loader

क्या राहुल गांधी बीफ़ खाते हुए पकड़े गए? 

राहुल गांधी बीफ़ खाते हुए कैमरे में क़ैद हुए, इस दावे के साथ एक पोस्ट सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। पोस्ट में लिखा गया, 'जनेऊघारी तथाकथित ब्राहमण बीफ खाते केमरे मे कैद हो गये।' वायरल पोस्ट के साथ राहुल गांधी की नाश्ता करते हुए एक तस्वीर शेयर की गई है। यह पोस्ट बीजेपी समर्थक 'वी सपोर्ट नरेंद्र मोदी' नाम के फ़ेसबुक पेज पर शेयर की गई है। ख़बर लिखे जाने तक इस पोस्ट को 600 से ज़्यादा लोगों द्वारा शेयर किया जा चुका है। 

इसी पोस्ट को अंकुर सिंह नाम के एक यूजर ने ट्विटर पर शेयर किया है। वायरल तस्वीरों को शेयर करते हुए अंकुर सिंह ने लिखा, ' इलेक्शन के पहले पूजा, और इलेक्शन के बाद में पेट पूजा #बीफईटरराहुल।' इसके अलावा कई और यूजर्स ने भी राहुल गांधी की तस्वीरों को बीफ वाले दावे के साथ वायरल किया।

वायरल ख़बर की सच्चाई

वायरल होती तस्वीरों की सत्यता जानने के लिए हमने जब इस तस्वीर को गूगल रिर्वस इमेज में सर्च किया तो हमें इससे संबंधित कई और ट्विटर अकाउंट मिले जो इस तस्वीर को वायरल कर रहे थे। यहां पर हमें पोस्ट पर एक कमेंट मिला जिसमें लिखा था कि अगर तस्वीर को फाॅटोशाॅप ही करना था तो थाली में बीफ़ क्यों दिखाया राहुल गांधी के हाथ में दिखा देते। इतना ही नहीं इस यूजर ने कमेंट के साथ-साथ राहुल गांधी की असली फोटो भी शेयर की जिसमें उनकी थाली में कुछ और रखा दिखाई दे रहा है।

congress president rahul gandhi caught in camera during eaten beef - Satya Hindi
जिसके बाद हमने इन वायरल तस्वीरों को लेकर अपनी पड़ताल आगे बढ़ाई तो हमें पता चला कि ये तस्वीरें दुबई के एक होटल की हैं जहां पर राहुल गांधी कुछ व्यापारियों के साथ मीटिंग के दौरान नाश्ता कर रहे हैं। राहुल गांधी की नाश्ता करते हुए ये तस्वीरें शुक्रवार को कांग्रेस के आधिकारिक ट्वटिर हैंडल पर शेयर करते हुए लिखा गया, ' दिन की शुरूआत से पहले राहुल गांधी ने सम पिटरोडा के साथ नाश्ते के दौरान व्यापारिक नेताओं से मुलाकात की।
सत्य हिंदी की पड़ताल में वायरल होती पोस्ट झूठी साबित हुई। राहुल गांधी की तस्वीरों को फाॅटोशाॅप कर लोगों के बीच में उनकी छवि को बिगाड़ने की कोशिश की गई।
सत्य हिन्दी ऐप डाउनलोड करें

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
क़मर वहीद नक़वी
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

असत्य से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें