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राजनयिक हटाने के बाद कनाडा ने अपने नागरिकों को क्यों जारी की सलाह?

कनाडा ने भारत से राजनयिकों को हटाने के कुछ घंटे बाद ही भारत में अपने नागरिकों को यात्रा सलाह जारी की है। इसने अपने नागरिकों से आतंकवादी हमलों के ख़तरे के कारण देश भर में उच्च स्तर की सावधानी बरतने को कहा है। 

कनाडा ने चंडीगढ़, बेंगलुरु और मुंबई में वाणिज्य दूतावासों में व्यक्तिगत सेवाएँ भी रोक दीं। इसके कारण कनाडाई यात्रा सलाहकार ने अपने नागरिकों से किसी भी सहायता के मामले में नई दिल्ली में कनाडा के उच्चायोग से संपर्क करने का आग्रह किया है।

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सतर्क रहने के लिए कहने के अलावा कनाडा ने अपने नागरिकों से भारत के कुछ हिस्सों में गैर ज़रूरी या सभी प्रकार की यात्रा से बचने का आग्रह किया है। आधिकारिक बयान के अनुसार, कनाडाई नागरिकों को आतंकवाद और उग्रवाद के खतरे के कारण असम और मणिपुर की गैर-जरूरी यात्रा से बचने के लिए कहा गया है। कनाडाई लोगों को जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के साथ सीमा साझा करने वाले तीन राज्यों की किसी भी प्रकार की यात्रा से बचने के लिए कहा गया है। गुजरात, राजस्थान और पंजाब को लेकर यह सलाह है। हालाँकि, सलाह में वाघा सीमा पार करना शामिल नहीं है।

ताज़ा सलाह राजनयिक विवाद के बीच कनाडा द्वारा भारत से 41 राजनयिकों की वापसी की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद आई है। कनाडा में जून महीने में एक खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या पर विवाद के बाद दोनों देशों के राजनयिक संबंध बिगड़ गए हैं। इसके बाद से दोनों देशों की ओर से तनातनी रही है। 

कनाडा की विदेश मंत्री मेलानी जोली ने कहा कि भारत ने शुक्रवार तक कनाडा के 21 राजनयिकों और उनके परिवारों को छोड़कर बाक़ी सभी के राजनयिक छूट को अनैतिक रूप से रद्द करने की योजना बनाई।
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जोली ने कहा कि इसी वजह से ओटावा को अन्य को बाहर निकालने के लिए मजबूर होना पड़ा। जोली ने कहा, 'हमने भारत से उनके सुरक्षित निकलने की सुविधा दी है। इसका मतलब है कि हमारे राजनयिक और उनके परिवार अब चले गए हैं।'

बता दें कि पिछले महीने कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने सार्वजनिक रूप से भारतीय खुफिया एजेंसी के लोगों को खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से जोड़ा था। इसके बाद से कनाडा लगातार आरोप लगा रहा है कि इस मामले में निज्जर की हत्या में कथित तौर पर भारतीय एजेंटों का हाथ रहा है और इस पर भारत ने प्रतिक्रिया नहीं दी। 

कनाडा के आरोपों को भारत ने खारिज कर दिया था। पिछले महीने ही भारत के विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि कनाडा की छवि आतंकवादियों की सुरक्षित पनाहगाह वाली बन रही है।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद और उग्रवाद का ज़िक्र कर संकेतों में ही कनाडा मामले में तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राजनीतिक सुविधा के हिसाब से आतंकवाद या उग्रवाद के प्रति किसी देश की प्रतिक्रिया नहीं हो सकती है। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने का आह्वान किया।

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क़मर वहीद नक़वी
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