लोकसभा में राहुल गांधी ने अमेरिका से ट्रेड डील को लेकर सरकार पर आरोप लगाया कि ‘भारत माता को बेच दिया, शर्म नहीं आती?’ राहुल के इस बयान के बाद बीजेपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। तो क्या अब राहुल पर कार्रवाई होगी?
राहुल गांधी, किरेन रिजिजू
लोकसभा में राहुल गांधी को बुधवार को जब बोलने का मौक़ा मिला तो मोदी सरकार पर टूट पड़े। उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार को लेकर आरोप लगाया कि सरकार ने संवेदनशील कृषि और डेयरी बाजारों को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोलकर 'भारत माता को बेच दिया' है। राहुल ने कहा कि सरकार को शर्म आनी चाहिए, क्योंकि इस समझौते से करोड़ों किसानों की आजीविका ख़तरे में पड़ गई है। राहुल के इस आक्रामक तेवर पर बीजेपी बौखला गई। बीजेपी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने संसद की गरिमा को गिराया है। इसने राहुल को 'कांग्रेस में सबसे अव्वल दर्जे का मूर्ख' बताया। बीजेपी ने एपस्टीन फाइल्स मामले में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाने के लिए विशेषाधिकार उल्लंघन का नोटिस देने की बात कही है।
बीजेपी ने राहुल गांधी पर क्या-क्या प्रतिक्रिया दी है, यह जानने से पहले यह जान लें कि राहुल गांधी ने लोकसभा में कितनी आक्रामकता से अपनी बात कही। जनरल नरवणे की किताब के ज़िक्र को लेकर पिछले कई दिनों से बोलने का मौक़ा नहीं पा रहे राहुल बुधवार को लोकसभा में बेहद आक्रामक नज़र आए। राहुल गांधी की आलोचना का केंद्र बिंदु था उनका दावा कि अमेरिकी टैरिफ़ 2025 से पहले औसतन 3 प्रतिशत थे, लेकिन इस महीने के समझौते के बाद वे 18 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। बीच में ये दरें 50 प्रतिशत तक ऊँची हो गई थीं, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अनुचित टैरिफ़ की शिकायत की और 'जवाबी' शुल्क लगाए। इसके साथ ही भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने पर 25 प्रतिशत 'जुर्माना' भी जोड़ा गया।
राहुल गांधी ने कहा, 'यह पूरा सरेंडर है। यह सिर्फ प्रधानमंत्री का सरेंडर नहीं है, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों के भविष्य का सरेंडर है। प्रधानमंत्री ने बीजेपी की वित्तीय संरचना बचाने के लिए ऐसा किया है, जिस पर अमेरिका में केस चल रहा है।'
उन्होंने आगे कहा,
आपने भारत को बेच दिया। क्या आपको शर्म नहीं आती भारत माता को बेचने की? अगर इंडिया गठबंधन की सरकार होती तो अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ कहती कि भारत को बराबर का पार्टनर माना जाए। राहुल गांधी
लोकसभा में विपक्ष के नेता
'गरीब किसानों को कुचलने का दरवाजा खोल दिया'
उन्होंने आगे कहा, 'इतिहास में पहली बार हमारे किसान तूफ़ान का सामना कर रहे हैं और आपने हमारे गरीब किसानों को कुचलने का दरवाजा खोल दिया है।' राहुल ने दावा किया कि किसी भी प्रधानमंत्री ने ऐसा कभी नहीं किया और इस समझौते में कोई तर्क नहीं है।
उन्होंने आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा, 'आपने क्या किया... शुरुआत में औसतन 3 प्रतिशत था। अब यह 18 प्रतिशत हो गया- 6 गुना बढ़ोतरी हुई। अमेरिकी आयात 46 अरब डॉलर से बढ़कर 146 अरब डॉलर हो जाएगा... यह बेतुका है।' राहुल ने कहा, 'उनकी हमारे प्रति कोई प्रतिबद्धता नहीं है... हमारी उनकी ओर प्रतिबद्धता है।' उन्होंने एक प्रावधान का ज़िक्र किया जिसमें भारत अमेरिकी ऊर्जा और तकनीकी उत्पादों में 500 अरब डॉलर खरीदेगा। राहुल ने कहा, 'हम मूर्खों की तरह खड़े हैं। हमारा टैरिफ 18 प्रतिशत तक बढ़ गया... और उनका 16 प्रतिशत से घटकर शून्य हो गया।'
