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दंगा: बीजेपी नेता अतीक़ बोले- फ़ैक्ट्री जला दी, मुसलिम नाम होने के कारण किसी ने पूछा तक नहीं 

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर दिल्ली में हुए दंगे में कई ऐसी घटनाएं सामने आ चुकी हैं जिनमें लोगों को उनका मज़हब पूछकर निशाना बनाया गया। केंद्र में बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार होने के कारण स्वाभाविक रूप से बीजेपी के सभी नेता और कार्यकर्ता इस क़ानून के समर्थक में थे। लेकिन दिल्ली के दंगों में दंगाइयों ने बीजेपी के नेता की फ़ैक्ट्री को भी फूंक दिया। बीजेपी नेता होने के कारण दंगाइयों ने उनका नुक़सान नहीं करना चाहिये था लेकिन यहां दंगाइयों ने उनके मजहब के कारण उनकी फ़ैक्ट्री को निशाना बनाया। 

बीजेपी के इन नेता का नाम मुहम्मद अतीक़ है और वह दंगा प्रभावित उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के उस्मानपुर के रहने वाले हैं। अतीक़ की करावल नगर में अंडरगारमेंट्स की फ़ैक्ट्री है जिसमें दंगाइयों ने 25 फ़रवरी की रात को आग लगा दी थी। अतीक़ दंगा प्रभावित इलाक़े बृजपुरी के बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चे के अध्यक्ष हैं। 
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45 साल के अतीक़ ने अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को बताया कि उनके पड़ोसी ने उन्हें फ़ैक्ट्री में दंगाइयों द्वारा आग लगाये जाने की सूचना दी। अतीक़ कहते हैं, ‘मैं डर के कारण अभी तक फ़ैक्ट्री में नहीं जा पाया हूं। पास में ही मेरे छोटे भाई की फ़ैक्ट्री थी, उसमें भी दंगाइयों ने आग लगा दी। मुझे उम्मीद थी कि बीजेपी के नेता मुझे कम से कम कॉल करेंगे, मदद देंगे और ढांढस बधायेंगे।’
अतीक़ बताते हैं कि वह पिछले 16-17 साल से बीजेपी के ज़मीनी कार्यकर्ता हैं। अतीक़ कहते हैं, ‘दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष मनोज तिवारी की ही तरह मैं भी बिहार से हूं। वह मुझे जानते हैं। लेकिन मेरा मुसलमान वाला नाम है, हमें तो पराया ही कर दिया।’

अतीक़ ने अख़बार को बताया कि उन्होंने 14 साल पहले बिजनेस शुरू किया था और यह फ़ैक्ट्री किराये की जगह में चल रही है। अतीक़ कहते हैं, ‘जैसे ही हिंसा शुरू हुई, मैंने अपने कर्मचारियों से पैक अप करने के लिये और काम छोड़ देने के लिये कहा। जब मुझे फ़ैक्ट्री में आग लगने की सूचना मिली तब मैं घर पर था।’ अतीक़ ने अख़बार से कहा कि उस वक़्त वह असहाय थे।

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अतीक़ कहते हैं कि उनके समुदाय के लोग उनके बीजेपी से जुड़े होने को लेकर अक़सर सवाल करते हैं। अतीक़ ने अख़बार से कहा, ‘मैंने प्रधानमंत्री के सबका साथ, सबका विकास में भरोसा किया और जो लोग बीजेपी की आलोचना करते थे, मैं उनके साथ बहस करता था।’ अतीक़ ने कहा कि अब वे लोग मुझसे पूछ रहे हैं कि पार्टी ने मेरे लिये क्या किया और मेरे पास कोई जवाब नहीं है। 

अतीक़ कहते हैं, 'मैंने अब तक बीजेपी नहीं छोड़ी है लेकिन अगर पार्टी मुझसे संपर्क नहीं करेगी तो मैं आने वाले दिनों में पार्टी को अलविदा कह दूंगा।' वह कहते हैं, ‘मैं सड़क पर आ गया हूं, फिर कैसे अपने पैरों पर खड़ा होऊं।’
एक अन्य घटना में बीएसएफ़ के जवान मुहम्मद अनीस के घर में भी दंगाइयों ने आग लगा दी थी। उस वक़्त भी दंगाइयों ने यह जानने की कोशिश नहीं कि यह देश की सुरक्षा में तैनात जवान का घर है, शायद उन्हें यह जानने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई क्योंकि वे मज़हब के आधार पर लोगों के घरों की पहचान करके उन्हें आग लगा रहे थे और इस बात की तसदीक कई दंगा पीड़ितों ने की है। 
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