केंद्र सरकार को एलपीजी और पेट्रोल-डीज़ल पर मचा हाहाकार अब दिखाई देना लगा है। प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम को सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करेंगे। इस बैठक में पश्चिम एशिया में उभरती स्थिति की समीक्षा की जाएगी और भारत पर इसके प्रभावों का आकलन किया जाएगा, खासतौर पर पीएनजी, एलपीजी और तेल सप्लाई स्थिति की समीक्षा की जाएगी। अभी जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, उन राज्यों के सीएम को इसमें शामिल नहीं किया जाएगा। इस बीच सरकार ने दावा किया है कि उसके पास 60 दिनों तक तेल का इंतजाम है।

प्राइवेट कंपनी ने पेट्रोल-डीज़ल के दाम बढ़ाए

भारत के सबसे बड़े प्राइवेट फ्यूल विक्रेता, नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। उसने पेट्रोल की कीमतों में ₹5.30 प्रति लीटर और डीजल में ₹3 प्रति लीटर का इजाफा किया है।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध के कारण पैदा ऊर्जा चिंताओं की पृष्ठभूमि में, पिछले कुछ हफ्तों से भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। कहा जा रहा है कि बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम के विधानसभा चुनाव के बाद सरकार तेल कंपनियां भी पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ाएंगी। प्राइवेट कंपनी ने शुरूआत कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के लगभग बंद होने और अमेरिका व ईरान द्वारा ऊर्जा केंद्रों पर किए गए हमलों ने वैश्विक आपूर्ति को बाधित कर दिया है।
ताज़ा ख़बरें

सरकार का बयानः हमारे पास 60 दिनों का तेल

गुरुवार को सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया कि तत्काल कोई खतरा नहीं है और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बावजूद देश में 60 दिनों का ईंधन उपलब्ध है। सरकार ने लोगों से ईंधन की कमी की अटकलों पर ध्यान न देने का आग्रह किया। सरकार ने पुष्टि की कि देश की ऊर्जा आपूर्ति स्थिर और सुव्यवस्थित बनी हुई है, और वर्तमान मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, अगले लगभग दो महीनों के लिए कच्चे तेल की खेप की व्यवस्था पहले ही कर ली गई है।
सरकार ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की तेल मार्केटिंग कंपनियों ने समय से पहले आयात सुनिश्चित कर लिया है, जिससे आपूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों को लेकर चिंताओं के बावजूद, भारत 40 से अधिक देशों के विविध नेटवर्क से कच्चे तेल की खरीद जारी रखे हुए है, जिससे किसी एक मार्ग या क्षेत्र पर निर्भरता कम हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि घरेलू रिफाइनरियां अपनी पूरी क्षमता से अधिक पर काम कर रही हैं, जिससे पूरे देश में ईंधन का निरंतर प्रवाह बना हुआ है।

भारत की कुल स्टोरेज क्षमता लगभग 74 दिनों की खपत को पूरा कर सकती है, जबकि मौजूदा स्टॉक में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार सहित लगभग 60 दिनों का स्टॉक है।

अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि संकट शुरू होने के कई सप्ताह बाद भी कोई कमी नहीं है, और भविष्य में आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त खरीद योजनाएं पहले से ही चल रही हैं।

ये किसने कहा था- कठिन दिन आने वाले हैं

इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने संसद में बोलते हुए चेतावनी दी कि मध्य पूर्व का मौजूदा संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काफी दबाव डाल रहा है और इसके दीर्घकालिक परिणाम हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि तीन सप्ताह से अधिक समय से चल रहे इस संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों को बाधित कर दिया है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस स्थिति के कारण विश्व स्तर पर ईंधन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है, जिसका दबाव भारत पर भी पड़ रहा है। स्थापित व्यापार चैनलों में रुकावट के कारण पेट्रोल, डीजल, प्राकृतिक गैस और उर्वरकों की आपूर्ति प्रभावित हुई है।
प्रधानमंत्री ने संसद में इस बात पर जोर दिया था कि सरकार घटनाक्रम पर सक्रिय रूप से नजर रख रही है और देश पर इसके प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक उपाय कर रही है। नागरिकों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक बुनियाद मजबूत बनी हुई है और स्थिति में हो रहे बदलावों को देखते हुए सावधानीपूर्वक और तत्परता से निर्णय लिए जा रहे हैं। हालांकि मोदी के बयान की कई विपक्षी राज्यों के सीएम ने आलोचना की। तमिलनाडु के सीएम डीएमके स्टालिन ने एक्स पर लिखा- पीएम मोदी के बयान से जनता में बेचैनी बढ़ जाएगी। स्टालिन का अनुमान सही निकला। उसी दिन शाम को पेट्रोल पंपों पर लंबी-लंबी लाइन लग गई।

पेट्रोल-एलपीजी के लिए लंबी लाइनें

ईंधन की कमी की आशंका के बीच, भारत के कई राज्यों में लोग अपने वाहनों में तेल भरवाने के लिए पेट्रोल पंपों पर उमड़ रहे हैं। वहीं, एलपीजी (LPG) संकट के कारण गैस फिलिंग स्टेशनों और डिपो के बाहर भी लंबी कतारें लग गई हैं।
प्रमुख शहरों में कीमतें:
हैदराबाद: गुरुवार को पेट्रोल की कीमत ₹107.46 प्रति लीटर रही, जो देश में सबसे अधिक है। यहाँ डीजल भी ₹95.70 प्रति लीटर के साथ टियर-1 शहरों की सूची में सबसे ऊपर है।
मुंबई और कोलकाता: यहाँ भी कीमतें ₹100 प्रति लीटर के पार बनी हुई हैं।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि देश में ईंधन की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बावजूद सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के कारण असम के गुवाहाटी सहित कई हिस्सों में 'पैनिक बाइंग' (घबराहट में खरीदारी) देखी गई।

विपक्ष का हमला

कांग्रेस पार्टी लगातार इस मामले को उठा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के नेतृत्व में विपक्षी सांसदों ने बुधवार को संसद परिसर में इस मुद्दे पर प्रदर्शन किया था। दूसरी ओर, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच सरकार "ऊर्जा संकट" को संभालने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकार पर्याप्त रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व बनाने में नाकाम रही। उन्होंने कहा- "भारत मुख्य ईंधन और उर्वरकों की कमी का सामना कर रहा है। आगामी विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतें और बढ़ेंगी।"