इस दौरान संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बीच में टोका और राहुल से मांग की कि वे अमेरिका के साथ समझौते के बारे में अपने दावों को साबित करने के लिए तथ्य पेश करें। रिजिजू ने कहा, 'भारत की प्रगति से आपको दुख होता है। कांग्रेस ने 2014 तक राष्ट्र को कमजोर किया और अब दुखी है...'। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक का सबसे मज़बूत बताते हुए उनकी तारीफ़ की।
राहुल अव्वल दर्जे का मूर्ख: बीजेपी
बीजेपी ने राहुल गांधी के इन बयानों पर तुरंत कड़ा जवाब दिया। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि राहुल गांधी संसद की गरिमा को सबसे निचले स्तर पर ले आये हैं। उन्होंने राहुल को 'कांग्रेसडम का सबसे अव्वल दर्जे का मूर्ख' कहा।
त्रिवेदी ने कहा, 'संसद लोकतंत्र का सबसे शीर्ष प्रतीक है, लेकिन राहुल गांधी के भाषण, शब्दों और तरीके से राजनीति और संसदीय मर्यादा को सबसे नीचे लाने की निंदनीय कोशिश की गई। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बार-बार निराधार और बेतुके आरोप लगाते हैं, जो ईर्ष्या से भरे हैं।' बीजेपी ने राहुल के आरोपों को झूठा और बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा कि संसद में गली-मोहल्ले की भाषा और व्यवहार कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों की ओर से देखने को मिल रहा है।
विशेषाधिकार हनन का नोटिस देंगे: रिजिजू
केंद्रीय संसदीय मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि राहुल ने बिना कोई नोटिस दिए मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर गंभीर आरोप लगाया है और यह विशेषाधिकार का हनन है। रिजिजू ने कहा कि हम स्पीकर के पास ज़रूरी नोटिस फाइल करेंगे। उन्होंने कहा, 'लोकसभा में विपक्ष के नेता ने बजट चर्चा में कोई काम का और ठोस योगदान नहीं दिया। वह सिर्फ़ बेबुनियाद आरोप लगा रहे थे। मैंने उनसे कहा था कि जब फाइनेंस मिनिस्टर आज शाम 5 पीएम बजे बजट पर जवाब दें तो सदन में मौजूद रहें। अपने भाषण के बाद वह तुरंत सदन से बाहर चले गए। नियम यह है कि एक बार जब कोई सदस्य अपना भाषण दे देता है, तो वह अपना भाषण खत्म होने के तुरंत बाद सदन नहीं छोड़ सकता।'
बहरहाल, राहुल गांधी की यह नई आलोचना अमेरिका द्वारा समझौते की 'फैक्टशीट' में बदलाव करने के कुछ घंटों बाद आई है। संशोधित दस्तावेज में 'दालों' को उस सूची से हटा दिया गया, जिसमें कई कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद शामिल थे, जिनके लिए भारत ने टैरिफ़ कम करने या घटाने पर सहमति दी थी।
फ़ैक्टशीट के पहले संस्करण में लिखा था, 'भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक सामानों और विभिन्न अमेरिकी खाद्य एवं कृषि उत्पादों पर टैरिफ खत्म या कम करेगा, जिसमें सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन, लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजा और प्रसंस्कृत फल, कुछ दालें, सोयाबीन तेल, वाइन और अन्य उत्पाद शामिल हैं।' अपडेटेड संस्करण में सिर्फ 'कुछ दालों' को हटा दिया गया।कृषि क्षेत्र राजनीतिक रूप से बहुत संवेदनशील है और यह भारत के जीडीपी का लगभग पांचवां हिस्सा है। कंसल्टेंसी कंपनी मैकिंजी ने जून में कहा था कि देश का कृषि क्षेत्र 580 अरब से 650 अरब डॉलर के बीच का है और यह 2035 तक 1.4 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ सकता है।
यह बदलाव कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की आलोचना के एक दिन बाद आया, जिन्होंने अमेरिका के साथ अंतरिम व्यापार समझौते के ढांचे पर सरकार की निंदा की। खड़गे ने दावा किया कि यह व्यापार समझौता भारत की रणनीतिक स्वायत्तता, किसानों, पशुपालन और कपड़ा क्षेत्र को कमजोर करता है।
समझौते की घोषणा के बाद सरकार ने भारतीय किसानों को सुरक्षा का आश्वासन दिया था। वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि कृषि क्षेत्र को पूरी तरह नहीं खोला गया है और जहां भारत आत्मनिर्भर है, उन क्षेत्रों को समझौते से बाहर रखा गया है।