ईरानी शिप को अमेरिका ने जिस तरह अपनी पनडुब्बी से तारपीडो कर डुबोया है, भारत में तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। भारत के जाने-माने रक्षा और विदेशी मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने कहा कि भारत के समुद्री पड़ोस में ईरानी फ्रिगेट IRIS Dena को अमेरिकी तारपीडो से डुबोना सिर्फ एक सैन्य घटना नहीं है। यह भारत के लिए रणनीतिक असहजता का कारण बन गया है। यह जहाज़ अभी-अभी भारत के प्रमुख नौसैनिक अभ्यास MILAN-2026 में भाग लेकर लौटा था, जहां भारतीय नौसेना के कूटनीतिक अतिथि के रूप में वह 18 अन्य विदेशी युद्धपोतों के साथ शामिल हुआ था।
भारत द्वारा आयोजित बहुपक्षीय अभ्यास से लौट रहे जहाज़ को निशाना बनाकर वॉशिंगटन ने वस्तुतः भारत के समुद्री पड़ोस को युद्धक्षेत्र में बदल दिया है। इससे भारत के अपने ही क्षेत्र में उसकी प्रभाव क्षमता और नियंत्रण को लेकर असहज सवाल खड़े होते हैं।
ब्रह्म चेलानी कहते हैं- कूटनीतिक नजरिए से देखें तो यह हमला नौसैनिक मेहमाननवाज़ी के अलिखित नियमों के खिलाफ माना जाता है। किसी मेजबान देश के जलक्षेत्र से निकलते ही उसके अतिथि जहाज़ पर हमला करना आम तौर पर उस मेजबान के प्रति असम्मान के रूप में देखा जाता है। भाग लेने वाली नौसेनाओं के लिए संदेश साफ है: भारत के अभ्यासों में शामिल होना, वहां से लौटते समय सुरक्षा की गारंटी नहीं देता।

मोदी की महासागर परिकल्पना का क्या होगा

चेलानी ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महासागर परिकल्पना, जिसके तहत भारत को हिंद महासागर का “preferred security partner” बनाया जाना है, इस विचार पर टिकी है कि नई दिल्ली क्षेत्रीय सहयोग को संगठित कर सकती है और स्थिरता बनाए रख सकती है। अमेरिकी हमले ने इस छवि को झटका दिया है, क्योंकि इससे यह प्रदर्शित हुआ कि कोई दूरस्थ शक्ति भारत के समुद्री पड़ोस में बिना समन्वय के घातक बल प्रयोग कर सकती है।
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स्थिति और गंभीर इसलिए मानी जा रही है क्योंकि हमला श्रीलंका के पास, भारत की समुद्री सीमा के ठीक दक्षिण में हुआ,  वही क्षेत्र जिसे भारत पश्चिम एशियाई युद्धों से अलग-थलग रखना चाहता है। इसके बजाय हिंद महासागर अचानक उस संघर्ष का विस्तार जैसा दिखने लगा है।
नतीजा एक चुभता हुआ विरोधाभास है: वॉशिंगटन इस तारपीडो हमले को दुश्मन जहाज़ के खिलाफ वैध युद्ध कार्रवाई मान सकता है, लेकिन नई दिल्ली के नजरिए से यह एक अमित्र कदम प्रतीत होता है। जिसने भारत की कूटनीति, उसकी समन्वय क्षमता और क्षेत्रीय समुद्री नेतृत्व के दावे को कमजोर किया है।

एक ही तारपीडो हमले ने अमेरिकी हार्ड पावर के जरिए भारत की सावधानी से बनाई गई सॉफ्ट पावर की छवि में छेद कर दिया है।

