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जिस पहलू ख़ान को पीट-पीटकर मारा गया, उसी पर मुक़दमा

गो तस्करी के शक में किसी को भीड़ पीट-पीटकर मार दे और मारे जाने के बाद वहाँ की पुलिस उसके और उसके दो बेटों के ही ख़िलाफ़ गो तस्करी में चार्जशीट दाख़िल कर दे, तो कई तरह के सवाल उठने लाज़िमी हैं। राजस्थान पुलिस ने कथित गो रक्षकों के हाथों पीट-पीटकर मारे गए पहलू ख़ान के मामले में ऐसा ही किया है। चार्जशीट में जिस गाड़ी में पशुओं को ले जाया जा रहा था, उस गाड़ी के मालिक का भी नाम है।

1 अप्रैल, 2017 को नूंह (हरियाणा) के रहने वाले 55 वर्षीय पहलू ख़ान जयपुर से पशु ख़रीदकर ला रहे थे तब बहरोड़ में कथित गो रक्षकों ने उन्हें गो तस्करी के शक में बुरी तरह पीटा था जिसके दो दिन बाद अस्पताल में उन्होंने दम तोड़ दिया था। 

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दिसंबर में राज्य की सत्ता में कांग्रेस के आने के बाद पिछले साल 30 दिसंबर को यह चार्जशीट तैयार की जा चुकी थी और इस साल 29 मई को इसे बहरोड़ की अतिरिक्त चीफ़ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। चार्जशीट में पहलू ख़ान और उसके दो बेटों को राजस्थान गोवंश पशु (अस्थायी प्रवासन या निर्यात का नियमन और वध का निषेध) अधिनियम, 1995 और नियम, 1995 की धारा 5, 8 और 9 के तहत आरोपी बनाया गया है। 
अंग्रेजी अख़बार ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में छपी ख़बर के मुताबिक़, ख़ान के बड़े बेटे इरशाद (25) ने कहा, ‘गो रक्षकों के हमले में हमारे पिता मारे गए और अब चार्जशीट में हमें गो तस्कर बताया गया है। हमें इस बात की उम्मीद थी कि राज्य में बनी नई कांग्रेस सरकार इस मामले की समीक्षा करेगी और इसे वापस लेगी लेकिन अब तो हमारे ही ख़िलाफ़ चार्जशीट दाख़िल कर दी गई है। हमें उम्मीद थी कि राज्य में सरकार बदलने के बाद हमें न्याय मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ।’ इरशाद के अलावा पहलू ख़ान के छोटे बेटे आरिफ़ का नाम भी चार्जशीट में है। 
इरशाद ने इस घटना के बाद बताया था कि उनका डेयरी का कारोबार है और वह जयपुर से गाय और भैंस खरीदकर ले जा रहे थे लेकिन कथित गो रक्षकों ने उनकी एक न सुनी और गो तस्कर समझकर उन पर हमला कर दिया।
बता दें कि इस मामले के जाँच अधिकारी और बहरोड़ पुलिस स्टेशन के हेड कांस्टेबल हारून ख़ान ने पिछले साल कहा था कि पुलिस को ऐसे कोई दस्तावेज़ नहीं मिले हैं जिससे पहलू ख़ान और उनके साथ के लोगों के पशु ले जाने का कारण पता चलता हो और उन्हें गो तस्करी के मामले में निर्दोष माना जाए। 
बहरोड़ पुलिस स्टेशन में दायर इस चार्जशीट एफ़आईआर नंबर 253/17 के मुताबिक़, मामले में जाँच पूरी होने के बाद अधिनियम की धारा 8 और 9 के तहत इरशाद, आरिफ़ और पहलू ख़ान के ख़िलाफ़ अपराध साबित हुआ है जबकि सेक्शन 6 के तहत ख़ान मोहम्मद के ख़िलाफ़ अपराध साबित हुआ है। बता दें कि 2017 में इस मामले में पुलिस ने गोवंश पशु अधिनियम के तहत दो अलग-अलग एफ़आईआर दर्ज की थीं क्योंकि तब दो अलग-अलग गाड़ियों पर कथित गो रक्षकों द्वारा हमला किया गया था। एक गाड़ी के मालिक जगदीश थे जिसे अर्जुन चला रहा था और दूसरी गाड़ी ख़ान मोहम्मद की थी और इस गाड़ी में पहलू ख़ान और उसके दोनों बेटे बैठे थे। 
राज्य की पिछली बीजेपी सरकार ने पिछले साल अज़मत, रफ़ीक़, अर्जुन और जगदीश के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया था और इसमें पिछले साल ही चार्जशीट दायर कर दी गई थी जबकि दूसरी एफ़आईआर पहलू ख़ान और उसके दो बेटों के ख़िलाफ़ दर्ज की गई थी। दूसरे वाले मामले में पुलिस ने ख़ान मोहम्मद को भी आरोपी बनाया था। एक गाड़ी के मालिक जगदीश प्रसाद पर भी इस अधिनियम की धारा 6 के तहत मुक़दमा दर्ज किया गया है। तब भीड़ ने ट्रक के ड्राइवर अर्जुन पर भी हमला किया था। 
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इस अधिनियम की धारा 5 के मुताबिक़, राज्य में गो पशुओं के निर्यात और उनकी हत्या को रोकने का प्रावधान है। जबकि धारा 6 के अनुसार, ऐसे पशुओं को अपनी गाड़ी में ले जा रहा व्यक्ति भी अपराध करने वाले व्यक्ति के बराबर ही ज़िम्मेदार है। धारा 8 ऐसे अपराधों के लिए सज़ा के बारे में है जबकि धारा 9 में गोवंश पशु को चोट पहुँचाने के लिए सजा का उल्लेख है। पहलू ख़ान की हत्या के बाद मानवाधिकार संगठनों ने सरकार की तीख़ी आलोचना की थी।

