प्लांट, ब्रिज आदि) पर भारी हमले हो सकते हैं। ट्रंप ने बाद में यह भी कहा कि डील 7 अप्रैल तक संभव है।
ईरान का साफ इंकार
ईरान ने सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार किया है और कहा है कि वह अस्थायी सीजफायर नहीं चाहता, बल्कि स्थायी समाधान और सुरक्षा गारंटी चाहता है। ईरानी अधिकारी अमेरिका पर आरोप लगाते हैं कि सीजफायर की बात युद्ध जारी रखने का बहाना है।
ईरान ने कहा- होर्मुज की चाबी खो गई
डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को लेकर बार-बार दी जा रही धमकियों के बाद ईरान ने उन पर तंज़ करते हुए मज़ाक में कहा है कि उन्होंने इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्त की "चाबियाँ खो दी हैं"। ज़िम्बाब्वे स्थित ईरान के दूतावास ने कहा कि उन्होंने "चाबियाँ खो दी हैं", जबकि दक्षिण अफ्रीका स्थित दूतावास ने चुटकी लेते हुए कहा, "चुप रहो... चाबी गमले के नीचे है। बस दोस्तों के लिए खोल दो।" यह ट्रंप के उस अल्टीमेटम का मज़ाक उड़ाने जैसा था जिसमें उन्होंने तेहरान को जलडमरूमध्य को फिर से खोलने या गंभीर सैन्य कार्रवाई का सामना करने की चेतावनी दी थी। ईरान का यह कटाक्ष ट्रंप द्वारा जारी किए गए उस 'अल्टीमेटम' के बाद आया है जिसमें उन्होंने तेहरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने या बुनियादी ढांचे पर विनाशकारी हमलों का सामना करने की मांग की थी।
ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए जीवन रेखा माने जाने वाले इस जलडमरूमध्य को उनकी तय समय सीमा के भीतर नहीं खोला गया, तो ईरानी बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जा सकता है। ट्रंप ने अपने बयान में ईरान के लिए गाली गलौज की भाषा का इस्तेमाल किया।
तेहरान में अपार्टमेंट पर हमला, 13 लोग मारे गए, भयानक तबाही
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की राजधानी तेहरान के दक्षिण-पश्चिम में स्थित एक शहर में एक इमारत पर हुए हवाई हमले में कम से कम 13 लोग मारे गए। सोमवार तड़के ईरान की राजधानी में सिलसिलेवार हवाई हमलों में तेहरान यूनिवर्सिटी को निशाना बनाया गया। ईरानी मीडिया ने हमलों और वहां की इमारतों के साथ-साथ कैंपस के पास स्थित एक प्राकृतिक गैस वितरण केंद्र को हुए नुकसान की खबर दी। यह तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाया कि यूनिवर्सिटी परिसर में किन चीजों को निशाना बनाया गया था, क्योंकि युद्ध के कारण देश के सभी स्कूलों में ऑनलाइन कक्षाएं चल रही हैं और यूनिवर्सिटी में छात्र नहीं हैं। रात भर धमाकों की आवाज गूंजती रही। घंटों तक रुक-रुक कर कम ऊंचाई पर उड़ते लड़ाकू विमानों की आवाज सुनाई देती रही।
क़ुम में 5 लोग मारे गएः क़ुम के रिहायशी इलाके में हुए हवाई हमले में कम से कम पांच लोग मारे गए। क़ुम तेहरान के ठीक दक्षिण में स्थित एक पवित्र शिया मदरसा शहर है। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि हमले का निशाना क्या था।
इसराइल के हाइफा में शवों की खोज
सोमवार तड़के, ईरान से तीन मिसाइलों के हमले देखे गए और इसराइल के मध्य भागों में अलर्ट जारी किया गया। दावा है कि इनमें से अधिकांश को रोक दिया गया और कुछ खुले मैदान में गिरे। लेकिन खबर आ रही है कि सोमवार सुबह के हमले में ईरान ने हाइफा में काफी नुकसान पहुंचाया है। इस बीच खोज और बचाव दल रात भर और सोमवार तड़के तक हाइफा में एक अपार्टमेंट से लापता लोगों की तलाश में जुटे रहे, जिसे सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा है। बचाव दल ने अल जज़ीरा रिपोर्टर को बताया है कि उन्होंने दो शव बरामद कर लिए हैं, जबकि दो लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों का कहना है कि इस इमारत पर एक भारी मिसाइल से हमला किया गया था। इससे इमारत का आधा हिस्सा नष्ट हो गया और जो हिस्सा खड़ा रह गया वह बेहद अस्थिर था, जिससे गिरने का खतरा बढ़ गया और खोज का काम जटिल हो गया। हाइफा अक्सर रणनीतिक महत्व के कारण ईरानी मिसाइलों का निशाना बनता है और सीमा पार लेबनान से दागे जाने वाले हिजबुल्लाह रॉकेटों की मारक क्षमता में भी आता है।
ईरान की सबसे बड़ी पेट्रोकेमिकल फैक्ट्री पर हमला
इसराइल ने महशहद में ईरान के सबसे बड़े पेट्रोकेमिकल औद्योगिक परिसर पर हमला किया, जिससे परिसर में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में ईरान के तेल मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि यह हमला आईडीएफ ने किया। हवाई हमलों में दो बिजली संयंत्रों, फजर 1 और फजर 2 को निशाना बनाया गया, जो परिसर के अंदर चल रहे 50 से अधिक संयंत्रों को गैस, बिजली और औद्योगिक जल की आपूर्ति करते थे।