कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अब तक सफलता के बड़े-बड़े दावे करती रही सरकार ने पहली बार माना है कि कोरोना से लड़ने में ग़लती हुई होगी।
सवाल है कि 30 जनवरी को भारत में पहला मामला आया था तब से क्या तैयारी नहीं की गई थी? और अब यदि ऐसी तैयारी हो गई है कि लॉकडाउन हटाया जा सकता है तो अस्पतालों की हालत क्यों नहीं सुधरी है और ख़बरें ऐसी क्यों आ रही हैं कि अस्पताल बेड कम पड़ने की बात कहकर मरीज़ों को भर्ती नहीं ले रहे हैं?
लॉकडाउन शुरू होने के बाद से प्रवासी मज़दूरों को जिन दिक्कतों का सामना करना पड़ा और जिस तरह की तसवीरें और वीडियो सामने आए, वे रूह कँपा देने वाले थे। इस पर सरकार की चौतरफ़ा आलोचना होती रही। सरकार की तरफ़ से प्रवासी मज़दूरों पर ज़्यादा बयान नहीं आए। जब मई में श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का फ़ैसला लिया गया तो सरकार की तरफ़ से बयान भी आने शुरू हुए। किराए को लेकर विवाद भी हुआ।