अयोध्या के राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान (चढ़ावे) में हुई हेराफेरी और अनियमितताओं की जांच अब कानूनी कार्रवाई और संपत्तियों की रिकवरी के चरण में पहुंच गई है। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और उत्तर प्रदेश पुलिस की जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शिकायत पर पुलिस ने पिछले हफ्ते ही 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया था। इनके नाम अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, लवकुश मिश्रा, रामाशंकर मिश्रा (रामाशंकर यादव उर्फ 'टिन्नू') और सुभाष श्रीवास्तव हैं।

वाराणसी की सिक्योरिटी एजेंसी का क्या है कनेक्शन

जांच में यह बड़ा खुलासा हुआ है कि गिरफ्तार किए गए 8 आरोपियों में से 6 आरोपी वाराणसी की एक सिक्योरिटी फर्म 'सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज' (Sainik Security Services) के पेरोल पर थे।

  • इस एजेंसी को अयोध्या के नया घाट स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की शाखा ने मंदिर के कैश-काउंटिंग (पैसा गिनने) के काम के लिए हायर किया था।

  • एजेंसी के मालिक और डायरेक्टर गौरव सिंह ने बताया कि उनकी कंपनी का मंदिर ट्रस्ट से कोई सीधा संबंध नहीं था, बल्कि वे एसबीआई के वेंडर थे। स्थानीय एसबीआई ब्रांच ने खुद 19 लोगों के नाम सुझाए थे और उन्हें अपनी कंपनी में शामिल कर 'केयरटेकर' (चपरासी) के रूप में बैंक को सौंपने का दबाव बनाया था। इन कर्मचारियों को करीब ₹20,000 प्रति माह वेतन मिलता था।

  • एसबीआई के अधिकारियों (नाम न छापने की शर्त पर) ने बताया कि ट्रस्ट के कुछ शक्तिशाली सदस्यों ने बैंक पर इन खास लोगों को पैसे गिनने की टीम में रखने का भारी दबाव बनाया था, जिसे बैंक टाल नहीं सका। वो पावरफुल लोग कौन हैं। पुलिस पहले ही चंपत राय और अन्य लोगों से पूछताछ कर चुकी है। ट्रस्ट के किसी भी पदाधिकारी का नाम एफआईआर में नहीं है। आरोपी टिन्नू यादव चंपत राय का ड्राइवर था। 

