जेडीयू कार्यकर्ता क्या बीजेपी को बिहार में अपना सीएम नहीं बनाने देंगे? बिहार में जेडीयू के पोस्टर से सियासत गरमा गई है, जिसमें ‘बुलडोजर और दंगा-फसाद नहीं’ का संदेश देते हुए निशांत कुमार को मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी है।
जेडीयू कार्यकर्ताओं का पोस्टर
नीतीश कुमार के इस्तीफ़े के बाद भी बिहार में सीएम पद पाना क्या बीजेपी के लिए आसान नहीं है? कम से कम जेडीयू कार्यकर्ताओं ने जिस तरह से मोर्चा खोला है, उससे तो यही संकेत मिलता है। इन्होंने रविवार को ताज़ा पोस्टर लगाकर बीजेपी को साफ़ संकेत दे दिया है। पोस्टर में नीतीश के बेटे निशांत कुमार को 'अगला मुख्यमंत्री' पेश किया गया है और इसके साथ ही संकेतों में बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि 'बिहार में न तो बुलडोजर बवाल और न ही फिर से दंगा फसाद चाहिए'। तो क्या जेडीयू कार्यकर्ताओं के इस रुख की वजह से ही बिहार में सीएम पद की घोषणा नहीं हो पा रही है, क्योंकि सीएम पद छोड़ने की नीतीश की घोषणा के भी एक माह से ज़्यादा का समय हो चुका है?
जेडीयू कार्यकर्ताओं का संदेश
बिहार में सीएम पद को लेकर किस तरह की राजनीति चल रही है यह समझने से पहले यह जान लीजिए कि आख़िर जेडीयू कार्यकर्ताओं के पोस्टर में क्या खास है? दरअसल, जनता दल यूनाइटेड के कार्यकर्ताओं ने रविवार सुबह पटना शहर में बड़े-बड़े पोस्टर लगाए हैं। इन पोस्टरों में नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को 'भविष्य का बिहार का मुख्यमंत्री' बताया गया है।पोस्टरों पर लिखा है, 'नीतीश सेवक हमें बुलडोजर नहीं चाहिए, ना बिहार में दंगे-फसाद चाहिए। हमें लोकनायक चाहिए। अब समय आ गया है कि वह छाया से बाहर आएं। हमें युवा नेता निशांत कुमार चाहिए।' पोस्टर में नीतीश कुमार समेत कई जेडीयू नेताओं की तस्वीरें भी लगाई गई हैं।
बीजेपी पर सांप्रदायिक होने का आरोप!
जेडीयू कार्यकर्ताओं के इस पोस्टर को बीजेपी पर निशाना साधने के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि बीजेपी इस बार अपना सीएम बनाएगी। इसी बीजेपी पर सांप्रदायिक पार्टी होने का आरोप लगता रहा है। योगी आदित्यनाथ को तो बुलडोजर से कार्रवाई के लिए 'बुलडोजर बाबा' तक कहा जाने लगा है। उनके बुलडोजर कार्रवाई को 'बुलडोजर न्याय' कहकर तंज कसा जाता है। अदालत तक ने इसको लेकर सरकार को फटकार लगाई है। बीजेपी भले ही इन आरोपों को खारिज करती रही है, लेकिन विपक्ष इसको लेकर लगातार हमलावर रहा है। खुद कभी नीतीश कुमार और जेडीयू ने पहले बीजेपी पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाया था।नीतीश कुमार ने 2013 में बीजेपी से अलग होने के समय और उसके बाद कई बार बीजेपी को सांप्रदायिक बताया था। जेडीयू 2013 में एनडीए से अलग हो गया था। नीतीश कुमार ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाए जाने का विरोध किया था। उन्होंने कहा था कि वे सांप्रदायिकता पर कभी समझौता नहीं करेंगे।
नीतीश ने 2002 गुजरात दंगों का ज़िक्र करते हुए बीजेपी और नरेंद्र मोदी पर सांप्रदायिक रंग देने का आरोप लगाया था।
नीतीश बाद में क्यों बदल गये?
