अयोध्या राम मंदिर चोरी मामले में आरएसएस ने पहली बार बयान जारी किया है। संघ ने इस घटना को "अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण" और "करोड़ों रामभक्तों की आस्था को गहरी ठेस पहुंचाने वाला" बताया है। साथ ही, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अपेक्षा जताई है कि वह इस मामले को एक अपवाद (Exceptional Matter) मानते हुए अपनी प्रशासनिक और वित्तीय व्यवस्थाओं की कमियों को दूर करे।

आरएसएस के बयान की महत्वपूर्ण लाइनें

संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले ने शुक्रवार 3 जुलाई को पहली बार बयान जारी किया। आरएसएस के एक्स हैंडल पर अंग्रेजी हिन्दी में पूरा बयान दिया गया है। होसबले का वीडियो भी इस बयान का जारी किया गया है। जिसकी महत्वपूर्ण लाइने हैं-  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संपूर्ण हिन्दू समाज से भी आह्वान करता है कि इस कठिन क्षण में वह आवश्यक धैर्य और संयम का परिचय दें तथा इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लाभ उठाकर हिन्दू विरोधी, राष्ट्र विरोधी शक्तियों के हिंदू धर्म एवं समाज को बदनाम करने के षड़यंत्रों को विफल करे। बता दें कि होसबले का यह बयान विनय कटियार के बयान के बाद आया है। बजरंग दल के संस्थापक विनय कटियार ने पीएम मोदी से बात करने का दावा करते हुए कहा कि चंपत राय, अनिल मिश्रा आदि जेल जा सकते हैं। चंपत राय को आरएसएस के हस्तक्षेप पर राम मंदिर ट्रस्ट में नियुक्त किया गया था।
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर 6 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की महत्वपूर्ण बैठक में चर्चा होनी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों को पहले कारण बताओ (शो-कॉज) नोटिस जारी कर लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण देने का अवसर दिया जाएगा। इस तरह डैमेज कंट्रोल की पूरी तैयारी है।
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RSS के पूरे बयान में और क्या कहा गया है?

नई दिल्ली से जारी बयान में RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर बना भव्य मंदिर पीढ़ियों के त्याग, संघर्ष और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रतीक है। ऐसे मंदिर के दानपात्र में चोरी की घटना ने पूरे समाज और रामभक्तों को दुखी और आक्रोशित किया है।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और उसकी सिफारिशों के आधार पर कानूनी कार्रवाई शुरू की गई है। जांच में जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोरतम कार्रवाई होनी चाहिए। होसबले ने ट्रस्ट से कहा कि वह इस घटना को एक असाधारण मामला मानते हुए मंदिर के वित्तीय प्रबंधन और संचालन व्यवस्था में यदि कोई कमी है तो उसे तत्काल दूर करे, ताकि करोड़ों श्रद्धालुओं का विश्वास कायम रहे और इस मामले को लेकर बनी अनिश्चितता समाप्त हो। उन्होंने विश्वास जताया कि पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन, निष्कलंक प्रशासनिक व्यवस्था और धार्मिक पवित्रता के वातावरण के जरिए ट्रस्ट हिंदू समाज का विश्वास और मजबूत करेगा।

हिंदू समाज से संयम की अपीलः RSS ने अपने बयान में हिंदू समाज से भी धैर्य और संयम बनाए रखने की अपील की है। संघ ने कहा कि जांच पूरी होने तक किसी तरह की जल्दबाजी न की जाए और इस घटना का इस्तेमाल कर हिंदू धर्म और समाज को बदनाम करने की कोशिश करने वाली "हिंदू विरोधी और राष्ट्रविरोधी शक्तियों" की साजिशों को विफल किया जाए।

6 जुलाई को चंपत राय और अनिल मिश्रा से मांगा जाएगा जवाब

सूत्रों के मुताबिक, 6 जुलाई को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की संभावना है। दोनों से दान राशि में कथित अनियमितताओं को लेकर लिखित और मौखिक स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। ट्रस्ट के नियमों के अनुसार किसी भी पदाधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई या इस्तीफा स्वीकार करने से पहले उसे अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य है। अंतिम फैसला ट्रस्टियों के आवश्यक बहुमत से ही लिया जाएगा।

आरएसएस के बयान के मायने क्या हैं

राम मंदिर दान घोटाले के सामने आने के बाद पिछले कुछ दिनों में जो घटनाक्रम हुआ है, वह राजनीतिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लेकिन आरएसएस ने लगभग एक महीने से इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी थी। ऐसा क्यों, अभी बयान की ज़रूरत क्यों पड़ गई। क्या आरएसएस से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा पर कार्रवाई होने से संघ के दाग़ धुल जाएंगे। ये सवाल अब सोशल मीडिया पर तैर रहे हैं।
सबसे पहले विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने सार्वजनिक रूप से कहा कि इस पूरे प्रकरण की जिम्मेदारी चंपत राय की है। उल्लेखनीय है कि चंपत राय स्वयं VHP के अंतरराष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी हैं। इसके बाद 3 जुलाई 2026 को भाजपा के वरिष्ठ नेता और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे विनय कटियार ने चंपत राय पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि चंपत राय की गिरफ्तारी भी हो सकती है और यह भी कहा कि उन्होंने इस पूरे मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बातचीत की है। अब संघ महासचिव होसबले का बयान भी आ गया।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अधिकांश प्रमुख पदों पर लंबे समय से RSS और VHP से जुड़े लोग रहे हैं। चंपत राय स्वयं संघ परिवार के वरिष्ठ पदाधिकारी रहे हैं और ट्रस्ट के गठन से लेकर मंदिर निर्माण तक की पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने से यह सवाल बना रहेगा कि क्या ट्रस्ट की प्रशासनिक और वित्तीय निगरानी व्यवस्था में संस्थागत स्तर पर भी गंभीर खामियां थीं। क्या इसके लिए आरएसएस जिम्मेदार नहीं है। इस सिलसिले को देखेंः

  • सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद जमीन मामले में फैसला सुनाते हुए वो जमीन हिन्दुओं को देने की घोषणा की
  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वो एक ट्रस्ट बनाकर मंदिर बनाने का काम ट्रस्ट को सौंप दे
  • सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट बनाया और उसमें तमाम सदस्य और पदाधिकारी नियुक्त किए
  • सारी नियुक्तियां आरएसएस के निर्देश पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से की गईं। ये आरोप विपक्ष का है। 
  • इन्हीं नियुक्तियों की पैदाइश हैं- चंपत राय और अनिल मिश्रा। दोनों संघ से जुड़े हुए हैं। अनिल मिश्रा ने तो पीएम मोदी की बगल में बैठकर पूजा भी की थी।
  • पुलिस ने जिन 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया, उनमें चंपत राय का ड्राइवर टिन्नू यादव शामिल है। कैश गिनने वाले दफ्तर की चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी।
कुछ राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के सार्वजनिक बयानों को व्यापक संगठनात्मक जवाबदेही से ध्यान हटाकर व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, RSS का आधिकारिक रुख यह है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए, ट्रस्ट को अपनी व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए और जांच पूरी होने तक संयम बनाए रखना चाहिए। संघ के महासचिव का बयान विनय कटियार के बयान के बाद आना महत्वपूर्ण है। विनय कटियार ने पीएम मोदी से बात करने का दावा भी किया है। विनय कटियार ने चंपत राय का नाम लिया। आरएसएस के बयान में चंपत राय का जिक्र नहीं है।