केंद्र ने अग्निवीरों की सेवा अवधि 4 से बढ़ाकर 6 साल की। योगी आदित्यनाथ ने यूपी में सरकारी नौकरियों में 20% आरक्षण का ऐलान किया। क्या 2027 यूपी चुनाव से पहले बीजेपी की यह अग्निवीर रणनीति है?
चार साल की अग्निवीर सेवा को छह साल करने का केंद्र का फैसला और यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सरकारी नौकरियों में 20 फीसदी आरक्षण का ऐलान। दोनों घोषणाएं एक ही दिन सुर्खियों में हैं। फरवरी-मार्च 2027 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या अग्निवीरों को लेकर केंद्र और यूपी सरकार की घोषणाओं के पीछे कोई साझा राजनीतिक रणनीति है? क्या बीजेपी ने अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं की नाराजगी दूर करने के लिए चुनाव से ठीक पहले नया दांव चला है?
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी लगातार सरकारी योजनाओं, विकास परियोजनाओं और रोजगार से जुड़े वादों के जरिए चुनावी माहौल बनाने में लगे हैं। इसी बीच 4 नवंबर बुधवार को अग्निवीरों को लेकर दो महत्वपूर्ण घोषणाएं सामने आईं। पहली घोषणा देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने की और दूसरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में की।
चार साल की अग्निवीर सेवा अब छह साल की होगी
सबसे पहले केंद्र सरकार के फैसले को समझते हैं। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने 4 नवंबर को घोषणा की कि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों को चार साल की शुरुआती सेवा के बाद दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर दिया जाएगा।
यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह व्यवस्था सभी अग्निवीरों के लिए एक जैसी नहीं है। मूल योजना के तहत 25 प्रतिशत अग्निवीरों को प्रदर्शन और अन्य निर्धारित मानदंडों के आधार पर नियमित सेना में शामिल किया जाना था। बाकी 75 प्रतिशत को चार साल बाद सेवा से बाहर होना था।अब केंद्र सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए इन 75 प्रतिशत अग्निवीरों को दो साल और सेवा करने का अवसर देने का फैसला किया है। इस तरह उनकी कुल सेवा अवधि छह साल हो सकेगी। दो साल की अतिरिक्त सेवा पूरी करने के बाद नियमित सशस्त्र बलों में शामिल होने के इच्छुक अग्निवीरों पर फिर से विचार किया जाएगा। इसके लिए प्रदर्शन, योग्यता और निर्धारित चयन प्रक्रिया को आधार बनाया जाएगा।
सीडीएस ने बताया कि इस प्रस्ताव को सशस्त्र बलों की ओर से आगे बढ़ाया गया था और केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी है। इस फैसले का महत्व इसलिए भी है क्योंकि अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले पहले बैच की चार साल की सेवा अवधि समाप्त होने वाली है। भारतीय नौसेना के पहले बैच के अग्निवीर 21 नवंबर से सेवा अवधि पूरी करने लगेंगे। वायुसेना के पहले बैच का कार्यकाल 21 दिसंबर और थलसेना के पहले बैच का 31 दिसंबर के आसपास पूरा होगा। रिपोर्टों के मुताबिक, 2026 के अंत तक पहले बैच के 18 हजार से अधिक अग्निवीरों की चार साल की सेवा अवधि पूरी होने वाली थी। यानी केंद्र सरकार ने उस समय यह फैसला किया है, जब अग्निवीरों के पहले बड़े समूह के सामने सेना से बाहर होने का सवाल खड़ा था।
योगी आदित्यनाथ का गोंडा में बड़ा ऐलान: सरकारी नौकरियों में 20 फीसदी आरक्षण
अब उत्तर प्रदेश की बात करते हैं। 4 नवंबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में आयोजित जनसभा में अग्निवीरों के लिए सरकारी नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा को फिर प्रमुखता से सामने रखा। उन्होंने कहा कि चार साल की सैन्य सेवा पूरी करके लौटने वाले अग्निवीरों को उत्तर प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों में नौकरी दी जाएगी। मुख्यमंत्री के मुताबिक, पुलिस, प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी (PAC), होमगार्ड, वन विभाग और कारागार विभाग सहित अन्य सरकारी विभागों में अग्निवीरों को 20 प्रतिशत आरक्षण का लाभ दिया जाएगा। योगी ने यह भी कहा कि अग्निवीरों को उनके सैन्य प्रशिक्षण और अनुभव के आधार पर सीधे भर्ती का अवसर मिलेगा और उन्हें इसके लिए दोबारा परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी। इस घोषणा का राजनीतिक महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश के उन राज्यों में है जहां से बड़ी संख्या में युवा सेना में भर्ती होने की तैयारी करते हैं।
- सेना में नौकरी केवल रोजगार नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा और परिवार की आर्थिक सुरक्षा से भी जुड़ी हुई है। ऐसे में अग्निवीरों के भविष्य को लेकर कोई भी फैसला उत्तर प्रदेश की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
- हालांकि, यहां एक तथ्य पर ध्यान देना जरूरी है। योगी सरकार ने जून 2025 में भी पूर्व अग्निवीरों के लिए पुलिस कांस्टेबल, PAC, माउंटेड पुलिस और फायरमैन की सीधी भर्ती में 20 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दी थी।
- 4 नवंबर की घोषणा में इस दायरे को होमगार्ड, वन और कारागार विभाग सहित अन्य क्षेत्रों तक बढ़ाने की बात सामने आई है। इसलिए इसे पूरी तरह नई घोषणा कहने के बजाय पहले की व्यवस्था के विस्तार और उसके रानीतिक रणनीति के रूप में देखना ज्यादा सही होगा।
सबसे बड़ा सवाल: क्या अग्निवीरों के बहाने यूपी चुनाव की तैयारी हो रही है?
