कांग्रेस ने पीएम नरेंद्र मोदी के इसराइल दौरे, एपस्टीन फाइल्स, मोसाद, अनिल अंबानी और हरदीप पुरी का हवाला देते हुए बड़े सवाल उठाए हैं। आख़िर इन आरोपों के पीछे उन्होंने क्या तर्क दिए हैं?
कांग्रेस का पीएम मोदी की इसराइल यात्रा पर निशाना।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसराइल यात्रा के लिए उड़े और कांग्रेस इधर दिल्ली में एपस्टीन फाइल खोलकर बैठ गई। तो क्या पीएम के इसराइल दौरे का कुछ एपस्टीन कनेक्शन है? या फिर पिछले 2017 के उनके दौरे का कोई कनेक्शन था? कांग्रेस ने बुधवार को ऐसे ही बड़े आरोप लगाए हैं। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने पीएम मोदी, एपस्टीन फाइल्स, खुफिया एजेंसी मोसाद, अनिल अंबानी और केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी की पूरी क्रोनोलॉजी बताई है।
तो कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इसराइल यात्रा पर कांग्रेस ने बड़ा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि इस यात्रा के पीछे अमेरिका-इसराइल की एक लॉबी है, जिसमें मशहूर यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन का नाम जुड़ा हुआ है। कांग्रेस के प्रवक्ता पवन खेड़ा ने दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और 'क्रोनोलॉजी' समझाते हुए कहा कि मोदी सरकार की विदेश नीति एपस्टीन जैसे लोगों के हाथों में खेल रही है। उन्होंने दावा किया कि यह सब भारत की पुरानी विदेश नीति को बदलने का नतीजा है, जो फिलिस्तीन और इसराइल के बीच 'दो राष्ट्र' सिद्धांत पर आधारित थी।
पीएम की पहली इसराइल यात्रा
पवन खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी पहली बार 2017 में इसराइल गए थे। लेकिन सवाल यह है कि वे खुद गए, भेजे गए या भिजवाए गए? उन्होंने मौजूदा माहौल का ज़िक्र करते हुए कहा कि अमेरिका कभी भी ईरान पर हमला कर सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि मोदी सरकार पहले ही धमकियों से डरकर ईरान और रूस से तेल खरीदना बंद कर चुकी है। अब ऐसे समय में पीएम मोदी इसराइल की तरफ बढ़ रहे हैं, जो भारत के हितों के ख़िलाफ़ है।
एपस्टीन का मोदी सरकार से कनेक्शन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पवन खेड़ा ने जेफ्री एपस्टीन को मोदी सरकार की विदेश नीति का 'नायक' बताया। उन्होंने कहा, 'एपस्टीन मरने के बाद भी मोदी सरकार के फ़ैसलों में जिंदा है। कहना गलत नहीं कि एपस्टीन नरेंद्र मोदी की विचारधारा है।' खेड़ा ने एक पुरानी बात का जिक्र किया, जहां 'मोदी ने कहा था कि उन्होंने बचपन में रोबोट बनाया था'। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'ट्रंप, नेतन्याहू और एपस्टीन भी यही कहते हैं कि उन्होंने एक रोबोट बनाया है, जिसका नाम नरेंद्र मोदी है और वो भारत का पीएम है।'खेड़ा ने ईमेल, मीटिंग्स की क्रोनोलॉजी बताई
- 4 जनवरी 2017: हरदीप सिंह पुरी ने एपस्टीन को ईमेल भेजा और मिलने की बात की। 6 जनवरी को मीटिंग तय हुई।
- इसके बाद एपस्टीन ने एक अन्य व्यक्ति दीपक चोपड़ा से अनिल अंबानी के बारे में पूछा। 21 फरवरी 2017 को एपस्टीन और अनिल अंबानी की मुलाकात हुई।
- सवाल उठाया गया कि एपस्टीन अनिल अंबानी को क्यों ढूंढ रहा था? किसके इशारे पर?
- 23 फरवरी 2017: एपस्टीन ने अनिल अंबानी का परिचय इसराइल के पूर्व पीएम एहुद बराक से करवाया।
- 2 मार्च 2017: अनिल अंबानी ने एपस्टीन से व्हाइट हाउस के साथ भारत के रक्षा मामलों पर सलाह मांगी। एपस्टीन ने पूछा, "बदले में क्या दोगे?" अंबानी ने जवाब दिया, "भारत का पूरा बाजार।" फिर एपस्टीन ने कहा कि वो अंदर की खबर लाकर देंगे।
- इसके बाद एपस्टीन ने एहुद बराक से भारत की अमेरिकी रक्षा मामलों में भूमिका पूछी, क्योंकि उसे अंबानी को रिपोर्ट करना था।
मोदी की अमेरिका-इसराइल यात्रा
खेड़ा ने बताया कि 15-18 मई 2017 में फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास भारत आए थे। यह बात अमेरिका, एपस्टीन, नेतन्याहू और एहुद बराक को पसंद नहीं आई। उन्होंने हरदीप पुरी से नाराजगी जताई। इसके बाद 25-26 जून 2017 को मोदी अमेरिका गए और 4-6 जुलाई 2017 को इसराइल पहुंचे।
खेड़ा ने एक ईमेल का जिक्र किया- 6 जुलाई 2017 को एपस्टीन ने कतर के बिजनेसमैन जाबोर वाई को लिखा, "भारतीय पीएम मोदी ने सलाह ली और अमेरिकी राष्ट्रपति के फायदे के लिए इसराइल में नाच-गाना किया। वे कुछ हफ्ते पहले मिले थे। यह काम कर गया!"
