अयोध्या राम मंदिर में चोरी की पहली सूचना 7 जून को बाहर आई। लेकिन 5 जून को ही राम मंदिर ट्रस्ट को इसका पता चल गया था। ट्रस्ट ने यह सूचना जनता से छिपा ली। ट्रस्ट और चंपत राय पर शक की सुई तेज़ हो रही है।
चंपत राय (बाएं) पीएम मोदी के साथ
राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गबन के मामले में नए खुलासों ने विवाद को और गहरा कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को इस बड़े घोटाले या चोरी की जानकारी मामले के सार्वजनिक होने से कई दिन पहले ही मिल गई थी। हालांकि, उस समय पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई। पुलिस को कोई सूचना नहीं दी गई।
5 जून को हुई थी कार्रवाई, लेकिन FIR नहीं
सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ट्रस्ट के कुछ लोगों को 5 जून को आरोपी अविनाश शुक्ला के घर भेजा था। तलाशी के दौरान लाखों रुपये का कैश बरामद किया गया। इससे संकेत मिल रहा है कि पुलिस के कुछ अधिकारियों और ट्रस्ट दोनों को मामले की जानकारी पहले से थी। ट्रस्ट के उच्चाधिकारियों यानी चंपत राय आदि के अलावा ट्रस्ट के नज़दीक कुछ पुलिस अधिकारियों के पास थी। लेकिन न तो चंपत राय ने और न ही उन पुलिस अफसरों ने किसी भी तरह की एफआईआर की पहल की। कहा जा रहा है कि अविनाश शुक्ला के घर से रुपये बरामद करने के बाद चंपत राय और बाकी लोग चुप होकर बैठ गए। लेकिन अयोध्या (फैज़ाबाद) शहर में धीरे-धीरे कानोंकान यह खबर फैलने लगी। इसके बाद भाजपा के नज़दीक माने जाने वाले एक हिन्दी अखबार ने राम मंदिर में कैश चोरी और बरामदगी की पहली खबर 7 जून को छापी। इस तरह 5 जून की घटना 7 जून को सार्वजनिक हो गई। हालांकि उस हिन्दी अखबार से ऐसी खबर की उम्मीद नहीं थी। लेकिन वो छपी और राम भक्तों को जबरदस्त धक्का लगा। हालांकि, आरोप है कि अविनाश शुक्ला के घर पर छापा और लाखों की बरामदगी की कार्रवाई किसी दर्ज एफआईआर के आधार पर नहीं, बल्कि अनौपचारिक रूप से की गई थी। इसके बावजूद ट्रस्ट ने तत्काल पुलिस में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई। मामला 7 जून को सार्वजनिक हुआ, जिसके बाद यह पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया और यह सवाल उठने लगे कि यदि 5 जून को ही कार्रवाई हो चुकी थी तो कानूनी प्रक्रिया शुरू करने में देरी क्यों हुई। चंपत राय के लोगों ने जो पैसे बरामद किए वो पैसे क्या ट्रस्ट में जमा कराए गए। क्या राम मंदिर का कर्मचारी अविनाश शुक्ला का लालच बढ़ गया और उसने ज्यादा कैश चोरी किया या फिर अपने हिस्से में ज्यादा पैसा ले लिया। ये तमाम सवाल 5 जून की घटना को लेकर किए जा रहे हैं।
CCTV फुटेज आया सामने
इस बीच घटना से जुड़ा एक कथित 24 सेकंड का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में पुलिसकर्मी आठ आरोपियों में से एक अविनाश शुक्ला को हिरासत में लेकर एक सफेद वाहन की ओर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। फुटेज में उनके हाथ में एक काला बैग भी दिखाई देता है।सूत्रों का दावा है कि इसी बैग में तलाशी के दौरान बरामद की गई नकदी रखी गई थी। हालांकि, CCTV फुटेज और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पुलिस और प्रशासन ने अब तक इस कथित देरी को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है।
SIT को जांच में मिलीं गंभीर खामियां
मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने कथित तौर पर अपनी जांच में राम मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन से जुड़ी कई गंभीर कमियां उजागर की हैं। सूत्रों के अनुसार जांच में पाया गया कि:
- कैश संभालने की व्यवस्था में खामियां थीं।
- कर्मचारियों का पर्याप्त वेरिफिकेशन नहीं किया गया।
- CCTV निगरानी व्यवस्था में भी कई कमियां थीं।
- चढ़ावे का प्रबंधन संभालने वाले स्टेट बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े निजी एजेंसी के कर्मचारियों की नियुक्तियों पर भी सवाल उठे हैं।
- कुछ नियुक्तियों के ट्रस्ट अधिकारियों से जुड़े होने की भी जांच की जा रही है।
- जांच का दायरा अब मंदिर निर्माण से जुड़े भूमि खरीद और खरीद प्रक्रियाओं तक भी बढ़ा दिया गया है।
- SIT अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप चुकी है।
आठों आरोपियों के घरों पर रविवार को छापे पड़े
रविवार को अयोध्या पुलिस ने मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। पुलिस टीमों ने स्थानीय मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लव कुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला और रामाशंकर यादव समेत सभी आरोपियों के घरों की तलाशी ली। दो दिन पहले अदालत ने सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। सोमवार को अदालत में पेशी के दौरान पुलिस उनकी रिमांड की मांग कर सकती है।कैसे सामने आया मामला?
7 जून को हिन्दी अखबार में खबर छपने के बाद समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उसका हवाला देते हुए दावा किया था कि राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों रुपये का हिसाब नहीं है और अदालत से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की थी। इसके बाद मीडिया में इसकी कवरेज शुरू हो गई। 13 जून को मामले में लीपापोती की कोशिश शुरू हो गई। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि वह पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि इटावा के केदारेश्वर धाम में शिव मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद राम मंदिर जाएंगे। उन्होंने सवाल उठाया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लगातार अयोध्या दौरे के बावजूद इतनी बड़ी कथित अनियमितता कैसे नजरअंदाज हो गई। उन्होंने इसे "दीये तले अंधेरा" जैसी स्थिति बताया।
वहीं विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मामले में किसी भी दोषी को बचाया नहीं जाना चाहिए और पूरी पारदर्शिता के साथ जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी चाहते हैं कि पूरा सच सामने आए और दोषियों को जल्द से जल्द कानून के मुताबिक सजा मिले।
आलोक कुमार ने समाजवादी पार्टी पर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने अखिलेश यादव के "सियाराम धाम" बनाने के वादे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उनकी सरकार थी, तब ऐसा कोई प्रयास क्यों नहीं किया गया।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस की अगली कार्रवाई तथा SIT की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी। वहीं, 5 जून की प्रारंभिक कार्रवाई और 7 जून को मामले के सार्वजनिक होने के बीच की समयावधि को लेकर उठे सवालों के जवाब आने बाकी हैं। अयोध्या के पुजारियों के अलावा तमाम भक्त हैरान परेशान हैं।