संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक पर पीएम मोदी ने विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया लेकिन उनके भाषण में कुछ भी उल्लेखनीय नहीं था। दक्षिण भारत में परिसीमन विधेयक का काफी विरोध हो रहा है। तमिलनाडु में डीएमके प्रमुख स्टालिन से लेकर आम कार्यकर्ताओं ने काले कपड़े पहनकर गुरुवार को परिसीमन विधेयक का विरोध किया। सदन में भी विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर आए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ सांसदों द्वारा काले कपड़े पहनने का जिक्र करते हुए उनका मज़ाक उड़ाया। पीएम ने 16 अप्रैल को कहा कि भारतीय परंपरा में किसी भी शुभ कार्य से पहले “काला टीका” लगाया जाता है, ताकि उस पर किसी प्रकार के नेगेटिव या बुरी नजर का असर न पड़े। उन्होंने काले कपड़े पहन कर सदन में आने वालों को धन्यवाद देते हुए कहा कि आपका “काला टीके” स्वीकार है।
लोकसभा में गुरुवार को पेश किए गए विवादित परिसीमन विधेयक का दक्षिण भारत में भारी विरोध हो रहा है। तमिलनाडु में तो खासा मुखर विरोध है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने गुरुवार को तमिलनाडु में विरोध में काला झंडा लहराया। काले लिबास और काले कपड़ों में परिसीमन बिल की प्रतियां जलाईं। राज्य में अन्य स्थानों पर भी इसका विरोध हो रहा है। प्रधानमंत्री और उनकी सरकार के अन्य मंत्री दक्षिण भारत के विरोध को गंभीरता से लेने को तैयार नहीं हैं। पीएम मोदी का भाषण इस बिल पर सफाई देते हुए बीता। 
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं और यह “स्पष्ट” है कि उन्हें इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि इस तरह का सुधार लगभग तीन दशकों तक टलता रहता तो उसका लाभ सभी दलों और जनता के लिए खत्म हो जाता।
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मोदी का ब्लैंक चेक ऑफर

हल्के-फुल्के अंदाज में उन्होंने कहा कि यदि श्रेय की बात है, तो कोई और भी इसे ले सकता है। उन्होंने मजाकिया लहजे में कहा कि कोई भी सदस्य अपनी फोटो प्रकाशित कर सकता है और वह विधेयक के पारित होने का श्रेय लेने के लिए “ब्लैंक चेक” देने को तैयार हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक देशहित में पुरानी सीमाओं से आगे बढ़ने और महिला सशक्तिकरण को मजबूत करने का एक अवसर है। उन्होंने संसद में इस विधेयक को आमराय से आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब ऐसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर एकमत होता है, तो सत्ता पक्ष की विशेष जिम्मेदारी बनती है कि वह इसे प्रभावी ढंग से लागू करे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वह इस विधेयक का कोई श्रेय नहीं चाहते। उन्होंने कहा कि विधेयक पारित होने के बाद वह किसी भी नेता की फोटो के साथ पूरा पेज का विज्ञापन देने के लिए भी तैयार हैं। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि इस विधेयक को किसी एक व्यक्ति या पार्टी की सफलता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामूहिक उपलब्धि के रूप में समझा जाना चाहिए।

'विरोध करने वालों को कीमत चुकानी होगी'

महिला आरक्षण और परिसीमन पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग इस प्रस्ताव का विरोध करेंगे, उन्हें “लंबे समय तक कीमत चुकानी पड़ेगी।” उन्होंने इसे महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की लंबे समय से लंबित मांग बताया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्षों तक इस मुद्दे को “तकनीकी कारणों” और प्रक्रियागत आपत्तियों के नाम पर टाला जाता रहा। उन्होंने कहा कि 33 प्रतिशत महिला आरक्षण का खुलकर विरोध करने का साहस किसी में नहीं था, लेकिन इसे लगभग तीन दशकों तक लंबित रखा गया। अब समय आ गया है कि देरी समाप्त हो और प्रक्रिया आगे बढ़े।

मैं भी ओबीसी हूंः मोदी

उन्होंने टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी पर भी टिप्पणी की। जब उनके भाषण में व्यवधान डाला गया, तो प्रधानमंत्री ने कहा, “उन्हें बोलने दीजिए, वहां उन्हें कोई बोलने नहीं देता।” प्रधानमंत्री ने कहा कि वह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से आते हैं, लेकिन उनकी जिम्मेदारी सभी को साथ लेकर चलने की है। उन्होंने कहा कि यह समावेशी नज़रिया संविधान के सिद्धांतों से प्रेरित है, जो सभी वर्गों की तरक्की पर जोर देता है।

