सुप्रीम कोर्ट ने उन्नाव रेप मामले में सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के फैसले के बाद सोशल मीडिया ट्रायल और कानूनी मामलों को सड़कों पर ले जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। इस दौरान केंद्र सरकार के अटॉर्नी जनरल तुषार मेहता ने दिल्ली हाई कोर्ट के उन दो जजों की तारीफ की, जिन्होंने रेप के मुजरिम पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को ज़मानत दी थी। हाईकोर्ट का फैसला सामने आने के बाद आम लोगों ने सोशल मीडिया पर जजों के फैसले के खिलाफ कड़ी आपत्ति जताई थी। कुछ महिला संगठनों ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन भी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने अब 29 दिसंबर 2025 को मुजरिम सेंगर को ज़मानत देने के फैसले पर रोक लगा दी।

कैसे उठा मामला और किस तरह चीफ जस्टिस की टिप्पणियां आईं

वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे और एन हरिहरन मुजरिम सेंगर की ओर से पेश हुए और सीबीआई की याचिका का विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि निचली अदालत ने सेंगर को केवल 'लोक सेवक' की परिभाषा के आधार पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। दवे ने कहा, "सजा केवल इसलिए दी गई क्योंकि वह लोक सेवक की परिभाषा के अंतर्गत आता था।" हरिहरन ने आईपीसी में लोक सेवक की परिभाषा का इस्तेमाल निचली अदालत द्वारा पीओसीएसओ मामले में दोषी ठहराए जाने के संदर्भ में कहा, "एक दंड संहिता दूसरी संहिता से परिभाषा नहीं ले सकती।"


उन्होंने यह भी बताया कि कुछ सोशल मीडिया अकाउंट दिल्ली हाईकोर्ट के जजों - जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन के खिलाफ आरोप लगा रहे थे, जिन्होंने सेंगर को जमानत दी थी।

इस पर सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने स्पष्ट रूप से कहा कि हाईकोर्ट के दोनों जज बेदाग ईमानदारी वाले प्रतिभाशाली जज हैं। मेहता ने कहा, "वे देश के सर्वश्रेष्ठ जजों में से हैं और इन दोनों जजों को बदनाम करने का कोई भी प्रयास कड़ी निंदा का पात्र है।" मेहता ने यह भी स्पष्ट किया कि सीबीआई को दोनों जजों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, “कुछ तत्व हमेशा ईमानदार जजों को धमकाने का प्रयास करते हैं। ऐसी कुटिल शक्तियों को प्रोत्साहन नहीं दिया जाना चाहिए।”


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चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने कहा कि न्यायपालिका पर सार्वजनिक दबाव बनाने और सड़कों पर प्रदर्शन करने की कोशिशें बहुत दुर्भाग्यपूर्ण हैं। बेंच को सेंगर के वकीलों ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के उन जजों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित की जा रही हैं, जिन्होंने सेंगर की सजा निलंबित करने का आदेश दिया था, साथ ही कैप्शन में लोगों से इन जजों की पहचान करने की अपील की जा रही थी।

अदालत के अंदर बहस करें, बाहर नहींः सुप्रीम कोर्ट

इस पर कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा, "यह बहुत-बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। हम आइवरी टावर में नहीं बैठे हैं। हमें पता है कि स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिशें की जा रही हैं।" कोर्ट ने चेतावनी दी कि "आप सब कुछ सड़कों पर नहीं ला सकते। अदालत के अंदर बहस करें, बाहर नहीं।" सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका के मीडिया ट्रायल की निन्दा की। यहां बताना ज़रूरी है कि सुप्रीम कोर्ट या किसी भी कोर्ट के फैसले पर लोग सोशल मीडिया पर अपनी राय अब खुलकर ज़ाहिर करने लगे हैं। जनता किसी भी जज के फैसले को माफ करने या उसका जिक्र करने से अब नहीं रुक रही है। यहां तक फैसलों में पक्षपात के आरोपों को भी सोशल मीडिया पर दर्ज कराया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से पूरी कोशिश हुई कि ऐसा न हो, लेकिन जनता और संबंध जन संगठन अपना रवैया नहीं सुधार रहे हैं।

