loader
fb/chrisdavies

बेरोकटोक कश्मीर जाने की माँग की तो न्योता वापस : ब्रिटिश नेता

ब्रिटेन से यूरोपीय संसद के लिए चुने गए सदस्य क्रिस डेविस ने कश्मीर जाने वाली टीम के बारे में रहस्योद्घाटन कर सबको चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि पहले उन्हें भी कश्मीर जाने का न्योता मिला था, वह राजी भी हो गए थे, पर जब उन्होंने कहा कि वह वहाँ सेना या पुलिस के किसी आदमी को साथ लिए बग़ैर जाएँगे तो न्योता वापस ले लिया गया।
उन्होंने इसकी पुष्टि कर दी है। डेविस को वूमन्स इकोनॉमिक एंड सोशल थिंक टैंक (डब्लू एस टी टी यानी वेस्ट) ने न्योता दिया था। उनसे कहा गया था कि वह 28 अक्टूबर को भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिल सकते हैं, कश्मीर जाकर वहाँ की हालत का जायजा ले सकते हैं और 30 अक्टूबर को वहाँ प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं। 
देश से और खबरें
उन्होंने इंडिया टुडे टीवी से मिले एक प्रश्न का ई-मेल से ही जवाब दिया। उन्होंने उस ई-मेल में लिखा : 

मैंने 8 अक्टूबर को वेस्ट से कहा कि मुझे निमंत्रण स्वीकार कर खुशी हो रही है, पर शर्त यह है कि कश्मीर दौरे पर मैं बग़ैर किसी रोकटोक के जहाँ चाहूँ जा सकूँ, जिससे चाहूँ मिल सकूँ, जिससे चाहूँ बात कर सकूँ, मेरे साथ सेना, पुलिस या सुरक्षा बलों का कोई आदमी न हो, लेकिन मेरे साथ पत्रकार हों।


क्रिस डेविस, यूरोपीय संसद सदस्य, इंगलैंड नॉर्थ वेस्ट

उन्होंने यह भी कहा कि उनसे कहा गया था कि इंटरनेशनल इंस्टीच्यूट फॉर नन-अलाइन्ड स्टडीज़  हवाई टिकट और वहाँ ठहरने वगैरह का खर्च उठाएगा। उन्होंने आगे जोड़ा कि इसके बाद 10 अक्टूबर को उनका न्योता वापस ले लिया गया।  

बता दें कि यूरोपीय संघ के 27 सदस्यों का एक दल दिल्ली पहुँचा, भारतीय प्रधानमंत्री से मुलाक़ात की, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने उन्हें कश्मीर की स्थिति की जानकारी दी। अगले दिन 29 अक्टूबर को उन्हें जम्मू-कश्मीर ले जाया गया। 

पर इसके साथ ही इस पूरे दौरे पर ही सवाल लग गया और इसका ज़बरदस्त विरोध शुरू हो गया। 

वे प्रवासी विरोधी, इसलाम विरोधी, कट्टरपंथी, फासिस्ट और नात्सी समर्थक विचारों के लिए जाने जाते हैं। महत्वपूर्ण बात यह भी है कि ये सभी सांसद निजी दौरे पर हैं, वे यूरोपीय संघ या यूरोपीय संसद की ओर से नहीं भेजे गए हैं। इन अलग-अलग देशों की अलग-अलग पार्टियों के 27 नेताओं का एक साथ भारत आना भी कई सवाल खड़े करता है।  
यूरोपीय संसद दरअसल यूरोपीय संघ की विधायिका है, जिसमें हर देश से जनसंख्या के आधार पर सांसद चुने जाते हैं। ये सांसद अपने-अपने देश का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि अपनी-अपनी पार्टियों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उस इलाक़े के लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जहाँ से ये चुने जाते हैं। ये यूरोपीय संघ से जुड़े तमाम नीतिगत फ़ैसले लेते हैं। इन सांसदों को मेम्बर ऑफ़ यूरोपियन पार्लियामेंट यानी एमईपी कहते हैं। 

'सत्य हिन्दी'
की ताक़त बनिए

गोदी मीडिया और विशाल कारपोरेट मीडिया के मुक़ाबले स्वतंत्र पत्रकारिता का साथ दीजिए और उसकी ताक़त बनिए। 'सत्य हिन्दी' की सदस्यता योजना में आपका आर्थिक योगदान ऐसे नाज़ुक समय में स्वतंत्र पत्रकारिता को बहुत मज़बूती देगा। याद रखिए, लोकतंत्र तभी बचेगा, जब सच बचेगा।

नीचे दी गयी विभिन्न सदस्यता योजनाओं में से अपना चुनाव कीजिए। सभी प्रकार की सदस्यता की अवधि एक वर्ष है। सदस्यता का चुनाव करने से पहले कृपया नीचे दिये गये सदस्यता योजना के विवरण और Membership Rules & NormsCancellation & Refund Policy को ध्यान से पढ़ें। आपका भुगतान प्राप्त होने की GST Invoice और सदस्यता-पत्र हम आपको ईमेल से ही भेजेंगे। कृपया अपना नाम व ईमेल सही तरीक़े से लिखें।
सत्य अनुयायी के रूप में आप पाएंगे:
  1. सदस्यता-पत्र
  2. विशेष न्यूज़लेटर: 'सत्य हिन्दी' की चुनिंदा विशेष कवरेज की जानकारी आपको पहले से मिल जायगी। आपकी ईमेल पर समय-समय पर आपको हमारा विशेष न्यूज़लेटर भेजा जायगा, जिसमें 'सत्य हिन्दी' की विशेष कवरेज की जानकारी आपको दी जायेगी, ताकि हमारी कोई ख़ास पेशकश आपसे छूट न जाय।
  3. 'सत्य हिन्दी' के 3 webinars में भाग लेने का मुफ़्त निमंत्रण। सदस्यता तिथि से 90 दिनों के भीतर आप अपनी पसन्द के किसी 3 webinar में भाग लेने के लिए प्राथमिकता से अपना स्थान आरक्षित करा सकेंगे। 'सत्य हिन्दी' सदस्यों को आवंटन के बाद रिक्त बच गये स्थानों के लिए सामान्य पंजीकरण खोला जायगा। *कृपया ध्यान रखें कि वेबिनार के स्थान सीमित हैं और पंजीकरण के बाद यदि किसी कारण से आप वेबिनार में भाग नहीं ले पाये, तो हम उसके एवज़ में आपको अतिरिक्त अवसर नहीं दे पायेंगे।
सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें

अपनी राय बतायें

देश से और खबरें

ताज़ा ख़बरें

सर्वाधिक पढ़ी गयी खबरें