चार दिन पहले ही मीडिया ने यह रिपोर्ट किया था कि मोदी सरकार नियंत्रित तेल कंपनियों का मुनाफा बढ़ा है लेकिन इसके बावजूद तेल के दाम सोमवार 25 मई को चौथी बार बढ़ा दिए गए। द हिन्दू, हिन्दुस्तान टाइम्स, इंडियन एक्सप्रेस ने बताया है कि देश के घरेलू फ्यूल रिटेल बाजार पर 90% से अधिक नियंत्रण रखने वाली तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही (Q4 FY26) में शानदार प्रदर्शन किया है। इस चौथी तिमाही में इन कंपनियों का संयुक्त शुद्ध मुनाफा (Combined Net Profit) बीते वर्ष की समान अवधि के मुकाबले 40.74% (लगभग 41%) बढ़कर 19,470 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।
अमेरिका और इसराइल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला किया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज बंद कर दिया। तीनों कंपनियों के संयुक्त शुद्ध लाभ में 2025-26 में 130% की वृद्धि हुई है, जो ₹77,280.65 करोड़ तक पहुंच गया, जबकि 2024-25 में यह ₹33,601.57 करोड़ था। सरकार और तेल कंपनियों ने फौरन ग्लोबल मार्केट में तेल महंगा होने का हवाला देना शुरू किया। हालांकि सीज़फायर के बाद तेल की कीमतें बहुत ज्यादा नहीं बढ़ी। अभी जब सोमवार को यह रिपोर्ट तैयार की जा रही है तो भी तेल की कीमतें कम हुई हैं। मार्च 2026 में वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावट के बावजूद यह वृद्धि दर्ज की गई है। 
  • इन आंकड़ों का मतलब ये है कि पिछले साल हुए मुनाफे के मुकाबले, देश के लोगों से करीब 130% की और ज्यादा उगाही और कमाई की गई।
  • सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम 8% लुढ़ककर, $100/बैरल के नीचे $96.83 पर आ गिरा है।
  • मगर फिर भी आज (25 मई 2026) पेट्रोल का रेट ₹2.61 जबकि डीजल का रेट ₹2.71 बढ़ा दिया, जिससे 10 दिन और 4 किस्तों में डीजल और पेट्रोल लगभग 7.50 रुपए प्रति लीटर महंगा हो गया है। अब जो तेल का रेट गिरा, उसके संदर्भ में तेल कंपनियों को मुनाफे का अंदाजा लगाइए। यानी ट्रंप और उनकी मंडली तो युद्ध की खबरों को ऊपर-नीचे करने के लिए शेयर मार्केट में अरबों-खरबों कमा रहे हैं। इधर भारत में भी तेल कंपनियां कमाई कर रही हैं।
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इस वित्तीय वर्ष (2025-26) की अंतिम तिमाही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने टैक्स के बाद जबरदस्त मुनाफा कमाया है, जबकि भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) का मुनाफा लगभग पिछले साल के स्तर पर ही स्थिर रहा।

पूरे साल के मुनाफे में 130% का बंपर उछाल

चालू सप्ताह में घोषित वित्तीय परिणामों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में इन तीनों कंपनियों का कुल संयुक्त शुद्ध मुनाफा 130% बढ़कर ₹77,280.65 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 2024-25 में ₹33,601.57 करोड़ था। अधिकारियों के मुताबिक, साल के अधिकांश समय (फरवरी में अमेरिका-इसराइल और ईरान के बीच तनाव से पहले तक) कच्चे तेल की कीमतें स्थिर रहने के कारण कंपनियों को रिफाइनिंग और मार्केटिंग मार्जिन का भारी फायदा मिला, जिससे मुनाफे में यह ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया।

