ऐसा लगता है कि राहुल गाँधी के सामाजिक न्याय के मुद्दे और भागीदारी के सवाल को मिल रहे समर्थन से बीजेपी ही नहीं आरएसएस भी घबरा गया है। बिहार में राहुल गाँधी की वोट अधिकार यात्रा को मिले अभूतपूर्व समर्थन ने चिंता और बढ़ा दी है। यही वजह है कि आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत इशारों में काशी और मथुरा से जुड़े मंदिरों के विवाद को गरमाने का संकेत दिया है। उन्होंने यह तो कहा है कि संघ ख़ुद इस आंदोलन में भाग नहीं लेगा लेकिन स्वयंसेवकों को इसमें शामिल होने की छूट देकर उन्होंने इरादा साफ़ कर दिया है। यानी राहुल के सामाजिक न्याय एजेंडे की काट में काशी और मथुरा का मुद्दा गरमााय जाएगा।
राहुल से घबराये भागवत ने ‘काशी-मथुरा’ गरमाने का दिया संकेत
- विश्लेषण
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- 29 Aug, 2025

RSS प्रमुख मोहन भागवत ने फिर मंदिर मस्जिद मुद्दा उठाया। स्वंयसेवकों को काशी-मथुरा में मंदिर के लिए आंदोलन की आज़ादी देते हुए मुस्लिमों से मस्जिद से दावा छोड़ने को कहा। जानिए, इस बयान के मायने क्या।
28 अगस्त 2025 को दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस का तीन दिवसीय समागम समाप्त हुआ। इस दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने समाज के विभिन्न वर्गों को आरएसएस के विचारों और कार्यों से परिचित कराने का प्रयास किया। उन्होंने कहा, “राम मंदिर आंदोलन ही एकमात्र ऐसा आंदोलन था, जिसे आरएसएस ने समर्थन दिया। काशी और मथुरा जैसे अन्य आंदोलनों को आरएसएस समर्थन नहीं देगा, लेकिन स्वयंसेवकों को इनमें शामिल होने की छूट होगी।”
इस बयान ने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या यह आरएसएस का दोहरा रवैया नहीं है? क्या काशी और मथुरा के लिए नया आंदोलन शुरू होने वाला है? क्या यह पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 का उल्लंघन नहीं होगा? और सबसे बड़ा सवाल, क्या आरएसएस धार्मिक ध्रुवीकरण के ज़रिए राजनीतिक शक्ति हासिल करने के लिए देश को हिंदू-मुस्लिम विवाद में उलझाए रखना चाहता है?