आरोपियों से अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी क्या है

₹80 लाख कैश बरामद: अभियोजन अधिकारी (Prosecution Officer) केसी वर्मा के अनुसार, गिरफ्तार किए गए 8 में से 7 आरोपियों के पास से अब तक कुल ₹79,85,893 (लगभग 80 लाख रुपये) नकद बरामद किए जा चुके हैं।
सबसे बड़ी रिकवरी: सूत्रों के अनुसार, सबसे ज्यादा रकम आरोपी अविनाश शुक्ला से बरामद हुई है। एफआईआर दर्ज होने से पहले ही, 5 जून को ट्रस्ट ने उसके पास से ₹20 लाख वसूल लिए थे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह उसकी ओर से चुराई गई पूरी रकम थी या कुछ और हिस्सा बाकी है।
₹23 लाख की जमीन: जांच के दौरान पुलिस ने मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के ससुर के मोबाइल फोन को खंगालकर एक बड़ी बेनामी संपत्ति का पता लगाया। लवकुश ने हाल ही में अयोध्या के शहादतगंज इलाके में ₹23 लाख से अधिक की जमीन खरीदी थी।
ऐशो-आराम के सामान पर खर्च: पूछताछ में सामने आया है कि चोरी की गई रकम का एक बड़ा हिस्सा स्मार्टफोन, वाशिंग मशीन और अन्य घरेलू उपकरण जैसे लग्जरी और कंज्यूमर गुड्स खरीदने में उड़ाया गया।
इस पूरे मामले का खुलासा सबसे पहले 7 जून को समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और लोकल मीडिया ने किया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि मंदिर के चढ़ावे से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ की हेराफेरी की गई है। इसके बाद 13 जून को सरकार ने एक हाई-लेवल SIT बनाई जिसने शुरुआती जांच में पाया कि कैश कलेक्शन और काउंटिंग के दौरान सिस्टमैटिक ढंग से पैसा गायब किया जा रहा था।
पुलिस ने फौरन एफआईआर नहीं की। दबाव बढ़ने पर काफी दिनों बाद एफआईआर दर्ज की गई। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं (जैसे आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, चोरी और आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) के तहत मामला दर्ज किया है। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि 7 जून को अगर एफआईआर हो जाती तो सबूत गायब नहीं होते। 5 जून को अविनाश शुक्ला के घर से सबसे ज्यादा कैश रिकवर हुआ, जिसे कूड़े के ढेर में छिपाया गया था। राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय के लोगों ने पुलिस के साथ जाकर यह कैश बरामद किया था। लेकिन जनता से यह बात छिपा ली गई। इसकी जानकारी पिछले हफ्ते निकल कर आई।
जांच अधिकारी अब सभी आरोपियों, उनके परिवारों और रिश्तेदारों के आधार और पैन कार्ड के जरिए वित्तीय कुंडली खंगाल रहे हैं। पुलिस ने जांच का एक खास पैमाना तय किया है: "आरोपियों को नौकरी मिलने के समय से लेकर अब तक की कुल सालाना आय की गणना की जाएगी। इस कुल कमाई का 70% हिस्सा उनके सामान्य जीवन यापन का खर्च (Living Expenses) माना जाएगा और 30% हिस्सा उनके निवेश (Investments) के रूप में देखा जाएगा। यदि उनकी संपत्तियां इस 30% के दायरे से बाहर और बहुत ज्यादा मिलती हैं, तो उसे अवैध कमाई मानकर जब्त किया जाएगा।"

चंपत राय पर खामोशी

पुलिस ने चंपत राय से पूछताछ की है। लेकिन वो आरोपी नहीं हैं। उनका नाम अभी तक एफआईआर में जोड़ा नहीं गया है। आमतौर पर हाईप्रोफाइल क्राइम के मामलों में पुलिस सारी जानकारी लीक करती है। वो सबसे पहले यह खबर देती है कि इस क्राइम का सरगना कौन है। फिर उस सरगना को कैसे पकड़ने की योजना पुलिस बनाती है, मीडिया को सारी जानकारी देती है। अयोध्या राम मंदिर ग़बन मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन 8 आरोपियों को पकड़ा गया है, वे किसके कहने पर कैश और कीमती गोल्ड-सिल्वर के सामान चोरी कर रहे थे। कौन है वो सरगना। राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल में चोरी के लिए इन लोगों से किसने कहा। 
अब तथ्यों पर गौर करिए। ट्रस्ट ने एसबीआई को कैश गिनने की जिम्मेदारी सौंपी। एसबीआई ने वो जिम्मेदारी वाराणसी की एक फर्म को सौंप दी। फर्म के मालिक गौरव सिंह ने अयोध्या के लोगों को इस काम पर रखा। इनमें चंपत राय का ड्राइवर आरोपी टिन्नू यादव भी था। एसबीआई ने ट्रस्ट से कहा कि वो इन 8 आरोपियों को कैश गिनने के काम से हटा दे। आरोप है कि ट्रस्ट ने इनकी सेवाएं खत्म न करने के लिए एसबीआई पर दबाव बनाया और उन्हें हटाया नहीं गया। कौन है वो शख्स जिसने इन आरोपियों को हटाने से रोका। टिन्नू यादव को कैश गिनने के काम का चंपत राय से क्या संबंध है। ये सारे सवाल राम मंदिर ट्रस्ट, पीएम मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ कब देंगे। ट्रस्ट के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा की क्या जवाबदेही है।