पवन खेड़ा ने कहा कि जब 'रोबोट पीएम' का कंट्रोल गलत हाथों में होगा, तो सही विदेश नीति कैसे बनेगी?
एपस्टीन का जासूसी कनेक्शन
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि 2014-2017 के बीच हरदीप पुरी एपस्टीन से मिलते थे। उस समय एहुद बराक का साथी योनी कोरेन मोसाद का एजेंट था और उसी अपार्टमेंट में रहता था। उन्होंने कहा, 'एफबीआई ने कहा है कि एपस्टीन एक जासूस था, जिसकी ट्रेनिंग एहुद बराक के अंडर हुई। यह बहुत डराने वाली बात है कि भारत सरकार किन लोगों के हाथों में है।'
भारत-इसराइल डिफेंस डील्स का ज़िक्र
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि 2020-2024 में भारत के इसराइल से डिफेंस एक्सपोर्ट 34% हुए। भारत इसराइल के रक्षा बाजार का सबसे बड़ा ग्राहक बना। यह सब एपस्टीन के घर पर हुई मीटिंग्स का नतीजा है, जहां हरदीप पुरी और एहुद बराक शामिल थे। उन्होंने कहा कि भारत के टैक्सपेयर्स का पैसा एपस्टीन तय कर रहा था।खेड़ा ने दी कुछ प्रमुख डील्स की लिस्ट
- अप्रैल 2017: 2 बिलियन डॉलर का मिसाइल सिस्टम एग्रीमेंट।
- 2017: 770 मिलियन डॉलर की नेवल एलआर-एसएएम प्रोक्योरमेंट डील।
- 2017: पेगासस कांड, जहां न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया कि पेगासस स्पायवेयर और मिसाइल सिस्टम 2 बिलियन डॉलर के इंडिया-इसराइल डिफेंस पैकेज के मुख्य हिस्से थे।
- 2018: अडानी-एल्बिट सिस्टम्स का जॉइंट वेंचर, जिसमें ड्रोन बनाने की फैक्ट्री भारत में लगी– इसराइल से बाहर पहली फैक्ट्री।
- मार्च 2020: नेगेव लाइट मशीन गन्स के लिए 880 करोड़ रुपये की डील।
- 2022: हाइफा पोर्ट को अडानी ने एक्वायर किया।
- 2023: ड्रोन प्रोडक्शन एक्सपैंशन की डील।
- 2023: अथर्वा एडवांस्ड सिस्टम्स।
- 2024: डिफेंस सप्लाई चेन इंटीग्रेशन।
- 2025: एंटी-सबमरीन वारफेयर कोलैबोरेशन।
- फरवरी 2026: ऑटोनॉमस गार्ड की एंट्री।
पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि ये सब एपस्टीन ने तय किया, जिसमें हरदीप पुरी और अनिल अंबानी की मदद ली गई।
स्टीव बैनन से बातचीत
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने एपस्टीन और ट्रंप के क़रीबी स्टीव बैनन की बातचीत का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा- एपस्टीन ने बैनन से कहा, 'मोदी के साथ मीटिंग अच्छी रही। उनका आदमी कह रहा है कि वाशिंगटन में कोई बात नहीं करता। दुश्मन चीन और पाकिस्तान हैं। हम 2022 में जी20 होस्ट करेंगे।' बैनन ने जवाब दिया कि वो भारत पर एक घंटे का शो करेंगे, जिसमें हिंदुओं को जोड़ेंगे। एपस्टीन ने कहा, 'आपको मोदी से मिलना चाहिए, मैं फिक्स कर सकता हूं।'
कांग्रेस ने कहा है कि देश इस सच्चाई को छिपाने के लिए बड़ा नुक़सान उठा रहा है और हेडलाइंस बदलने का काम हो रहा है। कांग्रेस की यह प्रेस कॉन्फ्रेंस पीएम मोदी की इसराइल यात्रा शुरू होते ही हुई। सरकार की तरफ से अभी कोई जवाब नहीं आया है। राजनीतिक हलकों में इस पर बहस छिड़ गई है कि क्या ये आरोप सही हैं या सिर्फ विपक्ष की रणनीति।