राहुल गांधी जब संसद में प्रधानमंत्री मोदी को जादूगर कहकर हमला कर रहे थे उसी दौरान इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राहुल गांधी पर दोहरी नागरिकता के आरोप में एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।
राहुल गांधी के ख़िलाफ़ जिन दोहरी नागरिकता के आरोपों को पहले अदालत खारिज कर चुकी है, अब इसके आरोप पर एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने दिया है। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की जांच होनी चाहिए।
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि या तो खुद जांच शुरू करे या मामले को केंद्र सरकार की जांच एजेंसियों को सौंप दे। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर माना और पुलिस को इस मामले में एफ़आईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश कर्नाटक के बीजेपी कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर की याचिका पर आया है। उन्होंने दावा किया है कि उनके पास ब्रिटेन की सरकार के ईमेल और दस्तावेजों के सबूत हैं, जिनसे साबित होता है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक भी हैं। अगर यह सच है तो वे भारतीय चुनाव लड़ने या लोकसभा सदस्य बने रहने के योग्य नहीं हैं।
पहले अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका
दिसंबर 2025 में रायबरेली की स्पेशल एमपी-एमएलए कोर्ट में पहली शिकायत दर्ज कराई गई थी। बाद में इसे लखनऊ ट्रांसफर कर दिया गया। जनवरी 2026 में लखनऊ की स्पेशल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और कहा कि नागरिकता का फ़ैसला करने का अधिकार उनके पास नहीं है। इसके खिलाफ विग्नेश शिशिर हाईकोर्ट पहुंचे। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने भारतीय न्याय संहिता, आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, पासपोर्ट अधिनियम और विदेशी अधिनियम का उल्लंघन किया है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी एक ब्रिटेन स्थित कंपनी के डायरेक्टर रहे हैं और वहां अपनी नेशनैलिटी ब्रिटिश बताई थी।
बीजेपी कार्यकर्ता ने क्या लगाई थी याचिका
बीजेपी कार्यकर्ता विग्नेश शिशिर ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ब्रिटिश नागरिक भी हैं और उन्होंने यह बात छिपाई है। शिशिर ने मांग की थी कि राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए और जांच हो। उनका दावा था कि राहुल गांधी के विदेशी संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा हैं।
यह शिकायत पहले रायबरेली की विशेष एमपी-एमएलए अदालत में दाखिल की गई थी, क्योंकि राहुल गांधी वहाँ से सांसद चुने गए हैं। लेकिन शिशिर ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ से गुहार लगाई और 17 दिसंबर 2025 को कोर्ट ने मामले को रायबरेली से लखनऊ ट्रांसफर कर दिया। विशेष अदालत ने सुनवाई की थी और याचिका खारिज करते हुए कहा था कि नागरिकता या राष्ट्रीयता का मुद्दा तय करना इस कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता।
अदालत ने इसे 'क़ानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग' बताया था और कहा था कि ऐसी याचिकाओं को हतोत्साहित किया जाना चाहिए। नागरिकता जैसे मामले प्रशासनिक प्रक्रिया या विशेष कानूनी तरीकों से तय होते हैं, न कि आपराधिक शिकायत से।
राहुल की नागरिकता का विवाद क्या?
राहुल गांधी की नागरिकता पर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी सवाल उठाते रहे हैं। उन्होंने पहले आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के पास भारत के साथ साथ ब्रिटेन की भी दोहरी नागरिकता है। ऐसा ही आरोप बीजेपी के दूसरे कार्यकर्ता भी लगाते रहे हैं। वे आरोप लगाते रहे हैं कि 2003 में राहुल गांधी ने ब्रिटेन में एक कंपनी में डायरेक्टर के रूप में काम किया था। दावा किया जाता है कि कंपनी के रजिस्ट्रेशन या वार्षिक रिटर्न में उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया था।
कुछ याचिकाओं में दावा किया गया कि ब्रिटेन सरकार से दस्तावेज़ मांगे गए थे और ब्रिटेन ने भारत सरकार को कुछ रिकॉर्ड साझा किए हैं। हालांकि इसकी कभी पुष्टि नहीं हुई। अब तक इस मामले में अदालतों ने बार बार याचिकाएँ खारिज की हैं। 28 जनवरी 2026 में लखनऊ एमपी-एमएलए कोर्ट ने याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया। इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भी पहले ऐसी पीआईएल को पिछले साल यानी 2025 में खारिज किया था।
क्या कहता है क़ानून?
भारतीय कानून के अनुसार कोई व्यक्ति दोहरी नागरिकता नहीं रख सकता। अगर कोई लोकसभा सदस्य विदेशी नागरिक साबित होता है तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। लेकिन अंतिम फैसला जांच और कोर्ट के बाद ही होगा। यह मामला काफी संवेदनशील है, इसलिए हाईकोर्ट ने कुछ सुनवाइयां चैंबर में की थीं।
अभी यह देखना बाकी है कि पुलिस FIR दर्ज करने के बाद जांच कैसे आगे बढ़ती है। अगर आरोप साबित होते हैं तो यह राजनीतिक रूप से बहुत बड़ा मुद्दा बन सकता है। लेकिन अगर आरोप गलत साबित होते हैं तो याचिकाकर्ता पर भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।