2015 बिहार चुनाव के दौरान भी नीतीश कुमार ने मोदी पर आरोप लगाया था कि वे चुनाव में सांप्रदायिक रंग जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने गुजरात दंगों का उदाहरण देते हुए कहा था कि बीजेपी को क़ानून-व्यवस्था पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। बता दें कि नीतीश कुमार 2005 से 2013 तक बीजेपी के साथ एनडीए में थे और तीन बार मुख्यमंत्री बने। उस समय उन्होंने बीजेपी को सांप्रदायिक नहीं बताया था। 2017 में वे फिर बीजेपी के साथ आ गए और तब से ज्यादातर समय एनडीए में ही हैं। बाद में जब बीजेपी के साथ वह सत्ता में रहे तो अब उन्होंने बीजेपी पर सीधे सांप्रदायिकता का आरोप कम लगाए हैं। सीएम पद पर नाम को लेकर विवाद?
नीतीश कुमार ने कुछ दिन पहले बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। 10 अप्रैल को उन्होंने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली। अब वे बिहार विधान परिषद की सदस्यता से भी इस्तीफा दे चुके हैं। नीतीश कुमार का यह कदम बिहार की सत्ता में बड़ा बदलाव ला रहा है। उनकी जगह अब बीजेपी के हाथ में सत्ता की कमान आती दिख रही है।
ऐसे में जेडीयू के कुछ कार्यकर्ता निशांत कुमार को आगे लाने की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत कुमार छाया से बाहर आएं और बिहार की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएं। कुछ सूत्रों का कहना है कि निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री बनाने की भी चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
सीएम के लिए किन नामों की चर्चा?
एनडीए के अंदर चर्चा में सम्राट चौधरी का नाम सबसे आगे चल रहा है। वे फ़िलहाल बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं और बीजेपी के बड़े नेता हैं। सम्राट चौधरी कुशवाहा समुदाय से आते हैं और उन्होंने पिछले कुछ सालों में पार्टी में मज़बूत संगठन खड़ा किया है। बिहार में बीजेपी के लिए कुशवाहा समुदाय का वोट बैंक काफ़ी अहम है और बीजेपी की नज़र इस पर हो सकती है। नीतीश कुमार ने हाल ही में सहरसा के एक कार्यक्रम में सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखकर लोगों से कहा था कि वे इनका साथ दें। नीतीश ने कहा था, 'मैंने इन्हें लोगों के लिए और बहुत सारे काम करने को कहा है।' इस बयान को सम्राट चौधरी को समर्थन के रूप में देखा जा रहा है।नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है। वह केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हैं। वे यादव समुदाय से हैं। उनका मुख्यमंत्री बनना यादव वोटरों तक बीजेपी की पहुँच बढ़ा सकता है जो पारंपरिक रूप से लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव के साथ जुड़े रहे हैं। बिहार सरकार में मंत्री दिलीप जायसवाल का नाम भी चल रहा है। सीमांचल क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है और वे संगठनात्मक काम में विश्वसनीय माने जाते हैं। संजीव चौरसिया का नाम भी लिया जा रहा है। वह पटना से पांच बार विधायक हैं। बीजेपी में गहरी जड़ें रखते हैं।
अभी क्या स्थिति है?
नीतीश कुमार अब राज्यसभा सांसद हैं। बिहार सरकार की कमान भाजपा के पास जाने की संभावना है। निशांत कुमार को उप मुख्यमंत्री बनाने की अटकलें तेज हैं। जेडीयू कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए पोस्टरों ने पार्टी के अंदर नई चर्चा शुरू कर दी है। अभी तक जेडीयू या नीतीश कुमार की तरफ से इस पोस्टर अभियान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बिहार की राजनीति में यह नया घटनाक्रम आने वाले चुनावों से पहले सत्ता के समीकरणों को और दिलचस्प बना रहा है।