अमेरिकी टेक दिग्गज कंपनी ऑरेकल (Oracle) ने बड़े पैमाने पर छंटनी की है। कंपनी ने भारत में करीब 12,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया है। पूरी दुनिया में कुल 30,000 कर्मचारियों की छंटनी की गई है। सूत्रों के मुताबिक, एक महीने के अंदर कंपनी और छंटनी की योजना बना रही है।

छंटनी का असर भारत के अलावा मैक्सिको समेत कई देशों पर पड़ा है। लेकिन भारत सबसे बुरी तरह प्रभावित देशों से एक है। क्योंकि यहां पर ऑरेकल का वर्कफोर्स ज्यादा है। कहा जा रहा है कि अभी कम से कम 5 से 6 हजार कर्मचारी भारत में और निकाले जाएंगे। कंपनी का भारत वाला हिस्सा कई विदेशी प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। लेकिन इस संबंध में कोई सूचना नहीं है कि वो प्रोजेक्ट बंद हुए हैं या उन कंपनियों ने आर्टिफिशल इंटेलीजेंस (एआई) पर शिफ्ट कर लिया है।

ऑरेकल छंटनी की खास वजह

छंटनी के प्रमुख कारणों में से एक ऑरेकल का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आक्रामक विस्तार है। खबरों के अनुसार, कंपनी ने ओपनएआई के लिए पांच वर्षों में एआई डेटा सेंटर बनाने के लिए 156 अरब डॉलर का सौदा किया है। इस विस्तार के लिए भारी खर्च की ज़रूरत होगी। ऑरेकल इन डेटा सेंटरों को सपोर्ट करने के लिए लगभग 30 लाख विशेष चिप्स खरीदने जा रहा है। इस तरह के ढांचे को खड़ा करने पर इसका खर्च दो साल पहले लगभग 6.9 अरब डॉलर सालाना से बढ़कर इस साल लगभग 50 अरब डॉलर हो गया है। इस बड़े पैमाने के निवेश को सपोर्ट करने के लिए, कंपनी अपने कर्मचारियों सहित अन्य क्षेत्रों में लागत में कटौती करती दिख रही है।
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कर्ज में डूबी हुई कंपनी

ऑरेकल पर भारी कर्ज भी है, जिसका अनुमान 108 अरब डॉलर से अधिक है। इससे कंपनी पर अपने फाइनेंस को सावधानीपूर्वक प्रबंधित करने का दबाव बढ़ गया है। निवेश बैंक टीडी काउवेन के अनुमानों के अनुसार, छंटनी से ओरेकल को 8 अरब से 10 अरब डॉलर तक की नकदी प्रवाह में वृद्धि करने में मदद मिल सकती है। इस राशि का उपयोग एआई और डेटा सेंटर के विस्तार के लिए किया जाएगा। कंपनी ने मार्च में 2.1 अरब डॉलर की पुनर्गठन योजना भी प्रस्तुत की थी, जिसमें से छंटनी से पहले ही लगभग 1 अरब डॉलर खर्च हो चुके थे।
छंटनी के पीछे एक और कारण कर्जदाताओं की बढ़ती चिंता है। ऑरेकल के कर्ज का बीमा कराने की लागत में भारी वृद्धि हुई है, जो 2009 के वित्तीय संकट के दौरान देखी गई लागत के बराबर पहुंच गई है। बार्कलेज ने पहले ही ऑरेकल के कर्ज की रेटिंग घटा दी थी और चेतावनी दी थी कि कंपनी "जंक" श्रेणी में आने के करीब है, जो डिफ़ॉल्ट के उच्च जोखिम को बताता है। कुछ बैंकों ने कथित तौर पर इन परियोजनाओं के लिए ऑरेकल को ऋण देना बंद कर दिया है, जिससे वित्तीय दबाव और बढ़ गया है।
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प्रमुख ग्राहक को लेकर अनिश्चितता

ऑरेकल के नए बुनियादी ढांचे की मांग को लेकर भी चिंताएं हैं। इन डेटा सेंटर परियोजनाओं के प्रमुख ग्राहकों में से एक, ओपनएआई, कथित तौर पर एनवीडिया के नए और तेज़ चिप्स पर खोज कर रहा है। इससे यह जोखिम पैदा हो गया है कि ऑरेकल द्वारा वर्तमान पीढ़ी के बुनियादी ढांचे में किया गया भारी निवेश पूरी तरह से इस्तेमाल में ही न आ पाए। कंपनी पहले ही सुविधाओं के निर्माण पर अरबों डॉलर खर्च कर चुकी है, जिसमें टेक्सास में एक बड़ी परियोजना भी शामिल है। प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों का मतलब है कि चिप्स जल्दी ही अप्रचलित हो सकती हैं, यहां तक ​​कि डेटा सेंटर शायद तब तक पूरी तरह से चालू न हो पाए।
बहरहाल, इन छंटनियों को ऑरेकल के भीतर हो रहे व्यापक बदलाव के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि कंपनी भारी पूंजी वाले एआई बुनियादी ढांचे और क्लाउड सेवाओं की ओर बढ़ रही है। हालांकि कंपनी भविष्य के क्षेत्रों में भारी निवेश कर रही है, लेकिन इस कदम की कीमत मौजूदा कारोबार में छंटनी के रूप में चुकानी पड़ी है।