विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एलपीजी गैस संकट को लेकर मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला है। एक्स पर सोमवार 6 अप्रैल को राहुल गांधी ने लिखा, “मोदी जी ने कहा था - एलपीजी गैस संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे। और सच में वही किया। बिल्कुल कोविड के जैसे ही- नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर।”
राहुल गांधी ने कहा कि ₹500-800 रुपये दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस अब पहुंच से बाहर हो गई है। “रात को घर लौटते मजदूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा- शहर छोड़ो, गांव भागो। जो मजदूर टेक्सटाइल मिल्स और फैक्टरियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं। टेक्सटाइल सेक्टर पहले से आईसीयू में है। मैन्युफैक्चरिंग दम तोड़ रही है।”
उन्होंने संकट की वजह बताते हुए कहा कि यह कूटनीति की मेज पर हुई चूक से आया है, जिसे सरकार आज तक स्वीकार नहीं कर रही। राहुल गांधी ने सवाल उठाया, “जब अहंकार नीति बन जाए - अर्थव्यवस्था चरमराती है, मजदूर पलायन करते हैं, उद्योग बर्बाद होते हैं और देश दशकों पीछे धकेल दिया जाता है। सवाल एक ही है- हर संकट में सबसे पहले गरीब क्यों मरता है? चुप मत रहो। यह सिर्फ गरीब का नहीं, हम सबका सवाल है।”

खत्म नहीं हो रहा है एलपीजी संकट

देश के कई हिस्सों में पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और इरान-इसराइल संघर्ष के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित हुई है। दिल्ली, बेंगलुरु, मुंबई समेत बड़े शहरों में घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर की डिलीवरी में 15 से 25 दिनों की देरी हो रही है। सरकारी दावों के मुताबिक घरेलू उत्पादन बढ़ाया गया है और वैकल्पिक स्रोतों से आयात की व्यवस्था की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। दिल्ली एनसीआर, बेंगलुरु, मुंबई, लखनऊ में खुलेआम कुकिंग गैस की कालाबाज़ारी की जा रही है। यह सब देश की सरकारी तेल कंपनियों के अधिकारियों की मिलीभगत से हो रहा है। 
दिल्ली में 14.2 किलो घरेलू सिलेंडर की आधिकारिक कीमत लगभग 913 रुपये है, लेकिन काले बाजार में यह 3400 से 4500 रुपये तक बिक रहा है। बेंगलुरु में कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर की कालाबाजारी 5000 से 9000 रुपये तक पहुंच गई है। कई रेस्तरां, ढाबे और छोटी खाने की दुकानें या तो बंद हो रही हैं या लकड़ी-कोयले का सहारा ले रही हैं। पैनिक बुकिंग से दबाव और बढ़ गया है।
केंद्र सरकार ने कालाबाजारी रोकने के लिए देशभर में 3700 से ज्यादा छापेमारी की हैं। पेट्रोलियम मंत्रालय ने राज्यों से सख्त निगरानी और कार्रवाई करने को कहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनएक्सटी समिट में अफवाह फैलाने वालों पर निशाना साधते हुए राज्यों से ब्लैक मार्केटर्स पर सख्ती बरतने की अपील की। सरकार का दावा है कि 74 दिनों का रिजर्व स्टॉक उपलब्ध है और घरेलू आपूर्ति बाधित नहीं होगी। साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) कनेक्शनों को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। 
बहरहाल, देश में चल रहे एलपीजी संकट ने मोदी सरकार की ऊर्जा नीतियों की गंभीर कमियों को उजागर कर दिया है। आयात पर अत्यधिक निर्भरता के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव से आपूर्ति बाधित हुई, लेकिन सरकार इस संकट को संभालने में पूरी तरह असफल साबित हुई। ब्लैक मार्केटिंग चरम पर है, जहां घरेलू सिलेंडर काले बाजार में 4-5 गुना महंगे दाम पर बिक रहे हैं। आम गरीब परिवारों को खाना पकाने के लिए लकड़ी या कोयले पर लौटना पड़ रहा है। सरकार केवल छापेमारी, बयान और अपील तक सीमित है, लेकिन जमीनी स्तर पर आम आदमी को राहत नहीं मिल रही। मोदी सरकार की लंबे समय से चली आ रही अनदेखी, पूर्व तैयारी की कमी और आयात पर अंधाधुंध निर्भरता ने इस संकट को और गहरा बना दिया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार की गलत विदेश नीति और घरेलू उत्पादन बढ़ाने में असफलता के कारण गरीब और मध्यम वर्ग को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।