संसद के बाहर मंगलवार को इंडिया गठबंधन के सांसदों ने भारत-अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते के फ्रेमवर्क के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीर वाली एक पोस्टर प्रदर्शित की, जिस पर लिखा था "Narender surrendered? The nation is watching." (नरेंद्र ने सरेंडर कर दिया? देश देख रहा है।)

यह विरोध संसद के मकर द्वार के बाहर किया गया, जहां इंडिया गठबंधन के कई सांसद एकजुट होकर नारे लगाते हुए दिखे। विपक्ष का आरोप है कि यह समझौता भारत के हितों का 'सरेंडर' है, खासकर किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए। वे संसद में इस डील पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रहे हैं, क्योंकि समझौते की घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा की गई थी, जिसे वे संसद की अवमानना मानते हैं।

विपक्षी दलों का कहना है कि इस फ्रेमवर्क में अमेरिकी सामानों पर शुल्क कम करने और कुछ कृषि उत्पादों पर छूट देने जैसे प्रावधान भारत के किसानों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार इस डील के पूरे विवरण को संसद के समक्ष रखे और पारदर्शिता बरते।

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खड़गे का सरकार पर ज़ोरदार हमला

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि यह डील भारत की आर्थिक संप्रभुता पर हमला है और प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रीय हितों को दांव पर लगा दिया है।


रूसी तेल और अमेरिकी फैक्ट शीट

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा- जहाँ सरकार ने कहा था कि भारत-अमेरिका संयुक्त बयान में रूसी तेल का कोई जिक्र नहीं है, वहीं व्हाइट हाउस की 'फैक्ट शीट' ने इसकी पोल खोल दी है। व्हाइट हाउस के मुताबिक, अतिरिक्त 25% टैरिफ हटाने की शर्त यह है कि भारत रूसी तेल खरीदना बंद करेगा। विपक्ष ने सवाल उठाया कि मोदी सरकार ने भारत की संप्रभुता की इस गिरावट को क्यों स्वीकार किया?

किसानों की  'पीठ में छुरा घोंपा'

खड़गे ने लिखा है कि भारत के इतिहास में पहली बार कृषि क्षेत्र को विदेशी सामानों के लिए पूरी तरह खोल दिया गया है। 6 फरवरी के संयुक्त बयान में जिन "अतिरिक्त उत्पादों" का जिक्र था, 9 फरवरी की व्हाइट हाउस फैक्ट शीट में उनमें चुपके से 'दालों' (Pulses) को भी जोड़ दिया गया है। इसके अलावा, लाल ज्वार (Red Sorghum) के आयात को लेकर भी शर्तों में रहस्यमयी बदलाव किए गए हैं।

गौ-माता और डेयरी किसानों के साथ विश्वासघात: खड़गे ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि अमेरिका से आने वाला पशु चारा (DDGs और लाल ज्वार) मुख्य रूप से जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) होता है। इससे भारतीय मवेशियों की नस्ल और दूध के स्वाद पर बुरा असर पड़ेगा। मोदी सरकार, जिसने 2017 से जीएम चारे को मंजूरी नहीं दी थी, उसने अचानक इसे अनुमति दे दी है। इससे देश के 2 करोड़ डेयरी किसान प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि गाय के नाम पर राजनीति करने वाले अब मवेशी आबादी को नष्ट करने पर तुले हैं।

परिधान (Apparel) क्षेत्र को भारी नुकसान

खड़गे ने कहा- मोदी सरकार 18% टैरिफ को 'ऐतिहासिक जीत' बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसकी तुलना अमेरिका-बांग्लादेश डील से की है। बांग्लादेश को कई कपड़ों पर 'जीरो ड्यूटी' एक्सेस दिया गया है, जिससे तिरुपुर और सूरत जैसे भारतीय कपड़ा हब पिछड़ जाएंगे। यह भारतीय कपास और गारमेंट सेक्टर पर एक "घातक प्रहार" है।
कांग्रेस के अलावा अन्य विपक्षी दलों ने भी इस समझौते को 'PR-रैप्ड विश्वासघात' करार दिया है। सांसदों का कहना है कि यह समझौता भारत के रणनीतिक राष्ट्रीय हितों और निर्यात इंजन की बलि चढ़ाकर किया गया है। संसद परिसर में हुए इस प्रदर्शन ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा सदन के भीतर और बाहर और गरमाएगा। इंडिया गठबंधन के सांसदों ने कहा कि राष्ट्र हितों की रक्षा के लिए वे संघर्ष जारी रखेंगे।