अब इन दोनों घोषणाओं को एक साथ रखकर देखिए। एक तरफ केंद्र सरकार अग्निवीरों की चार साल की सेवा को छह साल तक बढ़ाने का फैसला करती है। दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अग्निवीरों को सरकारी नौकरियों में 20 प्रतिशत आरक्षण देने की घोषणा करते हैं।
दोनों घोषणाओं का सीधा लाभ उन युवाओं को मिलता है जिनका भविष्य अग्निपथ योजना से जुड़ा है। और यह सब ऐसे समय हो रहा है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने में लगभग चार महीने का समय बचा है। चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में होने की संभावना है। मुख्य चुनाव आयुक्त भी पहले स्पष्ट कर चुके हैं कि चुनाव निर्धारित समय पर कराए जाएंगे।उत्तर प्रदेश में सेना में भर्ती होने की तैयारी करने वाले युवाओं और उनके परिवारों की संख्या काफी बड़ी है। अग्निपथ योजना को लेकर इस वर्ग में असंतोष रहा है। चार साल बाद नौकरी समाप्त होने और नियमित सैनिक बनने की सीमित संभावना को लेकर युवाओं ने सवाल उठाए हैं। ऐसे में केंद्र का दो साल का सेवा विस्तार और राज्य सरकार का सरकारी नौकरियों में आरक्षण, दोनों ही घोषणाएं राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हो जाती हैं।
- बीजेपी के सामने एक चुनौती यह भी रही है कि अग्निपथ योजना को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्षी दलों ने इस योजना को युवाओं के भविष्य और सेना की स्थायी भर्ती व्यवस्था से जोड़कर निशाना बनाया है।
- अब केंद्र सरकार का फैसला विपक्ष के इस हमले का जवाब देने की कोशिश के तौर पर पेश किया जा सकता है।
- योगी सरकार की घोषणा भी इसी राजनीतिक नैरेटिव को मजबूती देती है कि अग्निवीरों को सेना से बाहर आने के बाद भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
क्या सेना का फैसला और राजनीतिक घोषणा एक-दूसरे से जुड़ी हैं?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू यही है। सेना एक संवैधानिक और संस्थागत व्यवस्था है। उसका काम देश की सुरक्षा करना है, न कि किसी राजनीतिक दल के चुनावी हितों को पूरा करना। सेना से जुड़े नीतिगत फैसलों का आधार राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य जरूरतें, मानव संसाधन और परिचालन क्षमता होनी चाहिए। इसलिए यह कहना उचित नहीं होगा कि सीडीएस ने यूपी चुनाव को ध्यान में रखकर अग्निवीरों का कार्यकाल बढ़ाने की घोषणा की।
- लेकिन यह सवाल जरूर उठता है कि इस फैसले का राजनीतिक लाभ किसे मिलेगा और इसका समय इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
- सीडीएस ने खुद बताया है कि दो साल के विस्तार का प्रस्ताव सशस्त्र बलों की ओर से आया और कैबिनेट ने उसे मंजूरी दी। यानी यह केंद्र सरकार का नीतिगत फैसला है। इसे केवल सीडीएस की व्यक्तिगत घोषणा नहीं समझना चाहिए।
- दूसरी ओर, योगी आदित्यनाथ की घोषणा पूरी तरह राज्य सरकार की रोजगार नीति से जुड़ी है। इसका सीधा संबंध उत्तर प्रदेश के उन युवाओं से है जो सेना में अग्निवीर के रूप में भर्ती हुए हैं या भविष्य में होना चाहते हैं।
दोनों फैसलों का एक ही समय पर सामने आना राजनीतिक दृष्टि से निश्चित रूप से महत्वपूर्ण है। इसलिए सवाल उठाना और राजनीतिक संदर्भ की पड़ताल करना जरूरी है, लेकिन बिना प्रमाण इसे सेना के राजनीतिक इस्तेमाल का निष्कर्ष नहीं बनाया जा सकता।
योगी सरकार के रोजगार के दावों की भी परीक्षा होगी
इस पूरे घटनाक्रम का एक दूसरा पहलू भी है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी लंबे समय से बड़ा राजनीतिक मुद्दा रही है। सरकारी नौकरियों में भर्ती, भर्ती परीक्षाओं में देरी, पेपर लीक, नियुक्तियों में लंबा इंतजार और रोजगार की कमी को लेकर युवाओं का असंतोष समय-समय पर सामने आता रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोंडा में अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की योजना का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दीपावली के बाद 35 हजार पुलिस कांस्टेबल और 42 हजार होमगार्ड जवानों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त शिक्षकों, अधीनस्थ सेवाओं और दूसरे विभागों में 25 से 30 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही।
- लेकिन सवाल यह है कि इन घोषणाओं का वास्तविक लाभ युवाओं तक कब पहुंचेगा?