राजनीतिक लाभ के लिए झूठे नैरेटिव बनाने की आलोचना

उन्होंने कहा कि भारत की विकास यात्रा सांसदों को यह अवसर देती है कि वे महिलाओं को निर्णय-प्रक्रिया में शामिल करें। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी में भारत आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और वैश्विक स्तर पर उसकी स्वीकार्यता बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि “विकसित भारत” केवल बुनियादी ढांचे से नहीं, बल्कि नीति निर्माण में महिलाओं की सार्थक भागीदारी से परिभाषित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया, उन्हें देश की महिलाओं ने कभी माफ नहीं किया। उन्होंने कहा कि भारत को एक इकाई के रूप में सोचना चाहिए, कश्मीर से कन्याकुमारी तक और नीतियां भी उसी दृष्टि से बनाई जानी चाहिए। उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए बनाए जा रहे “झूठे नैरेटिव” की आलोचना करते हुए कहा कि उनमें “सच्चाई का कोई अंश नहीं” है।

...अब प्रायश्चित का समयः मोदी

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह भ्रम नहीं होना चाहिए कि देश महिलाओं को आरक्षण “मिल” रहा है, बल्कि यह उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि दशकों तक यह अवसर टलता रहा और अब यह “प्रायश्चित” करने का समय है। उन्होंने यह भी कहा कि चाहे “गारंटी” शब्द इस्तेमाल किया जाए या “वादा”, या किसी अन्य भाषा का अच्छा शब्द लिया जाए मुख्य बात नीयत की स्पष्टता है, न कि शब्दों का खेल।
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक किसी एक दल के लाभ के लिए नहीं है और इसे राजनीतिक रंग नहीं दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब राजनीतिक रूप से जागरूक हैं और पंचायत स्तर तक निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
उन्होंने जोर देकर कहा कि जब महिलाएं बड़ी संख्या में संसद में आएंगी, तो वे खुद अपने प्रतिनिधित्व की दिशा तय करेंगी। उन्होंने कहा कि अब तक जो प्रक्रियागत अड़चनें इस विधेयक को रोकती रहीं, उन्हें खत्म कर देशहित में आगे बढ़ना चाहिए।

महिलाओं के लिए 272 सीटें आरक्षित हो जाएंगीः कानून मंत्री मेघवाल

केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को कहा कि लोकसभा की कुल संख्या बढ़ाकर 815 की जाएगी, जिनमें से 272 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। मेघवाल ने गुरुवार को कहा कि इस आरक्षण के लागू होने से न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा। प्रस्तावित कानूनों के अनुसार, लोकसभा की वर्तमान संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि होगी।
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उन्होंने स्पष्ट किया, “महिला आरक्षण लागू होने के बाद न तो पुरुषों को और न ही किसी राज्य को कोई नुकसान होगा।” मेघवाल ने यह भी बताया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के आरक्षण के भीतर अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण का प्रावधान होगा। मंत्री ने कहा कि यदि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023” (महिला आरक्षण विधेयक) अपने वर्तमान स्वरूप में जारी रहता है, तो 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं के लिए सीटों का आरक्षण लागू करना संभव नहीं होगा, क्योंकि यह 2026 के बाद उपलब्ध होने वाली जनगणना के आंकड़ों पर आधारित होगा। इसी कारण संविधान संशोधन विधेयक लाया गया है। उन्होंने कहा, “इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार देना है।”
गुरुवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 पर चर्चा और पारित करने के लिए पेश किया गया। इन विधेयकों को लगभग 40 मिनट की तीखी बहस के बाद पेश किया गया, जिसके बाद विपक्ष ने संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को पेश करने के लिए वोटिंग (डिवीजन) की मांग की। बाद में यह विधेयक 251 सदस्यों के समर्थन और 185 सदस्यों के विरोध के साथ पेश किया गया। संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के अनुसार, 2029 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण कानून को लागू करने के लिए, 2011 की जनगणना पर आधारित परिसीमन के बाद लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं में भी सीटों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
विधेयक के मसौदे के अनुसार, लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षित सीटें राज्य या केंद्र शासित प्रदेश के विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर आवंटित की जाएंगी। कई विपक्षी दलों ने यह फैसला किया कि वे संसद में संविधान संशोधन विधेयक के परिसीमन प्रावधानों के खिलाफ एकजुट होकर मतदान करेंगे, हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे विधायी निकायों में महिलाओं के आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं।