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दिल्ली मेयर चुनाव 22 फ़रवरी को, हालात बदले

दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 22फरवरी को मेयर का चुनाव कराने के अनुरोध को मान लिया है। उम्मीद है कि दिल्ली को उसका नया मेयर मिल जाएगा।दिल्ली के मुख्यमंत्री ने शनिवार को उप राज्यपाल को पत्र लिखकर मेयर चुनाव के लिए 22 तारीख का प्रस्ताव दिया था, जिसे LG विनय कुमार सक्सेना ने मान लिया है।
दो महीने से टल रहे मेयर दिल्ली के मेयर चुनावों पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव कराने का रास्ता साफ़ हो गया था। चुनाव की तारीख की घोषणा की जानी थी, जो दिल्ली के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना करने वाले थे। 
घोषणा से पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने उपराज्यपाल को एक पत्र लिखकर चुनाव 22 फरवरी को कराने का प्रस्ताव भेजा था। उन्होंने इसकी जानकारी ट्विटर पर देते हुए कहा कि मैंने LG साहब को 22 फरवरी को चुनाव कराने का प्रस्ताव भेजा है।
आम आदमी पार्टी और बीजेपी के आपसी झगड़े में दिल्ली मेयर का चुनाव पहले ही तीन बार टाला जा चुका है। झगड़े की वजह वहां मनोनित सदस्यों के वोट करने को लेकर था। इसमें आप कहना था कि मनोनीत सदस्य मेयर के चुनाव में वोट नहीं कर सकते, जबकि भाजपा का कहना था कि इनको भी वोटिंग का अधिकार दिया जाए। दिल्ली नगर निगम  में 10 मनोनीत सदस्यों की नियुक्त करने की व्यवस्था की गई है। आम आदमी पार्टी (आप) ने 250 में से 134 सीटें जीतीं हैं, जबकि भाजपा ने 104 सीटें जीती थीं।
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दरअसल भाजपा मनोनीत सदस्यों का साथ पाकर आम आदमी पार्टी को मेयर का चुनाव जीतने से रोकने की कोशिश कर रही थी। दिल्ली नगर निगम अधिनियम के अनुसार मनोनीत सदस्य या एल्डरमैन, सदन की बैठकों में मतदान नहीं कर सकते। निकाय चुनाव के बाद मेयर के चुनाव के लिए अब तक तीन बार सदन की बैठक बुलाई गई लेकिन तीनों ही बार झगड़े की वजह से स्थगित करनी पड़ी। इस संबध पहली बार 6जनवरी को, दूसरी बार 24 जनवरी को सदन की बैठक बुलाई गई जिसे केवल शपथ ग्रहण के बाद स्थगित कर दिया गया। तीसरी बैठक भी इसी तरह स्थगित कर दी गई।  
दिल्ली में महापौर का पद रोटेशन के आधार पर पांच वर्ष के लिए होता है। जिसमें पहला वर्ष महिलाओं के लिए रिजर्व है, दूसरा ओपन कैटेगरी के लिए, तीसरा आरक्षित वर्ग के लिए और शेष दो भी ओपन कैटेगरी में हैं। आप ने जहां मेयर पद के लिए शैली ओबेरॉय को मैदान में उतारा है, वहीं बीजेपी की ओर से मेयर पद की उम्मीदवार रेखा गुप्ता हैं। डिप्टी मेयर पद के लिए आले मोहम्मद इकबाल (आप) और कमल बागड़ी (बीजेपी) उम्मीदवार हैं।
आम आदमी पार्टी पार्षदों ने एमसीडी के पीठासीन अधिकारी सत्यास शर्मा को एक पत्र भेजकर एल्डरमैन को सोमवार को होने वाले चुनावों में भाग लेने से अयोग्य ठहराने की मांग की थी। उन्होंने कहा कि उन्हें चुनाव में भाग लेने की अनुमति देना दिल्ली के नागरिकों के लिए अपमानजनक होगा। आप के सभी 135 पार्षदों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया है कि जिन व्यक्तियों को नामित किया गया है वे संविधान और दिल्ली नगर निगम अधिनियम के अनुसार मतदान करने के योग्य नहीं हैं।
आप की मेयर पद की उम्मीदवार शैली ओबेरॉय की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में फैसला सुनाया। और अगले 24 में मेयर के चुनाव संबधी बैठक के लिए नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
इससे पहले के घटनाक्रम में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सीएम ने कहा कि एलजी वीके सक्सेना ने निकाय के सदस्यों के मतदान के अधिकार पर अपने वकील को मामले के दोनों पक्षों को बहस करने की कोशिश करके अदालत की अवमानना की है। केजरीवाल ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि एलजी धोखे से मामले को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि उपराज्यपाल ने मामले को 'असंवैधानिक' रूप से प्रभावित करने की कोशिश की जिससे मामले की सच्चाई अदालत में सामने न आने पाए। एलजी साहब और बीजेपी वाले बीजेपी का मेयर बनाने की कोशिश कर रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी कोशिश को नाकाम कर दिया।
केजरीवाल ने आरोप लगाते कहा कि 9 फरवरी को शहरी विकास सचिव को निर्देश दिया गया कि उपराज्यपाल की इच्छा है कि शहरी विकास विभाग उपराज्यपाल ऑफिस की तरफ से याचिका का बचाव करे और याचिका। ऑफिस इसके लिए भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की सेवाएं लेगा। यह ऐसा ही जैसे मेरा वकील मेरा है, आपका वकील भी मेरा ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि उपराज्यपाल चाहते हैं कि तुषार मेहता अदालत में दोनों पक्षों का प्रतिनिधित्व करके उनके सभी 'गलत कार्यों' का बचाव करें।
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