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फ़ोटो क्रेडिट- @RajyaSabha

संसद सत्र: हंगामे के बाद लोकसभा 26 जुलाई तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार का दिन भी हंगामे और शोर-शराबे के नाम रहा और कामकाज नहीं हो सका। शुक्रवार को सदन शुरू होते ही लोकसभा और राज्यसभा में हंगामा हुआ और दोनों सदनों की कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। 

12 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई तो विपक्षी दलों ने एक बार फिर पेगासस जासूसी के मामले को उठाया। हंगामे और शोरगुल के बीच स्पीकर ने लोकसभा को 26 जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया। दूसरी ओर राज्यसभा में भी हंगामा होने पर उप सभापति हरिवंश ने सदन को 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। 2.30 बजे सदन शुरू हुआ तो पेगासस जासूसी मामले पर फिर से शोर गुल होने लगा और इसके बाद सदन को दिन भर के लिए स्थगित कर दिया गया। 

पेगासस जासूसी मामला और किसानों के मुद्दों को लेकर कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल केंद्र सरकार पर जोरदार ढंग से हमलावर हैं। 19 जुलाई से शुरू हुए संसद के मानसून सत्र का अधिकतर वक़्त हंगामे की भेंट चढ़ गया है। 

गुरूवार को भी पूरे दिन संसद के दोनों सदनों में हंगामा होता रहा था और लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही को कई बार और फिर पूरे दिन के लिए स्थगित करना पड़ा था। 

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शांतनु सेन निलंबित

कई बार कार्यवाही स्थगित होने के बाद जब शाम को 4 बजे राज्यसभा में आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपनी बात रखनी शुरू की ही थी कि टीएसमी के सांसद शांतनु सेन ने उनके हाथ से बयान लिखा हुआ पर्चा छीन लिया और इसे फाड़कर उप सभापति की ओर उड़ा दिया। इसके बाद स्पीकर ने सदन को पूरे दिन तक के लिए स्थगित कर दिया। शुक्रवार को शांतनु सेन को मानसून सत्र के लिए राज्यसभा से निलंबित कर दिया गया। 

जारी है ‘किसान संसद’  

केंद्र सरकार के कृषि क़ानूनों के ख़िलाफ़ आंदोलन कर रहे किसानों की संसद जारी है। इस संसद का आयोजन संसद से कुछ ही दूरी पर स्थित जंतर-मंतर पर किया जा रहा है। किसानों की यह संसद 13 अगस्त तक चलेगी। 

किसान संसद के दौरान इसमें शामिल सदस्यों ने अपने सवाल स्पीकर बनाए गए शख़्स से पूछे हैं और संसद में शामिल लोग ही सवालों के जवाब दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि लोकसभा और राज्यसभा की तर्ज पर ही इस किसान संसद को चलाया जा रहा है। किसानों को विपक्षी राजनीतिक दलों की ओर से भी जोरदार समर्थन मिल रहा है। 

किसानों को हर दिन 200 की संख्या में बसों के जरिये जंतर-मंतर लाया जाएगा और यहां पर कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते हुए वे हर दिन अपनी संसद का आयोजन करेंगे। किसान नेताओं ने दिल्ली पुलिस को भरोसा दिलाया है कि उनका प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण और अनुशासित होगा। 

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किसान हर दिन सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक जंतर-मंतर पर मौजूद रहेंगे। उन्हें मार्च निकालने की इजाजत नहीं दी गई है। इस साल 26 जनवरी को हुई हिंसा के कारण दिल्ली पुलिस किसानों के इस आयोजन को लेकर खासी सतर्कता बरत रही है। दिल्ली पुलिस ने किसानों के इस आयोजन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त किया है और पूरे महकमे को हाई अलर्ट पर रखा गया है। 
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