जंतर मंतर पर ई20 पेट्रोल के खिलाफ रविवार को पहला विरोध प्रदर्शन हुआ। कार मालिकों ने दावा किया कि ई20 पेट्रोल से उनकी गाड़ियों की माइलेज काफी घट गई है और फ्यूल सिस्टम में बार-बार समस्या आ रही है।

सोशल मीडिया पर लंबे समय से चल रही शिकायतें अब सड़क पर उतर आई हैं। 'हमारी गाड़ी, हमारा अधिकार' इस प्रदर्शन का आयोजन टीवी व्यक्तित्व और उद्यमी तहसीन पूनावाला तथा उनकी पहल टीम भारत द्वारा किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार की आक्रामक एथनॉल ब्लेंडिंग नीति का विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उनकी कारें अचानक बंद हो जाती हैं, माइलेज में भारी गिरावट आई है, फ्यूल फिल्टर क्लॉग हो जाते हैं और महंगे रिपेयर का खर्च उठाना पड़ रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है।
 
ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि विस्तृत परीक्षणों में ई20 पेट्रोल से गाड़ियों को कोई नुकसान होने का सबूत नहीं मिला है। प्रदर्शन में शामिल कई लोगों ने साफ़ किया कि यह विरोध किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारियों ने खुद को बीजेपी समर्थक बताते हुए कहा कि वे नीति के क्रियान्वयन के तरीके से असहमत हैं, खासकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा समर्थित इस कार्यक्रम के तेजी से लागू किए जाने से।
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प्रदर्शन से ठीक पहले आयोजकों ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की मौखिक अनुमति तो दे दी है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की संख्या को केवल 200 तक सीमित रखने की अजीब शर्त रखी है। पूनावाला ने साफ चेतावनी दी थी कि पुलिस की पाबंदियों के बावजूद यह प्रदर्शन हर हाल में होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुलिस ने कोई "अजीब हरकत" की या प्रदर्शन को जबरन रोकने की कोशिश की, तो वे केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के आवास के बाहर धरने पर बैठ जाएंगे।

ऑटो एक्सपर्ट्स की प्रेस कॉन्फ्रेंस एक ढोंग

शनिवार को ऑटोमोबाइल और ऊर्जा विशेषज्ञों द्वारा सरकार की E20 नीति के समर्थन में की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस पर भी पूनावाला ने तीखा हमला बोला। उन्होंने इसे पूरी तरह से एक "ढोंग" (Sham) करार दिया और कहा कि वे रविवार को अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसका पर्दाफाश करेंगे।

पूर्व ईआईएल (EIL) सीएमडी वर्तिका शुक्ला के 'वन नेशन, वन फ्यूल' वाले बयान पर सवाल उठाते हुए पूनावाला ने कहा:

"प्रेस ब्रीफिंग में मारुति के कार्यकारी ने दावा किया कि E10 गाड़ियां भी E20 पेट्रोल के अनुकूल हैं। मेरा सवाल यह है कि अगर गाड़ियां इसके अनुकूल हैं, तो कंपनियों के इंस्ट्रक्शन मैनुअल (गाड़ी की किताबों) में इसके विपरीत क्यों लिखा गया है? हम रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस ढोंग की असलियत सामने लाएंगे।"

इथेनॉल पर 'टीम भारत' की मांग क्या है

प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मुख्य सदस्यों ने साफ किया है कि वे इथेनॉल मिश्रण नीति के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि इसे लागू करने के तरीके और उपभोक्ताओं से उनका विकल्प छीने जाने के खिलाफ हैं।

दिनेश तांतिया (सदस्य, टीम भारत): "हमारी मांग फ्यूल कम्पैटिबिलिटी (ईंधन अनुकूलता) को लेकर है। गाड़ी मालिक को वही ईंधन चुनने का अधिकार होना चाहिए जो उसकी गाड़ी के अनुकूल हो। सरकार ब्राजील और अमेरिका का उदाहरण देती है, लेकिन वहां ग्राहकों के पास विकल्प होते हैं। भारत में भी पहले जरूरी इकोसिस्टम बनाया जाए, तब तक नागरिकों को सामान्य पेट्रोल खरीदने का विकल्प मिलना चाहिए।"

रतन ढिल्लों (ऑटोमोबाइल विशेषज्ञ और सदस्य): उन्होंने गाड़ियों को होने वाले नुकसान पर चिंता जताते हुए कहा, "गाड़ी मालिक 10 से 15 साल का टैक्स एडवांस में देते हैं। क्या भारत सरकार गारंटी देगी कि अगर इथेनॉल मिश्रित ईंधन से हमारे वाहनों को नुकसान हुआ, तो उसकी जिम्मेदारी सरकार लेगी? इस नीति के पीछे के शोध से जुड़े सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाने चाहिए।"

ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री और विशेषज्ञों का पक्ष

दूसरी तरफ, शनिवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ ऑटोमोबाइल और ऊर्जा विशेषज्ञों के एक पैनल ने केंद्र सरकार की इस नीति का पुरजोर बचाव किया था। इस पैनल में वर्तिका शुक्ला, आईओसी (IOC) के पूर्व चेयरमैन बी. अशोक, और मारुति सुजुकी, टोयोटा किर्लोस्कर, हुंडई, टीवीएस, हीरो मोटोकॉर्प और बजाज ऑटो के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

विशेषज्ञों का कहना है कि सालों के वैज्ञानिक परीक्षण के बाद ही इसे रोलआउट किया गया है। भारत ने दिसंबर 2025 में ही अपना E20 लक्ष्य हासिल कर लिया था। यह नीति कार्बन उत्सर्जन कम करने और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है।

वर्तिका शुक्ला ने माना कि इंजन के परफॉर्मेंस में मामूली (marginal) गिरावट आ सकती है, लेकिन यह ड्राइविंग की आदतों जैसे कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।
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मारुति सुजुकी के वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारी राहुल भारती ने स्वीकार किया कि चिंताएं मुख्य रूप से 2023 से पहले बने वाहनों को लेकर हैं, लेकिन कंपनी को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे लगे कि E20 ईंधन से गाड़ियों को कोई नुकसान पहुंच रहा है।

पूर्व आईओसी चेयरमैन बी. अशोक ने कहा कि इस नीति से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत हुई है और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी हुई है।

सरकार और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री जहां इस नीति को पूरी तरह सुरक्षित और वैज्ञानिक बता रही है, वहीं आज जंतर-मंतर पर होने वाला यह प्रदर्शन तय करेगा कि गाड़ियों के नुकसान को लेकर आम जनता की चिंताएं कितनी बड़ी हैं।