प्रमुख कंपनियों का प्रदर्शन इस प्रकार रहा

  • IOC (इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन): देश की सबसे बड़ी रिफाइनर कंपनी IOC का चौथी तिमाही का शुद्ध मुनाफा 56.6% बढ़कर ₹11,377.51 करोड़ रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹7,264.85 करोड़ था। वहीं, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कंपनी का मुनाफा 183.9% की भारी बढ़त के साथ ₹36,802.42 करोड़ पर पहुंच गया।
  • HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम): HPCL ने चौथी तिमाही में 46% की वृद्धि के साथ ₹4,901.50 करोड़ का शुद्ध मुनाफा कमाया। पूरे वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 133.2% उछलकर ₹17,175.23 करोड़ रहा। कंपनी ने अपने शेयरधारकों के लिए ₹19.25 प्रति शेयर के अंतिम लाभांश (Final Dividend) की भी घोषणा की है।
  • BPCL (भारत पेट्रोलियम): BPCL का चौथी तिमाही का मुनाफा मामूली 0.7% घटकर ₹3,191 करोड़ रहा, लेकिन पूरे वित्त वर्ष (FY26) के लिए कंपनी का नेट प्रॉफिट 75.54% की शानदार बढ़त के साथ ₹23,303 करोड़ दर्ज किया गया।
  • कड़वा सत्यः आज भी डीजल पर उत्पाद शुल्क यूपीए सरकार के मुकाबले 125% अधिक है और पेट्रोल पर 29% अधिक है। ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए नरेंद्र मोदी के पास अभी भी काफी गुंजाइश है, लेकिन बोझ जनता पर डाला जा रहा है। मुनाफा सरकार का है, नुकसान पूरी तरह से आपका। सरकार को महंगाई की वजह से अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव की कोई परवाह नहीं है। सरकार जब फिजूलखर्ची पर जनता को उपदेश देती है और उसके लोग विदेश यात्रा पर रहते हैं तो गंभीरता को समझा जा सकता है।

युद्ध, अंतरराष्ट्रीय बाजार और भारत

28 फरवरी को पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत करीब 72 डॉलर प्रति बैरल थी, जो 9 मार्च तक 66.7% उछलकर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी। हालांकि, मई में कीमतें थोड़ी नरम होकर 105.6 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं। लेकिन जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें गिरती हैं, उसका फायदा भारत की सरकारी तेल कंपनियां जनता को नहीं देतीं। हालांकि जवाब में उनके पास तमाम तर्क हैं। 
भारत के लिए कच्चे तेल की औसत खरीद कीमत (इंडियन बास्केट) जनवरी 2026 में $63.08 प्रति बैरल थी, जो फरवरी में $69.01, मार्च में $113.49 और अप्रैल में $114.48 प्रति बैरल तक जा पहुंची। मई (20 मई तक) में यह लगभग 6% घटकर $107.75 प्रति बैरल पर आई। इसके साथ ही अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया भी रिकॉर्ड निचले स्तर (96.83 रुपये) पर आ गया है, जिससे तेल आयात का खर्च बढ़ा है।
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सरकार का कहना है कि तेल कंपनियां सामूहिक रूप से अब भी प्रति दिन ₹500 करोड़ से अधिक का भारी नुकसान झेल रही हैं। इसलिए बार-बार तेल की कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। जबकि इस सवाल पर चुप हैं कि जब तेल सस्ता मिल रहा था तो उसका फायदा भारत की जनता को नहीं दिया गया।

देश के हालात

सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं कि बीजेपी शासित किसी भी राज्य का मुख्यमंत्री तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर चिंतित नज़र नहीं आ रहा है। उसकी प्राथमिकता बकरीद पर मुस्लिम लोग सड़कों पर नमाज़ न पढ़ें, गाय को राष्ट्रीय पशु न घोषित करने वाली पार्टी की सरकार गाय की कुर्बानी को लेकर चेतावनी दे रही है। यानी बीजेपी और उसकी शासित सरकार की पहली प्राथमिकता हिन्दू मुसलमान करना है। पत्रकार राणा अयूब समेत तमाम लोगों ने इस बारे में टिप्पणियां की हैं।