अमेरिका ने पहली बार ईरान पर हमले की स्पष्ट चेतावनी दी है। यूएस राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका गंभीरता से विचार कर रहा है। ईरान के स्पीकर ने जवाब में कहा है कि अगर हमला हुआ तो यूएस की सेना और इसराइल हमारे टारगेट पर होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा- हम ईरान पर हमले करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
ईरान में जारी व्यापक विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वॉशिंगटन स्थिति पर “बहुत गंभीरता से” विचार कर रहा है और इसके जवाब में “कड़े विकल्पों” पर काम चल रहा है, जिनमें सैन्य हस्तक्षेप भी शामिल हो सकता है। ट्रंप ने रविवार देर रात एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, “हम इसे बेहद गंभीरता से देख रहे हैं। सेना इस पर विचार कर रही है और हम कुछ बहुत मजबूत विकल्पों पर काम कर रहे हैं। जल्द ही निर्णय लिया जाएगा।”
उधर, ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ ने कहा कि अमेरिकी हमले की स्थिति में अमेरिकी सैन्य संपत्तियों और इसराइल को "वैध टारगेट" माना जाएगा। ईरानी संसद के लाइव सत्र के दौरान सांसदों ने "अमेरिका मुर्दाबाद" के नारे लगाए। इस बीच अमेरिका स्थित मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि ईरान में प्रदर्शन के दौरान अब तक 500 लोग मारे जा चुके हैं।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेशेज़्कियान ने देश में बढ़ते आर्थिक असंतोष को स्वीकार करते हुए प्रदर्शनकारियों से बातचीत का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार लोगों की शिकायतें सुनने के लिए “तैयार” है, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि “उपद्रवी” और “आतंकी तत्व” हालात को बिगाड़ने का मौका न पाएं। पेशेज़्कियान ने रविवार को सरकारी टेलीविजन को दिए इंटरव्यू में कहा, “यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम लोगों की बात सुनें। जनता को भी यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उपद्रवी देश में अराजकता न फैलाएं। हमारा लक्ष्य इंसाफ लागू करना है।”
स्पीकर मोहम्मद बगेर क़लिबफ़ ने अशांति के दौरान "दृढ़ता से खड़े रहने" के लिए ईरान के सुरक्षा बलों की तारीफ की और प्रदर्शनकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा, “ईरान के लोगों को यह पता होना चाहिए कि हम दंगाइयों और प्रदर्शनकारियों के साथ सबसे सख्त तरीके से निपटेंगे और गिरफ्तार किए गए लोगों को दंडित करेंगे।” इसराइल को “कब्जे वाला क्षेत्र” बताते हुए उन्होंने कहा, “ईरान पर हमले की स्थिति में, कब्जे वाला क्षेत्र और इस क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य केंद्र, अड्डे और जहाज हमारे वैध लक्ष्य होंगे।” उन्होंने कहा कि ईरान हमले के बाद जवाबी कार्रवाई तक ही सीमित नहीं रहेगा।
ईरान में यह विरोध-प्रदर्शन 28 दिसंबर 2025 को उस समय शुरू हुआ जब तेहरान के ऐतिहासिक ग्रैंड बाज़ार के व्यापारियों ने ईरानी रियाल के गिरने के विरोध में अपनी दुकानें बंद कर दीं। इसके बाद आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में फैल गया और अब यह तीसरे सप्ताह में प्रवेश कर चुका है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, इन प्रदर्शनों के दौरान अब तक 500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि ईरानी अधिकारियों ने इस आंकड़े पर टिप्पणी नहीं की है। ईरान का आरोप है कि इसराइली खुफिया संगठन मोसाद के प्रशिक्षित लोग ईरान में अराजकता फैला रहे हैं। कुछ स्थानों पर इसराइल में बने हथियार बरामद हुए हैं।
ईरान के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कड़े रुख का समर्थन किया है। वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी अली लरजियानी ने प्रदर्शनकारियों पर इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों जैसी रणनीति अपनाने का आरोप लगाया है और हत्याओं व आगजनी के हमलों का हवाला दिया। ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आज़ाद ने चेतावनी दी है कि गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों पर "ईश्वर के शत्रु" (Enemy of God) होने का आरोप लगाया जा सकता है, जिसके लिए फांसी का प्रावधान है। ईरान के चीफ जस्टिस गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई ने "कोई नरमी न बरतने" का आह्वान किया है और अधिकारियों से उन प्रदर्शन करने वालों की पहचान करने का आग्रह किया है जो "सड़कों पर तो दिखाई नहीं दे रहे हैं। लेकिन वे युवकों को भड़का कर साजिश रच रहे हैं।"