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डोभाल के शोपियाँ वाले वीडियो पर बवाल, क्या सब कुछ ठीक नहीं?

शोपियाँ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के सड़क पर कश्मीरियों के साथ बातचीत और उनके साथ खाना खाने वाले वीडियो पर ग़ुलाम नबी आज़ाद के बयान के बाद विवाद हो गया है। आज़ाद ने तंज कसा कि ‘पैसे देकर आप किसी को भी साथ ले सकते हो’। इस बयान के बाद बीजेपी की ओर से तीखी प्रतिक्रियाएँ आईं। अनुच्छेद 370 में फेरबदल के बाद से बनी परिस्थितियों में यह सामान्य बात नहीं है। अजीत डोभाल स्थिति का जायज़ा लेने कश्मीर गए हैं। उसी दौरान का उनके कश्मीरियों के साथ वाला यह वीडियो जारी किया गया है। बताया जा रहा है कि इसके माध्यम से डोभाल ने सड़क पर लोगों के साथ खाना खाकर देश-दुनिया को संदेश देने की कोशिश की कि यहाँ सबकुछ ठीक है और स्थिति सामान्य है। समझा जाता है कि इसी को लेकर कांग्रेस नेता आज़ाद ने यह टिप्पणी कर दी जिस पर हंगामा मचा हुआ है।

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जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जे को समाप्त करने के केंद्र सरकार के फ़ैसले के बाद वहाँ बनी स्थिति के मद्देनज़र ग़ुलाम नबी आज़ाद फ़्लाइट से श्रीनगर जाने वाले थे। हालाँकि उन्हें जाने नहीं दिया गया। इसी दौरान उन्होंने डोभाल पर यह बयान दे दिया। इसके बाद बीजेपी ने आज़ाद पर निशाना साधा और कहा कि वह ‘पाकिस्तान के लोगों’ की तरह बोल रहे हैं। एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा, ‘ग़ुलाम नबी आज़ाद की टिप्पणी दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ... जब एनएसए राज्य का दौरा करता है और इलाक़े के लोगों के साथ बैठक करता है और खाता है, तो कांग्रेस कहती है कि हमने उन्हें पैसे दिए हैं। ऐसे आरोप तो पाकिस्तान के लोग लगाते हैं। इस बयान का इस्तेमाल पाकिस्तान द्वारा वैश्विक मंचों पर किया जाएगा। उन्हें तुरंत माफ़ी माँगनी चाहिए।’

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डोभाल के शोपियाँ दौरे के मायने क्या हैं? व्यापक रूप से प्रचारित वीडियो में डोभाल को शोपियाँ में फुटपाथ पर कश्मीरियों के साथ भोजन करते देखा गया था। इस वीडियो में डोभाल लोगों से कह रहे हैं, ‘अल्लाह जो करता है, अच्छे के लिए करता है। अच्छे लोगों की प्रार्थना में शक्ति होती है। हम आपको भरोसा देते हैं कि हम आपकी सुरक्षा का ध्यान रखेंगे।’ 

बता दें शोपियाँ ज़िला सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है। शोपियाँ आतंकवाद से सबसे ज़्यादा प्रभावित रहा है और आए दिन कोई न कोई घटना सामने आती रही है। वुरहान वानी से जुड़ी घटना यहीं हुई थी। वानी की मौत के बाद इस ज़िले में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन भड़के थे। ऐसे में यह राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार का यह दौरा सामान्य तो नहीं कहा जा सकता है। 

इस वीडियो से यह जताने की कोशिश की गई कि पिछले कुछ दिनों में अभूतपूर्व सुरक्षा और प्रतिबंध देखने वाले जम्मू-कश्मीर में सामान्य स्थिति लौट रही है। लेकिन क्या वाक़ई इतनी सामान्य स्थिति है?

ताबड़तोड़ बैठकें क्यों हो रही हैं?

फ़िलहाल जम्मू-कश्मीर की स्थिति कितनी गंभीर है इसका अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि एक के बाद एक मंत्रियों और उच्चाधिकारियों की बैठकों का दौर चल रहा है। ख़ुद प्रधानमंत्री मोदी इस मसले पर राष्ट्र को संबोधित करेंगे। डोभाल की यात्रा से पहले मंगलवार को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भी सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। इससे पहले सोमवार को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर लगभग एक घंटे तक सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक चली थी जिसमें जम्मू कश्मीर के अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की गई। उच्चस्तरीय बैठक में प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे।

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भारी तादाद में जवान तैनात क्यों?

केंद्र सरकार ने हाल ही में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 में फेरबदल किया है और राज्य को दो भागों में बाँट दिया है। लद्दाख और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश बनाये गये हैं। हालाँकि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा भी होगी। सरकार के इस फ़ैसले का कई विपक्षी पार्टियों ने विरोध भी किया। इसका विरोध करने वाली पार्टियों में कांग्रेस भी शामिल थी। कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने इस फ़ैसले पर कहा था कि केंद्र सरकार ने संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर देश के सिर के टुकड़े कर दिए हैं। 

इन घटनाक्रमों के बाद से कश्मीर घाटी में संचार साधनों पर रोक लगी है और वह देश के बाक़ी हिस्से से कटी हुई है। वहाँ सुरक्षाबलों का सख़्त पहरा है। भारी तादाद में जवानों की तैनाती कई दिनों पहले ही कर दी गई थी। ऐसे में स्थिति कितनी सामान्य हो सकती है, इसकी कल्पना ही की जा सकती है।

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