भारत के पूर्व विदेश सचिव का बयान

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने एक्स पर इस घटा को लेकर महत्वपूर्ण बातें रखी हैं। कंवल सिब्बल ने लिखा हैः अगर हमने मिलान अभ्यास में भाग लेने के लिए ईरानी जहाज को आमंत्रित न किया होता, तो वह वहां नहीं होता। हम मेजबान थे। मुझे बताया गया है कि इस अभ्यास के प्रोटोकॉल के अनुसार जहाज कोई गोला-बारूद नहीं ले जा सकते। वह निहत्था था। ईरानी नौसेना कर्मियों ने हमारे राष्ट्रपति के सामने परेड की थी।


अमेरिका का सुनियोजित हमला

पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने लिखा है- अमेरिकी पनडुब्बी द्वारा किया गया हमला सुनियोजित था क्योंकि अमेरिका को अभ्यास में ईरानी जहाज की उपस्थिति की जानकारी थी। जिसमें अमेरिकी नौसेना को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन अंतिम समय में उसने भागीदारी से नाम वापस ले लिया, संभवतः इसी ऑपरेशन को ध्यान में रखते हुए। अमेरिका ने भारत की संवेदनशीलता को नजरअंदाज किया है क्योंकि जहाज भारत के निमंत्रण के कारण इन जलक्षेत्रों में था। हम अमेरिकी हमले के लिए राजनीतिक या सैन्य रूप से जिम्मेदार नहीं हैं। हमारी "जिम्मेदारी" नैतिक और मानवीय स्तर पर है। भारतीय नौसेना द्वारा (राजनीतिक मंजूरी के बाद) उन लोगों के जीवन की हानि पर शोक व्यक्त करना उचित होगा जो हमारे मेहमान थे और जिन्होंने हमारे राष्ट्रपति को सलामी दी थी।

ईरान ने श्रीलंका की तरफ एक और युद्धपोत भेजा

ईरान ने पुष्टि की है कि एक दूसरा ईरानी युद्धपोत श्रीलंका के क्षेत्रीय जलक्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, उसी क्षेत्र की ओर जहां कल एक अमेरिकी पनडुब्बी ने एक ईरानी फ्रिगेट को नष्ट कर दिया था। ईरान ने कहा कि युद्धपोत, जिसमें कथित तौर पर 100 से अधिक चालक दल सवार हैं, श्रीलंका के जलक्षेत्र के ठीक बाहर है। यह बयान श्रीलंका के मंत्रिमंडल के प्रवक्ता के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि देश अपने तट के पास एक ईरानी जहाज पर सवार लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहा है। बुधवार को, एक अमेरिकी पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में एक ईरानी युद्धपोत को तारपीडो से डुबो दिया था।

जहाज़ को डुबाने पर ईरान का कड़ा बयान

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट आईरिस देना पर अमेरिका द्वारा किए गए हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने इस घटना को "समुद्र में अत्याचार" बताया और कहा कि यह जहाज भारतीय नौसेना का मेहमान था और इसमें लगभग 130 नाविक सवार थे। अराघची ने चेतावनी दी कि वाशिंगटन को इस तरह की मिसाल कायम करने पर "कड़ा पछतावा" होगा। अमेरिका ने ईरान के तटों से दूर बिना किसी पूर्व सूचना के हमला किया है। इसका कुछ तो नतीजा आएगा।
यह प्रतिक्रिया तब आई जब एक अमेरिकी पनडुब्बी ने हिंद महासागर में, श्रीलंका के दक्षिणी तट के पास, अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में ईरानी फ्रिगेट आईरिस देना को तारपीडो से निशाना बनाकर डुबो दिया। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद तारपीडो द्वारा किसी दुश्मन जहाज को डुबोने की यह पहली घटना थी। यह घटना तब घटी जब फ्रिगेट, जो एक छोटा युद्धपोत है, भारत में संयुक्त नौसेना अभ्यास से लौट रहा था।


