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सरकार पर आईएमए का तीखा हमला, कहा कोरोना से मरे 382 डॉक्टर, माँगा 'शहीद' का दर्जा

कोरोना से लड़ने वाले डॉक्टरों के लिए ताली बजाने, दीए-मोमबत्तियाँ जलाने और हवाई जहाज़ से अस्पतालों पर फूल बरसाने वाली नरेंद्र मोदी सरकार ने इन डॉक्टरों के लिए क्या किया है, यह डॉक्टरों के संगठन के बयान से साफ हो जाता है। 
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने एक बयान में केंद्र सरकार और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्द्धन पर तीखा हमला बोला है। उसने केंद्रीय सरकार पर डॉक्टरों के प्रति 'असंवेदशील' होने, 'अपनी ज़िम्मेदारी का निर्वाह नहीं करने' और 'नायकों का परित्याग करने' के आरोप लगाए हैं।
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382 डॉक्टर 'शहीद'

उसने यह भी कहा है कि सरकार को महामारी क़ानून 1897 और डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू करना कोई नैतिक अधिकार नहीं है। 
डॉक्टरों की इस शीर्ष संस्था ने दावा किया है कि कोरोना से लड़ते हुए 382 डॉक्टर मारे गए हैं, जिनमें सबसे कम उम्र का 27 साल का और सबसे अधिक उम्र का 85 साल का था। आईएमए ने कहा है कि 

'स्वास्थ्य मंत्री ने एक बार भी यह स्वीकार नहीं किया है कि कोरोना से लड़ते हुए डॉक्टर मारे गए हैं। बयान में कहा गया है, डॉक्टरों की मौत के बारे में देश को बताना ज़रूरी नहीं समझा गया। ऐसा लगता है मानो उनकी मौत से कोई फर्क नहीं पड़ता है। किसी भी देश में कोरोना से इतने डॉक्टर नहीं मरे हैं।'


आईएमए के बयान का हिस्सा

संवेदनहीन केंद्रीय मंत्री

आईएमए ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे को भी आड़े हाथों लिया। चौबे ने कहा था कि केंद्र सरकार के पास डॉक्टरों की मौत का कोई आँकड़ा नहीं है क्योंकि यह राज्यों का विषय है, स्वास्थ्य सेवा व अस्पताल राज्य के अधीन होते हैं।
आईएमए ने कहा, 'यह अपनी ज़िम्मेदारियों का परित्याग करना है और उन नायकों को छोड़ देना है जो जनता के साथ खड़े थे। यह विचित्र बात है कि सरकार ने भेदभावपूर्ण स्वास्थ्य बीमा स्कीम चालू की और जिनके लोग मारे गए, उन्हें स्थितियों से जूझने के लिए अकेला छोड़ दिया।' 
आईएमए ने कहा कि यह दोमुंहापन है कि इन डॉक्टरों को 'कोरोना योद्धा' कहा जाता है, लेकिन उन्हें 'शहीद' का दर्जा नहीं दिया जाता है और उसकी सुविधाएं उनके परिजनों को नहीं मिलती हैं।

शहीद का दर्जा

आईएमए ने मांग की है कि कोरोना का इलाज कर रहे डॉक्टरों की मौत पर उन्हें शहीद का दर्ज दिया जाए और उनके घरवालों को वैसी ही सुविधाएं दी जाएं।
सरकार ने सभी स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए 50 लाख का बीमा करवाया है, पर उन्हें शहीद का दर्जा देने पर चुप है। इसके उलट यह कह कर उसने लोगों को और भड़का दिया कि यह राज्यों का मामला है। ऐसा कह कर केंद्र सरकार ने यह कहने की कोशिश की चूंकि यह मामला राज्यों का है, वे जाने, केंद्र को इससे मतलब नहीं। 
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