- सरकारी नौकरी देने का दावा करना और वास्तविक नियुक्ति पत्र देना दो अलग-अलग बातें हैं।
युवाओं को केवल घोषणाओं से संतुष्ट नहीं किया जा सकता। उन्हें भर्ती प्रक्रिया की समयसीमा, रिक्त पदों की संख्या, परीक्षा और चयन की पारदर्शिता तथा नियुक्ति की गारंटी चाहिए।
- अग्निवीरों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा भी इसी कसौटी पर परखी जाएगी। क्या इसके लिए विभागवार पदों का निर्धारण हो चुका है? क्या भर्ती नियमों में संशोधन होगा? क्या सभी विभागों में आरक्षण लागू होगा? क्या बिना परीक्षा सीधी भर्ती वास्तव में संभव होगी? क्या पहले से मौजूद आरक्षण व्यवस्था के साथ इसका समायोजन किया जाएगा?
इन सवालों के जवाब सरकारी आदेश और भर्ती नियमों में मिलने चाहिए। केवल मंच से की गई घोषणा को नौकरी की गारंटी नहीं माना जा सकता।
अग्निवीरों के लिए दो साल का विस्तार: राहत या समस्या को टालना?
केंद्र सरकार के फैसले का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। दो साल का विस्तार निश्चित रूप से उन अग्निवीरों के लिए राहत है जो इसी साल सेवा से बाहर होने वाले थे। उन्हें तुरंत नागरिक जीवन में लौटकर नौकरी तलाशने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन क्या दो साल बाद उनकी समस्या समाप्त हो जाएगी? अगर दो साल बाद भी केवल सीमित संख्या में अग्निवीर नियमित सेना में शामिल हो पाते हैं और बाकी को बाहर जाना पड़ता है, तो रोजगार का सवाल फिर सामने आएगा।इसका मतलब है कि सरकार ने फिलहाल समस्या को कुछ समय के लिए आगे बढ़ाया है। यह देखना बाकी है कि दो साल के बाद अग्निवीरों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर कितने बढ़ते हैं। इसके अलावा सेना की जरूरतों और भर्ती व्यवस्था पर भी इस फैसले का प्रभाव पड़ेगा। सेना में छह साल तक अग्निवीरों की सेवा लेने से प्रशिक्षण, वेतन, पदों और मानव संसाधन की योजना में बदलाव करना होगा। इसलिए यह केवल रोजगार का फैसला नहीं, बल्कि सेना की भर्ती नीति में भी महत्वपूर्ण बदलाव है।
चुनाव से पहले अग्निवीरों को लेकर बीजेपी का नया नैरेटिव?
राजनीति में समय का अपना महत्व होता है। अगर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से कई साल पहले ये घोषणाएं होतीं तो इन्हें सामान्य प्रशासनिक और नीतिगत फैसलों के तौर पर देखा जाता। लेकिन जब चुनाव कुछ ही महीने दूर हों और अग्निपथ योजना विपक्ष के निशाने पर रही हो, तब इन फैसलों का राजनीतिक महत्व बढ़ जाता है। बीजेपी के लिए यह संदेश देने का अवसर है कि अग्निवीरों के भविष्य को लेकर केंद्र और राज्य दोनों सरकारें गंभीर हैं। केंद्र सरकार कह सकती है कि उसने अग्निवीरों को दो साल अतिरिक्त सेवा का अवसर दिया है। वहीं योगी सरकार कह सकती है कि सेना से लौटने वाले अग्निवीरों के लिए उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी के दरवाजे खुले हैं। इससे उन परिवारों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश हो सकती है जिनके बेटे सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे हैं या अग्निवीर के रूप में सेवा दे रहे हैं।
लेकिन विपक्ष के पास भी सवाल उठाने का अवसर है। वह पूछ सकता है कि अग्निपथ योजना लागू करते समय चार साल की सेवा का प्रावधान क्यों रखा गया था? क्या सरकार ने पहले ही यह नहीं समझ लिया था कि 75 प्रतिशत अग्निवीरों को चार साल बाद रोजगार की समस्या का सामना करना पड़ेगा? क्या अब दो साल का विस्तार उस मूल समस्या की स्वीकारोक्ति नहीं है? और उत्तर प्रदेश में सवाल यह होगा कि जब सामान्य युवाओं को सरकारी नौकरियां देने में सरकार को इतनी मुश्किलें आ रही हैं, तब अग्निवीरों के लिए आरक्षण और सीधी भर्ती की व्यवस्था कितनी प्रभावी होगी?