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राजीव ने आईएनएस विराट पर छुट्टियाँ नहीं मनाई थीं, पूर्व एडमिरल ने कहा

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गाँधी की मृत्यु का मजाक उड़ाने से जुड़े बयान के बाद नरेंद्र मोदी का एक और बयान सुर्खियों में है। इससे यह तो साफ़ होता ही है कि प्रधानमंत्री मोदी मौजूदा मुद्दों पर चर्चा करने के बजाय 31 साल पहले की बात जो आज पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है, उसे तूल दे रहे हैं। उसके साथ यह सवाल भी उठता है कि क्या मोदी चुनावी फ़ायदा उठाने के लिए इस मुद्दे पर झूठ बोल रहे हैं।

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मोदी ने बुधवार को एक चुनाव सभा में राजीव गाँधी पर हमला करते हुए कहा कि उन्होंने आईएनएस विराट का इस्तेमाल अपने परिवार के साथ छुट्टियाँ मनाने के लिए किया था, इसे एक टैक्सी समझ लिया था।

लेकिन इस मुद्दे पर पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल एन. रामदास के बयान के बाद बहस में नया मोड़ आ गया।

गाँधी परिवार के निजी इस्तेमाल के लिए किसी जहाज़ का रास्ता नहीं बदला गया था। कवरत्ती में एक छोटा जहाज रखा गया था ताकि प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी के स्वास्थ्य से जुड़े किसी इमर्जेंसी की स्थिति में उसे काम लाया जा सके।


एडमिरल एन. रामदास, पूर्व नौसेना प्रमुख

पूर्व नौसेना अफ़सरों का बयान

उन्होंने बयान में कहा, ‘मैं एडमिरल पसरीचा जो उस समय आईएनएस विराट के कमांडर थे, एडमिरल अरुण प्रकाश जो उस समय आईएनएस विंध्यगिरि को कमांड कर रहे थे, और वाइस एडमिरल मदनजीत सिंह, जो उस समय आईएनएस गंगा के कमांडर थे, उनके लिखित जवाब की ओर ध्यान खींचना चाहता हूं। आईएनएस विंध्यगिरि उस समय आईएनएस विराट के साथ-साथ चल रहा था। इसके साथ ही मैं उस अफ़सर का नोट भी शामिल कर रहा हूं, जो उस समय लक्षद्वीप द्वीप समूह के नौसेना प्रभारी थे।’

एडमिरल रामदास ने इस बयान में दिसंबर, 1987 की घटना के बारे में विस्तार से बताया है। उन्होंने कहा है कि राजीव गाँधी आईएनएस विराट से त्रिवेंद्रम से कवरत्ती द्वीप विकास प्राधिकरण की एक बैठक में भाग लेने गए थे। रामदास ने इस मौके पर राजीव गाँधी को भोजन कराया था, लेकिन इसके अलावा किसी तरह की कोई पार्टी नहीं की गई थी। 

रामदास ने यह भी कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी पास के इलाके में स्थानीय निवासियोंं से मिलने के लिए गए थे, पर उनके साथ राहुल नहीं गए थे। इसी तरह, आईएनएस विराट पर पर कोई विदेशी नहीं था।
रियर एडमिरल कपिल गुप्ता ने कहा है कि जब राजीव गाँधी की छुट्टियाँ शुरू हुईं, उसके पहले ही आईएनएस विराट लौट चुका था। इसलिए उस पर छुट्टियाँ बिताने की बात बेतुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को बड़े-बड़े जहाज़ दिखाने की पुरानी परंपरा है, ताकि वे उस जहाज़ की समझ सकें और रक्षा तैयारियों का जायजा ले सकें। इसमें कुछ ग़लत नहीं है।

क्या कहा था मोदी ने?

लेकिन नरेंद्र मोदी ने चुनाव सभा में कहा था कि राजीव गाँधी ने 10 दिनों की छुट्टियाँ बिताने के लिए आईएनएस विराट का इस्तेमाल किया था, जबकि उस जहाज़ को सीमा पर तैनात होना चाहिए था। इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हुई थी। मोदी ने यह भी कहा कि आईएनएस विराट पर छुट्टियाँ बिताने के लिए राजीव के साथ उनके ससुराल के लोग भी गए हुए थे। मोदी ने यह भी कहा कि विदेशियों को आईएनएस विराट जैसे जहाज़ पर ले जाना देश की रक्षा के साथ समझौता करना था।

कांग्रेस का पलटवार

कांग्रेस ने मोदी पर पलटवार करते हुए उन्हें झूठा क़रार दिया है। पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ‘आप मुद्दे से भटक रहे हैं और झूठ का सहारा ले रहे हैं। आपने भारतीय वायु सेना को निजी टैक्सी बना दिया, आपने तो चुनाव प्रचार के लिए वायु सेना के जहाज़ लिए और भाड़ा के नाम पर 744 रुपये जैसी रकम दी है।’

कांग्रेस के एक दूसरे प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है कि यह कल्पना भी नहीं की जा सकती है कि नरेंद्र मोदी एक दिवंगत प्रधानमंत्री को बदनाम करने के लिए इस तरह का काम करेंगे और झूठ बोलेंगे।

सवाल यह है कि नरेंद्र मोदी ने ऐसा क्यों कहा। पर्यवेक्षकों का कहना है कि मोदी बिना सोचे समझे कुछ नहीं कहते। इसलिए यह बयान भी उनकी सोची समझी रणनीति का ही हिस्सा है। दरअसल, मोदी एक ऐसा नैरेटिव खड़ा करना चाहते हैं, जिसमें यह राजीव गाँधी को खलनायक के रूप में देखा जाए। जवाहर लाल नेहरू के बाद वे राजीव को खलनायक बना कर यह साबित करना चाहते हैं कि कांग्रेस पार्टी ने इस देश का बहुत ही नुक़सान किया है। इस रणनीतf के तहत ही पहले राजीव गाँधी को ‘भ्रष्टाचारी नंबर एक’ कहा गया। इसके बाद यह प्रचारित करने की कोशिश की जा रही है कि उन्होंने निजी मौज मस्ती के लिए रक्षा तैयारियों की अनदेखी की और आईएनएस विराट जैसे विमानवाहक पोत का निजी इस्तेमाल किया।

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