देश की सरकारी तेल कंपनियों ने शनिवार को पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे और डीजल की कीमतों में 91 पैसे की बढ़ोतरी की। इस बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.51 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 92.49 रुपये प्रति लीटर हो गई है। छोटे शहरों में पेट्रोल-डीज़ल पंपों पर लोगों की लंबी लाइनें फिर से लगने लगी हैं।

सरकार ने पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें फिर बढ़ा दी हैं।

यह बढ़ोतरी अमेरिका-ईरान युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने के चलते की गई है। ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद किए जाने से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
भारत अपनी 88% से अधिक कच्ची तेल की जरूरतें आयात करता है, इसलिए वैश्विक घटनाएं सीधे घरेलू कीमतों पर असर डालती हैं। इसके अलावा, रुपये का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना (वर्तमान में ₹95.6 प्रति डॉलर) भी कीमतों को बढ़ाने का एक बड़ा कारण है।
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एक सप्ताह में ₹5 प्रति लीटर की बढ़ोतरी

  • 15 मई को ₹3 प्रति लीटर की बढ़ोतरी
  • 19 मई को करीब 90 पैसे की बढ़ोतरी
  • 23 मई को 87-91 पैसे की बढ़ोतरी
इस तरह एक सप्ताह से भी कम समय में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगभग ₹5 प्रति लीटर की वृद्धि हो चुकी है। तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने पहले ही बताया था कि ऊंचे कच्चे तेल के दामों के कारण उन्हें रोजाना पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस पर करीब ₹1,000 करोड़ का नुकसान हो रहा था।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें ऊंची बनी रहीं तो आगे भी कीमतें बढ़ाई जा सकती हैं। अभी भी कंपनियां प्रति लीटर ₹9-12 का नुकसान झेल रही हैं।

आपकी जेब और महंगाई का सीधा संबंध

अगर युद्ध लंबा चला और कच्चा तेल $110-120 तक गया तो कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से सब्जी, फल, सामान के दाम बढ़ सकते हैं यानी महंगाई बढ़ेगी। टैक्सी, ऑटो, ट्रक वाले और आम उपभोक्ता पर बोझ बढ़ रहा है। अभी हाहाकार वाली स्थिति नहीं बनी है, लेकिन महंगाई का दबाव साफ दिख रहा है। अगर मिडिल ईस्ट में तनाव कम हुआ तो कीमतें स्थिर हो सकती हैं। अन्यथा आने वाले हफ्तों में और 1-2 बढ़ोतरी संभव है।