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दिशा रवि की याचिका पर 3 न्यूज़ चैनलों को हाई कोर्ट का नोटिस

टूलकिट मामले में गिरफ़्तार की गई दिशा रवि की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने इंडिया टुडे, टाइम्स नाउ और न्यूज़ 18 चैनलों को नोटिस दिया है। दिशा ने कथित तौर पर उनकी निजी बातचीत को प्रसारित करने के लिए चैनलों के ख़िलाफ़ केबल टीवी नेटवर्क के नियमों को तोड़ने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की माँग की है। याचिका में पुलिस पर आरोप लगाया गया है कि पुलिस उनकी निजी वाट्सऐप चैट सहित जाँच की सामग्री को मीडिया में लीक कर रही है। याचिका में कोर्ट से आग्रह किया गया कि वह पुलिस को इस मामले में निर्देश दे। हालाँकि, सरकार ने किसी भी सामग्री को लीक करने से इनकार किया है। अदालत ने टेलीविजन चैनलों को नोटिस जारी करते हुए कहा है कि वह कल इस मामले को उठाएगी।

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दिशा रवि को पिछले रविवार को ही गिरफ़्तार किया गया है और दिल्ली की एक अदालत में पेश किए जाने पर उन्हें पाँच दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया गया। दिशा पर आरोप है कि उन्होंने इस टूलकिट को तैयार करने और इसे सोशल मीडिया पर आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। दिशा पर राजद्रोह, आपराधिक साज़िश रचने सहित कई गंभीर मुक़दमे दर्ज किए गए हैं। दिल्ली पुलिस ने आरोप लगाया है कि दिशा ने एक वॉट्सऐप ग्रुप भी बनाया था और इस टूलकिट को बनाने में सहयोग किया था।
पुलिस ने आरोप लगाया कि भारत की छवि विश्व स्तर पर धूमिल करने के उद्देश्य से टूलकिट बनाई थी। इसे पर्यावरण पर काम करने वाली स्वीडन की कार्यकर्ता ग्रेटा तनबर्ग (थनबर्ग) ने कुछ सप्ताह पहले शेयर भी किया था जिसे बाद में उन्होंने हटा लिया था। 
इसके बाद से ही कुछ मीडिया वाट्सऐप मैसेज और जाँच की लीक हुई सामग्री के आधार पर दिशा रवि के मामले में रिपोर्टिंग कर रहे हैं। इसी को लेकर वह कोर्ट पहुँचीं।

कोर्ट में दिशा रवि ने कहा, 'मीडिया के लिए जाँच सामग्री का लीक करना ग़ैरक़ानूनी है, निजता और सम्मान के अधिकार का उल्लंघन है, और निर्दोषता की धारणा को ख़त्म करते हुए निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार के प्रति पक्षपात करता है। इस प्रकार दिल्ली पुलिस की कार्रवाई भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करती है।'

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इसके लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एक अहम फ़ैसले का ज़िक्र किया। उन्होंने केएस पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की नौ-न्यायाधीशों की पीठ का हवाला दिया। इस पीठ ने मान्यता दी थी कि एक फ़ोन पर बातचीत एक अंतरंग और गोपनीय प्रकृति की है, और अनुच्छेद 21 के तहत किसी व्यक्ति के गोपनीयता के मौलिक अधिकार के तहत संरक्षित किए जाने का हकदार है।'
वीडियो में देखिए, दिशा रवि का क़सूर क्या है?

उन्होंने यह भी कहा, 'माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ में मान्यता दी है... कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रतिष्ठा का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।'

दिशा रवि की याचिका का जवाब देते हुए और दिल्ली पुलिस और सूचना और प्रसारण मंत्रालय की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उनकी याचिका 'मीडिया का ध्यान आकर्षित करने के लिए' है। उन्होंने आश्वासन दिया कि वह पुलिस की तरफ़ से कोई लीक नहीं होने की बात कहते हुए एक हलफनामा दायर करेंगे।

दिशा रवि की गिरफ़्तारी के बाद विपक्षी नेताओं ने सरकार की आलोचना की है। उनके साथ ही पर्यावरण के लिए काम करने वाले लोग और नागरिक संगठनों से जुड़े लोग भी दिशा के समर्थन में आ गए हैं।

इस मामले में दिशा रवि ने भी अदालत को बताया है कि उन्होंने इस टूलकिट को नहीं बनाया है और वह सिर्फ़ किसानों का समर्थन करना चाहती हैं। दिशा के मुताबिक़, 3 फ़रवरी को उन्होंने इस टूलकिट की दो लाइनों को एडिट किया था। 3 फ़रवरी को ग्रेटा तनबर्ग ने किसानों के समर्थन में एक टूलकिट को शेयर किया था। लेकिन बाद में उन्होंने इसे डिलीट कर अपडेटेड टूलकिट को ट्वीट किया था।

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