फ्रिगेट श्रेणी का युद्धपोत आईरिस देना, 18 से 25 फरवरी तक बंगाल की खाड़ी में आयोजित मिलान अंतरराष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा में भाग ले रहा था, जहां भारतीय नौसेना ने उसका स्वागत किया था। यह आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से लौट रहा था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसे निशाना बनाया गया।
खबरों के मुताबिक, अमेरिकी हमले में आईआरआईएस देना जहाज पर सवार कम से कम 88 लोग मारे गए। श्रीलंकाई नौसेना ने अब तक आईआरआईएस देना से लगभग 30 नाविकों को बचाया है, जिन्हें इलाज के लिए दक्षिणी बंदरगाह शहर गाले के करापितिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

भारत के पास समझौतावादी प्रधानंत्रीः राहुल गांधी 

नेता विपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर कड़ा हमला बोला है। राहुल ने कहा- विश्व एक अस्थिर दौर में प्रवेश कर चुका है। आगे भयंकर संकट मंडरा रहा है। भारत की तेल आपूर्ति खतरे में है, क्योंकि हमारे आयात का 40% से अधिक हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। एलपीजी और एलएनजी के लिए स्थिति और भी बदतर है। यह संघर्ष हमारे पड़ोस तक पहुँच गया है, हिंद महासागर में एक ईरानी युद्धपोत डूब गया है। फिर भी प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। ऐसे समय में हमें एक स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है। इसके विपरीत, भारत के पास एक ऐसा प्रधानमंत्री है जो समझौतावादी है और जिसने हमारी रणनीतिक स्वायत्तता को त्याग दिया है।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा है कि मिलान 2026 अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा से लौट रहे एक ईरानी नौसैनिक पोत को, जहाँ उसे भारत ने आमंत्रित किया था, श्रीलंका के निकट भारतीय जलक्षेत्र में एक अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया। क्या भारत का अपने ही पड़ोस में कोई प्रभाव नहीं रह गया है? या वह क्षेत्र भी चुपचाप वाशिंगटन और तेल अवीव को सौंप दिया गया है?
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सांसद संजय सिंह का हमला

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने ईरानी शिप का वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है- ये वीडियो मोदी की कायरता को हमेशा हमेशा के लिए दर्ज करेगा। भारत के बुलावे पर “मिलन युद्धाभ्यास 2026” के लिए ईरान ने अपना जहाज भेजा था। महामहिम राष्ट्रपति जी के सामने इस जहाज की खूबियाँ बताई गई। इस जहाज को अमेरिका ने मार गिराया जिसमें 100 से अधिक नाविक मारे गये, हमारे मेहमान मारे गये और मोदी ख़ामोश है। मोदी जी दुनिया आपको हमेशा एक कायर डरपोक और अमेरिकी पिछलग्गू के रूप में याद करेगी।

अमेरिका के पूर्व कर्नल के दावे का खंडन

अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने एक चैनल पर दावा किया कि “हमारे सभी बेस नष्ट कर दिए गए हैं।” उन्होंने दावा किया कि बंदरगाह ठिकाने खत्म हो चुके हैं और अमेरिका को भारतीय बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ा है। मैकग्रेगर के अनुसार, चीन और रूस ईरान को सैटेलाइट खुफिया जानकारी दे रहे हैं, और पृथ्वी की सबसे शक्तिशाली सेना के खिलाफ भी ईरान “बहुत, बहुत अच्छा प्रदर्शन” कर रहा है।

  • भारत ने पूर्व कर्नल मैकग्रेगर के दावों का खंडन किया है कि भारत के किसी भी बंदरगाह का अमेरिका इस्तेमाल कर रहा है।

मैकग्रेगर ने यह भी आरोप लगाया कि इसराइल ने अमेरिका को इस युद्ध में घसीटा और डोनाल्ड ट्रंप अब यह दावा कर रहे हैं कि “स्थिति ने मजबूर किया।” उनके आरोप के मुताबिक, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति यह सच नहीं बता रहे कि असल में नियंत्रण किसके हाथ में है।