उन्नाव रेप केस में सीबीआई पर आरोप

उन्नाव बलात्कार पीड़िता के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि "इसे जीत नहीं कहा जाना चाहिए, लेकिन हमें थोड़ी राहत मिली है। सीबीआई ने एक बहुत ही सीमित मुद्दे पर अपना रुख अपनाया और हमारे सबसे मजबूत तर्कों पर ध्यान नहीं दिया। सीबीआई ने हमसे बिल्कुल भी सलाह नहीं ली। पीड़िता के पक्ष में इतने सबूत हैं कि कोई भी अदालत उसके पक्ष में फैसला सुनाएगी... अदालत ने मुख्य बिंदुओं पर हमारी बात नहीं सुनी। सीबीआई ने मामले के सिर्फ ऊपरी पहलुओं पर चर्चा की है; हमारे पास पूरा मामला है... सीबीआई ने हमें इस मामले में पक्षकार नहीं बनाया। हम इस फैसले को पीड़िता की जीत नहीं मान सकते...।"

उन्नाव रेप केस में पीड़िता की बहन का बयान

पीड़िता की बहन ने कहा, "उसने पहले मेरे चाचा और फिर मेरे पिता की हत्या की। फिर मेरी बहन के साथ यह घटना घटी। ...हम अभी भी खतरे में हैं। कौन जाने, वे मुझे और मेरे पूरे परिवार को मार सकते हैं। अगर उन्होंने उसे रिहा कर दिया है, तो उन्हें हमें जेल में डाल देना चाहिए। कम से कम वहां हमारी जान तो सुरक्षित रहेगी। हम जीवित रहेंगे। मेरी बहन इस बात से परेशान है कि उसे जमानत मिल गई है। मेरा परिवार अभी भी खतरे में है। छोटे बच्चे हैं। मेरा एक भाई है। कौन जाने वे उसके साथ क्या करेंगे? उनके कई आदमी बाहर घूम रहे हैं, धमकियां दे रहे हैं, कह रहे हैं, "अब जब वह वापस आ रहा है, तो तुम मेरा क्या कर सकते हो? मैं तुम सभी को मार डालूंगा।" हमें इस तरह की धमकियां मिलती हैं, इसलिए मैं डर में जीती हूं..."

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पूर्व आईपीएस किरण बेदी का खुला बयान

सेंगर की जमानत पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने पर, पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व एलजी किरण बेदी ने कहा, "यह एक अकेली लड़की की लड़ाई थी। एक तरफ दिग्गज नेता था, तो दूसरी तरफ एक असहाय लड़की। उसका शोषण किया गया और उसके साथ घोर अन्याय हुआ, फिर भी उसने हिम्मत नहीं हारी। हम इस लड़की और उसके परिवार की बहादुरी को सलाम करते हैं... इन सब के बावजूद, उसने कभी हार नहीं मानी और दृढ़ रही। इसका श्रेय उन लोगों को भी जाता है जिन्होंने हर कदम पर उसका साथ दिया। हालांकि, यह बेहद दुखद है कि एक तकनीकी कारण से दोषी की सजा को निलंबित कर दिया गया। इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि ऐसा फैसला एक माननीय उच्च न्यायालय ने लिया... हालांकि, आज (29 दिसंबर) सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया। इससे यह पता चलता है कि यदि आप संघर्ष करते हैं, सामूहिक आवाज उठाते हैं और अपने लिए और न्याय के लिए एकजुट होते हैं, तो अंततः न्याय मिलता है। आज, वह न्याय सुप्रीम कोर्ट ने दिया है।"

महिला कांग्रेस की अध्यक्ष अलका लांबा का बयान

महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका लांबा ने इस मामले में सोमवार को मीडिया को संबोधित किया। अलका लांबा ने कहा-  आज सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने हाईकोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है कि नाबालिग से रेप और उसके परिजनों की हत्या का दोषी BJP का पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर जेल से बाहर नहीं आएगा।
यह पीड़िता, उसके परिवार और उसके साथ खड़ी हर आवाज की जीत है। मगर यह लड़ाई अभी ख़त्म नहीं हुई है। नरेंद्र मोदी कहते थे कि नाबालिग के बलात्कारियों को दोषी साबित होते ही फांसी दी जाएगी, लेकिन सभी ने देखा कि कैसे बलात्कारियों और अपराधियों को बचाया जा रहा है।