अब बात करते हैं कि पहलू ख़ान को पीट-पीटकर मार डालने वाले गो रक्षकों के ख़िलाफ़ क्या कार्रवाई हुई। पुलिस ने पहलू ख़ान की हत्या के मामले में 9 लोगों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया था। लेकिन पुलिस ने जाँच के बाद इनमें से छह लोगों को यह कह कर क्लीन चिट दे दी थी कि उनके ख़िलाफ़ उसे कोई सुबूत ही नहीं मिले थे। 

अलवर में ही गो तस्करी के शक में कथित गो रक्षकों ने रकबर ख़ान की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। राजस्थान में तब बीजेपी की सरकार थी। बताया जाता है कि दूध का कारोबार करने वाले कई और मुसलिमों की कथित गो रक्षकों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।
अब जो सवाल खड़े होते हैं वह यह कि अगर पहलू ख़ान और उनके साथियों के पास गाय ख़रीदने को लेकर सही दस्तावेज़ नहीं थे जैसा कि मामले के जाँच अधिकारी ने कहा था, तो क्या उन्मादी भीड़ को यह अधिकार मिल जाता है कि वह किसी को भी पीट-पीटकर मार दे। भीड़ उन्हीं को पीटे, वे ही अपने लोगों की मौत का दुख बर्दाश्त करें और उन्हें ही आरोपी बना दिया जाए, यह कहाँ का इंसाफ़ है। इस हमले में घायल हुए अज़मत को गहरी चोटें आई थीं और उन्हें महीनों तक बिस्तर में पड़े रहना पड़ा था। पहलू ख़ान हरियाणा के नूंह-मेवात इलाक़े के रहने वाले थे और इस जगह मुसलमान बड़ी संख्या में गायों को पालने का काम करते हैं और इससे एक बड़ी आबादी की दूध और इससे जुड़ी ज़रूरतें पूरी होती हैं। लेकिन पहलू, रक़बर और अख़लाक की हत्या के बाद यहाँ के लोगों में कथित गो रक्षकों को इतना ख़ौफ़ बैठ गया कि उन्होंने या तो वर्षों से चले आ रहे अपने इस काम को बंद कर दिया या बहुत कम कर दिया।
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