प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष यानी PM CARES Fund का कुल कोष वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 8,452.07 करोड़ रुपये हो गया। यह पिछले वित्त वर्ष के 7,173.03 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 17.8 फीसदी अधिक है। खास बात यह है कि इस दौरान घरेलू और विदेशी दोनों तरह के चंदे में गिरावट आई, जबकि फंड से किया गया खर्च बेहद कम रहा। उपलब्ध ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, 2024-25 में फंड के कुल कोष का लगभग 0.01 फीसदी ही खर्च हुआ।
इन आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और PM CARES Fund की उपयोगिता तथा पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने कहा कि 8,452 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद केवल 0.01 फीसदी राशि खर्च की गई, जबकि देश के अलग-अलग हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं से लोग प्रभावित हो रहे हैं और राहत तथा पुनर्वास की जरूरत बनी हुई है।

घरेलू चंदे में करीब 30 फीसदी गिरावट

PM CARES Fund की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2024-25 में रिफंड को घटाने के बाद घरेलू योगदान करीब 479.05 करोड़ रुपये रहा। 2023-24 में यह राशि लगभग 681.81 करोड़ रुपये थी। यानी एक साल में घरेलू चंदे में करीब 30 फीसदी की कमी आई।
PM CARES Fund में घरेलू स्वैच्छिक योगदान वित्त वर्ष 2020-21 में अपने उच्चतम स्तर पर था। उस वर्ष करीब 7,184 करोड़ रुपये का घरेलू योगदान मिला था। इसके बाद 2021-22 में यह घटकर करीब 1,896 करोड़ रुपये और 2022-23 में लगभग 909 करोड़ रुपये रह गया।
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विदेशी चंदा भी घटा

विदेशी योगदान में भी गिरावट दर्ज की गई। 2024-25 में रिफंड के बाद विदेशी योगदान करीब 92.8 लाख रुपये (0.93 करोड़ रुपये) रहा, जबकि 2023-24 में यह लगभग 1.14 करोड़ रुपये था। यानी विदेशी चंदे में 18 फीसदी से अधिक की कमी हुई। ऑडिट आंकड़ों के अनुसार, विदेशी योगदान 2020-21 में करीब 495 करोड़ रुपये था। 2021-22 में यह घटकर करीब 40 करोड़ और 2022-23 में 2.57 करोड़ रुपये रह गया। 2024-25 का 92.8 लाख रुपये का आंकड़ा 2019-20 के बाद सबसे कम स्तरों में से एक है।

फिर 8,452 करोड़ रुपये कैसे हो गए?

दान में कमी के बावजूद PM CARES Fund का कोष बढ़ने की मुख्य वजह फिक्स्ड डिपॉजिट से मिला ब्याज, विभिन्न एजेंसियों से वापस मिली राशि और बेहद कम खर्च रही। 2024-25 में फिक्स्ड डिपॉजिट से फंड को करीब 469.38 करोड़ रुपये का ब्याज मिला। वित्त वर्ष की शुरुआत में फंड की करीब 6,641.57 करोड़ रुपये की राशि फिक्स्ड डिपॉजिट में थी।
इसके अलावा विभिन्न कार्यान्वयन एजेंसियों से करीब 324.66 करोड़ रुपये वापस मिले। यह राशि ऐसी रकम थी जो संबंधित एजेंसियों के पास खर्च नहीं हुई या अतिरिक्त बच गई थी। 2023-24 में इस तरह की वापसी करीब 84.31 करोड़ रुपये थी। बैंकों से फिक्स्ड डिपॉजिट पर काटे गए टीडीएस की वापसी के रूप में भी करीब 13.49 लाख रुपये प्राप्त हुए। इन सभी मदों को मिलाकर वित्त वर्ष 2024-25 में शुरुआती शेष राशि को छोड़कर फंड को लगभग 1,279.91 करोड़ रुपये प्राप्त हुए।

31 मार्च 2025 को फंड में कितना पैसा था?

वित्त वर्ष 2024-25 की शुरुआत में PM CARES Fund में कुल 7,173.03 करोड़ रुपये थे। इसमें करीब 531.47 करोड़ रुपये बचत बैंक खातों में और 6,641.57 करोड़ रुपये फिक्स्ड डिपॉजिट में थे। 31 मार्च 2025 तक बचत खातों में राशि बढ़कर करीब 605.41 करोड़ रुपये और फिक्स्ड डिपॉजिट में 7,846.65 करोड़ रुपये हो गई। इस तरह कुल कोष करीब 8,452.07 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

खर्च में करीब 94 फीसदी की गिरावट: PM CARES Fund से 2024-25 में खर्च भी बेहद कम हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, PM CARES for Children Scheme के तहत सिर्फ 87.85 लाख रुपये खर्च किए गए। 2023-24 में इस मद में करीब 15.38 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। इस तरह एक साल में इस योजना पर खर्च में करीब 94 फीसदी की गिरावट आई। 87.85 लाख रुपये का खर्च 8,452.07 करोड़ रुपये के कुल कोष का लगभग 0.01 फीसदी बैठता है।

