गुजरात की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर कर दी गई है। लगभग 92.4 लाख मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं। द वायर की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह संख्या राज्य की मतदाता आबादी का 17.5% है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब गुजरात में आसपास कोई चुनाव नहीं चल रहा है। इसी वजह इतने बड़े पैमाने पर वोटरों के नाम हटाने पर न कोई सवाल हुआ और न कोई शोर मचा। जबकि अन्य राज्यों में जहां आसपास चुनाव हैं, ऐसी प्रक्रिया पर लोगों और राजनीतिक दलों का का ध्यान ज्यादा रहता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि गुजरात का Elector Recorded Percentage (ERP) 2024 में 96.7% से गिरकर फरवरी 2026 में 82.6% रह गया है। यह गिरावट एक प्रमुख भारतीय राज्य के लिए अभूतपूर्व है। जनगणना के आधार पर गुजरात में 18 वर्ष से अधिक आयु की अनुमानित पात्र आबादी लगभग 5.33 करोड़ (5,32,75,000) है। इसमें 0-4, 5-9, 10-14 आयु वर्गों को जोड़कर और 15-19 आयु वर्ग के 60% को शामिल किया गया है (18 वर्ष से कम आयु वालों को घटाकर)। हालांकि, चुनाव आयोग की अंतिम मतदाता सूची फरवरी 2026 में मात्र 4.40 करोड़ (4,40,30,725) मतदाताओं की आई है। इससे 92.4 लाख पात्र व्यक्ति गायब हैं। ऐसा एसआईआर के बाद हुआ। एसआईआर पर विपक्षी राजनीतिक दलों ने नज़र ही नहीं रखी।



रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2025 में रजिस्टर्ड मतदाता 5.03 करोड़ थे, जो फरवरी 2026 तक घटकर 4.40 करोड़ रह गए, यानी कुल मिलाकर 62.8 लाख की कमी आई। लेकिन कुल गायब मतदाताओं की संख्या 92.4 लाख है।

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गुजरात के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने 2026 के ड्राफ्ट रोल से फाइनल रोल के बीच नेट ऐडिशन 5.60 लाख बताया है यानी 9.56 लाख नाम जोड़े गए और 3.95 लाख हटाए गए। लेकिन जमीनी कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल अंतिम चरण का डेटा है, जो इससे पहले हुए बड़े पैमाने की सफाई को छिपाता है। ड्राफ्ट रोल से पहले ही 68 लाख से अधिक नाम हटाए जा चुके थे।

यह सफाई स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) के तहत हुई, जिसमें मृत्यु, इमीग्रेशन, डुप्लिकेट एंट्री और अन्य कारणों से नाम हटाए गए। अन्य मीडिया रिपोर्टों में कुल डिलीशन्स 68-77 लाख के बीच बताई गई हैं (जैसे 73.7 लाख ड्राफ्ट में और 3.9 लाख बाद में)। जिसमें 40 लाख स्थायी रूप से ट्रांसफर, 18 लाख मृत, 9.8 लाख अपने पते पर गैरहाज़िर आदि शामिल हैं। अंतिम सूची में 4.40 करोड़ मतदाता बचे हैं, जो 2025 की तुलना में 13.4% कम हैं।

राजनीतिक कार्यकर्ता और विशेषज्ञ इतने बड़े पैमाने की डिलीशन पर अब सवाल उठा रहे हैं, खासकर जब राज्य में कोई चुनाव नहीं है। पूर्व सांख्यिकी अधिकारी एनके शर्मा जैसे विशेषज्ञों ने इस गिरावट को अभूतपूर्व बताया है।

चुनाव आयोग ने इस पर कोई विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया है, लेकिन CEO ने नेट ऐडिशन पर जोर दिया है। यह घटना मतदाता सूची की शुद्धता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर रही है, खासकर जब अन्य राज्यों में SIR चल रहा है।


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सवाल यह है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने के बावजूद, क्या उन मतदाताओं को उचित सूचना दी गई थी? चुनाव प्रक्रिया के विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या (92.4 लाख) गुजरात जैसे राज्य के लिए बहुत अधिक है, और इसमें डेटा एंट्री की गलतियों या तकनीकी खामियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में मतदाता सूची से नाम हटाने की यह दर राष्ट्रीय औसत या पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक देखी गई है। यह बड़े पैमाने पर की गई 'सफाई' आने वाले स्थानीय और राज्य चुनावों के समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।