सरकारी तेल कंपनियों ने आज सोमवार 25 मई को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर ₹2.50 से अधिक की बढ़ोतरी कर दी है। यह लगभग दो सप्ताह में चौथी बार है जब ईंधन के दाम बढ़ाए गए हैं। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर हो गया है।
दिल्ली में पेट्रोल की कीमत में ₹2.61 प्रति लीटर और डीजल में ₹2.71 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। अन्य प्रमुख शहरों में भी इसी अनुपात में दाम बढ़े हैं:
  • कोलकाता: पेट्रोल ₹113.51 (+₹2.87), डीजल ₹99.82 (+₹2.80)
  • मुंबई: पेट्रोल ₹111.21 (+₹2.72), डीजल ₹97.83 (+₹2.81)
  • चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 (+₹2.46), डीजल ₹99.55 (+₹2.57)

क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

तेल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण हो रहे नुकसान की भरपाई कर रही हैं। कच्चा तेल $100 प्रति बैरल के पार जाने और अमेरिका-ईरान संघर्ष के चलते हॉर्मुज समुद्री रास्ता बंद होने से आपूर्ति प्रभावित हुई है। ONGC की डायरेक्टर (एक्सप्लोरेशन) सुषमा रावत ने बताया कि सरकार ने 76 दिनों तक आम लोगों को राहत दी, लेकिन कंपनियां रोजाना करीब ₹1,000 करोड़ का घाटा सह नहीं सकती हैं।
23 मई को भी पेट्रोल में ₹0.87 और डीजल में ₹0.91 प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई थी। 16 मई को ₹3 प्रति लीटर की एकसाथ बढ़ोतरी के बाद यह सिलसिला जारी है। अप्रैल 2022 से कीमतें लगभग स्थिर थीं, सिर्फ 2024 लोकसभा चुनाव से पहले ₹2 प्रति लीटर की कटौती हुई थी।
हालांकि वैश्विक स्तर पर आज कच्चे तेल की कीमतों में 5% से अधिक की गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड $98.22 प्रति बैरल और WTI $91.57 प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह स्थिति अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती शांति की उम्मीदों के बीच पैदा हुई। ईरान का कहना है कि यूएस से समझौता होने और होर्मुज खुलने के बाद कम से कम एक महीना स्थिति सामान्य होने में लगेगा।

आम आदमी पर पड़ रहा असर

ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतें आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रही हैं। परिवहन और लॉजिस्टिक्स खर्च बढ़ने से जरूरी वस्तुओं, सब्जियों, फलों, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
  • दैनिक यात्री और मध्यम वर्ग: ऑफिस जाने वाले लोग, ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और बसों का किराया बढ़ रहा है। दोपहिया वाहन वाले परिवारों का मासिक पेट्रोल खर्च सैकड़ों रुपये बढ़ गया है।
  • व्यापारी और ट्रांसपोर्टर: ट्रक, टैंकर और डिलीवरी वाहनों का खर्च बढ़ने से माल ढुलाई महंगी हो रही है, जिसका सीधा असर बाजार भाव पर पड़ता है।
  • किसान: खेती के लिए डीजल इस्तेमाल करने वाले किसानों का उत्पादन खर्च बढ़ रहा है, जिससे अनाज और सब्जियों की कीमतें प्रभावित होती हैं।
  • महंगाई का दबाव: विशेषज्ञों का कहना है कि ईंधन महंगा होने से समग्र मुद्रास्फीति बढ़ेगी, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग की खरीद क्षमता कमजोर होगी।
सरकार का कहना है कि बढ़ोतरी आयात खर्च प्रबंधित करने और ईंधन आपूर्ति स्थिर रखने के लिए जरूरी है, लेकिन आम जनता पर इसका बोझ लगातार बढ़ रहा है। दूसरी तरफ सरकार की फिजूलखर्ची रोकने की अपीलें ढकोसला साबित हो रही हैं। मंत्रियों ने प्रचार के लिए अपने फोटो ऑटो और ईरिक्शा के साथ डाले लेकिन वो फोटो खिंचवाने तक सीमित हैं। कुछ देर बाद वो फिर से सरकारी गाड़ी पर सवार हो जाते हैं और उनके साथ काफिला भी चलता है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में पांच देशों की यात्राएं कीं, विपक्षी दलों ने उस पर सवाल उठाए। इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी से मोदी की मुलाकात के चर्चे अभी तक हैं।