324 करोड़ रुपये की वापसी पर भी सवाल

  • RTI और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने भी फंड के आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं। 
  • उन्होंने पूछा कि कार्यान्वयन एजेंसियों से वापस आए 324 करोड़ रुपये किन परियोजनाओं या भुगतानों से संबंधित थे, इन्हें वापस क्यों किया गयाI 
  • किस एजेंसी ने यह राशि लौटाई। 
  • ऑडिट रिपोर्ट के साथ विस्तृत टिप्पणियां और संबंधित जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई।

जब जरूरत है तो पैसा खर्च क्यों नहीं: कांग्रेस

इन आंकड़ों को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोला है। राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि 8,452 करोड़ रुपये उपलब्ध होने के बावजूद केवल 0.01 फीसदी राशि का इस्तेमाल किया गया, जबकि देश में प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित समुदायों को राहत और पुनर्वास की जरूरत है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम निष्क्रिय क्यों पड़ी है। कांग्रेस की आलोचना का मुख्य आधार यह है कि PM CARES Fund को आपात और संकट की स्थितियों में राहत देने के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन नवीनतम आंकड़ों में फंड का बड़ा हिस्सा खर्च होने के बजाय जमा और निवेश के रूप में दिखाई दे रहा है।

PM CARES Fund कब बना और इसका ढांचा क्या है?

केंद्र सरकार ने 27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी और अन्य आपात या संकट की स्थितियों से निपटने के लिए PM CARES Fund बनाया था। यह नई दिल्ली में एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत है। प्रधानमंत्री इसके पदेन अध्यक्ष हैं, जबकि रक्षा, गृह और वित्त मंत्री इसके पदेन ट्रस्टी हैं। सरकार के अनुसार फंड को कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती और इसमें व्यक्तियों तथा संगठनों से स्वैच्छिक योगदान प्राप्त होता है।

फंड को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए FCRA से छूट भी मिली हुई है। PM CARES की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, विदेशों में रहने वाले व्यक्ति और संगठन भी इसमें योगदान कर सकते हैं।

ऑडिट को लेकर भी अहम जानकारी

वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए PM CARES Fund का ऑडिट मुंबई की चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्म KKC & Associates LLP ने किया। दोनों वर्षों की ऑडिट रिपोर्ट पर 7 अगस्त 2026 को हस्ताक्षर किए गए और बाद में वित्तीय विवरण PM CARES की वेबसाइट पर सार्वजनिक किए गए। इससे पहले वित्त वर्ष 2022-23 का ऑडिट दिल्ली की SARC & Associates ने किया था। PM CARES के आधिकारिक FAQ के अनुसार, फंड का स्वतंत्र ऑडिटर होता है और इसके खातों का वित्त वर्ष समाप्त होने के बाद ऑडिट किया जाता है।

पारदर्शिता का पुराना विवाद भी फिर चर्चा में

PM CARES Fund की पारदर्शिता लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस का विषय रही है। जून 2020 में प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा था कि PM CARES Fund RTI Act, 2005 के तहत “public authority” नहीं है। इसके बाद फंड के संचालन और वित्तीय विवरणों को लेकर सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारियों पर विवाद जारी रहा। कांग्रेस और अन्य आलोचक जहां फंड को लेकर ज्यादा सार्वजनिक जवाबदेही और विस्तृत जानकारी की मांग करते रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि यह एक स्वैच्छिक योगदान वाला ट्रस्ट है और इसमें सरकारी बजट की राशि नहीं आती।

कांग्रेस केरल का अलग सवाल

कांग्रेस की केरल इकाई ने भी सोशल मीडिया पर PM CARES Fund को लेकर सरकार से सवाल किए हैं। उसके पोस्ट में तर्क दिया गया कि जब प्रधानमंत्री के नाम पर एक अलग राहत कोष बनाया गया, जबकि पहले से Prime Minister's National Relief Fund (PMNRF) मौजूद था, तो PM CARES को सार्वजनिक जांच और जवाबदेही के दायरे से बाहर क्यों रखा गया। कांग्रेस केरल ने यह भी आरोप लगाया कि PM CARES को चीनी स्रोतों से चंदा मिला था और इस संदर्भ में सरकार की चीन नीति पर सवाल उठाया। हालांकि, यह कांग्रेस का राजनीतिक आरोप हैI
बहरहाल, सारे आंकड़े अब राजनीतिक बहस का केंद्र हैं। सरकार की ओर से फंड को आपात स्थितियों में सहायता के लिए बनाया गया बताया जाता है, जबकि कांग्रेस सवाल कर रही है कि अगर देश में लगातार प्राकृतिक आपदाएं और राहत की जरूरतें सामने आती हैं, तो हजारों करोड़ रुपये वाले इस फंड का इतना छोटा हिस्सा ही क्यों खर्च किया गया।
इसलिए PM CARES Fund के 2024-25 के आंकड़ों ने केवल फंड के आकार में वृद्धि की कहानी नहीं बताई है, बल्कि उसके उपयोग, पारदर्शिता, एजेंसियों से रकम की वापसी और आपात राहत के लिए धन के वास्तविक इस्तेमाल पर एक नई राजनीतिक बहस भी खड़ी कर दी है।